सोमवार को भारतीय नौसेना (Indian Navy) का जहाज IOS Sagar मालदीव की राजधानी माले (Maldives Male) पहुंचा। यह इसकी विदेशी तैनाती का पहला पड़ाव है, जो हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की बढ़ती रणनीतिक सक्रियता को दर्शाता है (Indian Ocean Region)। भारतीय दूतावास के अनुसार, इस मिशन में 16 देशों के 39 अंतरराष्ट्रीय दल के सदस्य भी शामिल हैं, जिनमें विभिन्न देशों के रक्षा बलों के जवान भी मौजूद हैं। यह पहल भारत के “साझेदारी के माध्यम से नेतृत्व, एकता के माध्यम से शक्ति, शांति के माध्यम से प्रगति के विजन को मजबूत करती है”।
समुद्री सहयोग का बड़ा मंच
रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, IOS Sagar का दूसरा संस्करण 16 मार्च को शुरू हुआ था। इसका उद्देश्य हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में सहयोगात्मक समुद्री सुरक्षा को बढ़ावा देना है (Maritime Security)। इस कार्यक्रम में Indian Ocean Naval Symposium (IONS) के 16 सदस्य देशों की भागीदारी है। खास बात यह है कि Indian Navy ने फरवरी 2026 में IONS की अध्यक्षता भी संभाली है।
क्या है IOS सागर मिशन?
- IOS सागर एक अनोखा ऑपरेशनल कार्यक्रम है
- मित्र देशों के नौसैनिक एक ही जहाज पर प्रशिक्षण लेते हैं
- संयुक्त समुद्री अभ्यास और नौकायन किया जाता है
- अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इंटरऑपरेबिलिटी (साझा संचालन क्षमता) बढ़ाई जाती है
यह पहल भारत की SAGAR (Security and Growth for All in the Region) नीति को भी मजबूत करती है।
कोच्चि से शुरू, समुद्र तक सफर
कार्यक्रम की शुरुआत कोच्चि स्थित नौसेना प्रशिक्षण केंद्रों में हुई, जहां प्रतिभागियों को नौसेना संचालन, समुद्री सुरक्षा और तकनीकी कौशल की ट्रेनिंग दी गई (International Naval Training)। इसके बाद सभी को जहाज पर तैनात कर संयुक्त समुद्री यात्रा कराई जा रही है (Naval Cooperation)।
क्यों है यह मिशन खास?
- हिंद महासागर में भारत की रणनीतिक मौजूदगी मजबूत
- मित्र देशों के साथ रक्षा सहयोग में बढ़ोतरी
- समुद्री चुनौतियों से निपटने के लिए साझा समझ विकसित
- क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को बढ़ावा
IOS सागर का यह दौरा सिर्फ एक नौसैनिक मिशन नहीं, बल्कि भारत की ‘नेतृत्व और सहयोग’ आधारित वैश्विक नीति का मजबूत उदाहरण है। मालदीव में इसकी मौजूदगी से यह साफ संकेत मिलता है कि भारत हिंद महासागर क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और साझेदारी को नई दिशा देना चाहता है (India Foreign Policy)।



