Kedarnath mandir: हिमालय की ऊंची और बर्फीली चोटियों के बीच बर्फ-बादलों से घिरा एक ऐसा मंदिर..जिसका वक्त, तूफ़ान और प्रलय तक कुछ नहीं बिगाड़ पाया। ऐसा मंदिर..जिसके रहस्यों (Kedarnath Mystery) को वैज्ञानिकों की सोच और समझ भी भेद नहीं पाई। ऐसा मंदिर..जहां चमत्कारों का सिर्फ आदि है, अंत नहीं। indianviewer.com आपको अपने इस लेख में केदारनाथ धाम से जुड़े रहस्य, चमत्कार, विश्वास और इतिहास के उन पन्नों को पलटकर दिखाएंगा, जिसे देखकर आप चौंक तो जाएंगे, मगर मंत्रमुग्ध भी हो जाएंगे। इससे पहले कि कई रहस्यों से आप रूबरू हो, सबसे पहले ये जानिए कि कैसे हुआ था केदानाथ मंदिर का निर्माण।

किसने किया केदारनाथ मंदिर का निर्माण?
पौराणिक कथाओं के अनुसार केदारनाथ धाम 1,000 साल से भी ज्यादा पुराना है। जिसका मूल निर्माण महाभारत का युद्ध खत्म होने के बाद द्वापर युग में पांडवों ने कराया था और बाद में आदि शंकराचार्य ने इसका पुर्ननिर्माण किया। हिमालय की गोद में बसा केदारनाथ मंदिर एक या दो नहीं बल्कि कई रहस्यों से भरा है। जिन रहस्यों का जवाब बड़े से बड़े वैज्ञानिक भी देने में असमर्थ रहे। चार धामों में से एक केदारनाथ धाम शिव भक्तों की अटूट आस्था और किस्सों का अद्भुत संगम है। आईए जानते हैं केदारनाथ मंदिर से जुड़े इन रहस्यों की कहानी

केदारनाथ धाम में जलती है अखंड ज्योति
केदारनाथ धाम (Kedarnath Dham) का सबसे अनोखा रहस्य है मंदिर के कपाट बंद होने के बाद भी 6 महीनों तक मंदिर के अंदर अखंड ज्योति का जलना। हिमालय की ऊँची और बर्फीली चोटियों के बीच बसा केदार धाम सिर्फ़ 6 महीनों के लिए ही खुलता है (Char Dham Yatra)। अक्षय तृतीया (akshaya tritiya) से भाई दूज (bhai dooj) यानी अप्रैल (april) से लेकर लगभग अक्टूबर(october) तक ही मंदिर के कपाट भक्तों के लिए खुले रहते हैं। बाकी के 6 महीने वहां पर -20 डिग्री तक तापमान होता है। ऐसे में वहां जाना भक्तों के लिए जानलेवा हो सकता है, इसलिए 6 महीने के लिए बाबा केदार के कपाट बंद कर दिए जाते हैं। मान्यता के अनुसार कपाट बंद करते वक्त मंदिर के अंदर अखंड ज्योत (Akhand Jyoti) जलायी जाती है, जो कपाट खोलने पर जलती हुई मिलती है। मान्यता है कि उस दौरान देवता स्वयं यहां पूजा-अर्चना करते हैं। देवता शिव (Lord Shiva) की उपासना करते हैं, इसीलिए अखंड ज्योति जलती ही रहती है (Temple Mystery)।

गर्भगृह की शिवलिंग का आकार त्रिकोणाकार
पौराणिक कथाओं के अनुसार महाभारत का युद्ध खत्म होने के बाद पांडव अपने पापों का प्रयाश्चित करने के लिए भगवान शिव की खोज में हिमालय आए। शिव जी पांडवों को क्षमा नहीं करना चाहते थे, वो चाहते थे कि पांडव सच्चे मन से तपस्या करें, अपने कर्मों का प्राश्चित करें। इसीलिए शिवजी ने पांडवों की नजरों से बचने के लिए एक बैल का रुप धारण कर लिया। मगर भीम ने उस बैल को देखा, तो पहचान लिया कि वो साधारण बैल नहीं बल्कि भगवान शिव का अवतार है। शिव जी अपने पहचाने जाने के बाद धरती में समाने लगे। पांडवों ने जब उन्हें पकड़ने की कोशिश की, तो उनके हाथ बैल की पीठ यानी कुबड़ लगा। इसीलिए केदारनाथ धाम में प्राकृतिक रुप से निर्मित शिवलिंग का आकार त्रिकोणाकार है। जब शिव भूमि में समा गए तो उनके शरीर के अलग-अलग भाग 5 स्थानों पर प्रकट हुए। इन्हीं स्थानों को पंचकेदार कहा जाता है।
(Kedarnath) केदारनाथ-पीठ (कूबड़): पंच केदार में ये सबसे प्रमुख और प्रसिद्ध धाम है, जिसे केदारनाथ धाम करते हैं।
(Tungnath) तुंगनाथ -भुजाएं: तुंगनाथ मंदिर में शिव की भुजाएं प्रकट हुई, ये दुनिया का सबसे ऊंचाई पर स्थित शिव मंदिर है।
(Rudranath) रुद्रनाथ- मुख: रुद्रनाथ मंदिर में भगवान शिव का मुख प्रकट हुआ, ये मंदिर घने जंगलों के बीच स्थित है।
(Madhyamaheshwar) मध्यमहेश्वर-नाभि: मध्यमहेश्वर मंदिर में भगवान शिव की नाभि (मध्य भाग) की पूजा होती है।
(Kalpeshwar) कल्पेश्वर-जटा: कल्पेश्वर मंदिर में भगवान शिव की जटाएं प्रकट हुई थी, पंचकेदार में से ये एकमात्र ऐसा मंदिर हैं, जहां सालभर भोलेनाथ के दर्शन होते हैं।
मान्यता है कि पांडवों ने इन्हीं 5 स्थानों पर मंदिर बनवाए। यहां भगवान शिव की घोर तपस्या की, जिसके बाद उन्हें अपने पापों से मुक्ति मिल पाई।

केदारनाध धाम के अमृत कुंड की कहानी
केदारनाथ मंदिर परिसर के अंदर एक अमृत कुंड स्थित है। जिसके बारे में ऐसी मान्यता है कि इस अमृत कुंड का पानी कभी खत्म नहीं होता है। साल 2013 में आई भीषण त्रासदी में भी इस अमृत कुंड का अस्तित्व टस से मस नहीं हुआ। धार्मिक आस्था के अनुसार इस अमृत कुंड का पानी व्यक्ति के हर रोग को दूर करने की शक्ति रखता है। ऐसी मान्यता है कि गर्भगृह में शिवलिंग का जलाभिषेक किया जाता है तो उसका अंश इसी कुंड में प्रवेश करता है,इसलिए इस जल में एक अलौकिक शक्ति है जो हर रोग-दोष को दूर करती है। दूर-दूर से आए बाबा के भक्त अमृत कुंड का जल अपने घर भी ले जाते हैं।

भीमशिला का चमत्कारी रहस्य
साल 2013 में केदारनाथ में आई प्रलय के दौरान धाम के आसपास की सभी इमारते ढह गई, पूरा तहस-नहस हो गया। पूरे केदारनाथ धाम का स्वरूप बिगड़ गया। मगर मंदिर को खरोच तक नहीं आई। क्योंकि उस दौरान भी एक चमत्कार हुआ था। प्रलय के उस मलबे में एक विशाल शिला तीव्र वेग से आई और मंदिर के पास आकर रुक गई। इस विशाल शिला यानि चट्टान को भीमशिला (Bheemshila) कहा गया। इस भीमशिला चट्टान ने मंदिर परिसर के सामने आकर तेज़ पानी के बहाव को दो हिस्सों में बांट दिया। जिसकी वजह से मुख्य मंदिर सुरक्षित रहा।




