पश्चिम बंगाल में चुनाव की तारीखों के ऐलान के साथ ही हिंसा और झड़पों की तस्वीरें सामने आने लगी हैं। Trinamool Congress (TMC) और Bharatiya Janata Party (BJP) के कार्यकर्ताओं के बीच टकराव की घटनाओं ने चुनावी माहौल को गर्म कर दिया है (West Bengal election violence)। इस बार मतदान सिर्फ दो चरणों में होगा — 23 और 29 अप्रैल को (Bengal voting dates)। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि मतदान तक हिंसा की घटनाएं पूरी तरह थमना मुश्किल हो सकता है। यही वजह है कि Election Commission of India ने सुरक्षा व्यवस्था को पहले से कहीं ज्यादा मजबूत करने का फैसला लिया है।
अर्धसैनिक बलों की रिकॉर्ड तैनाती
इस बार चुनाव में करीब तीन लाख जवानों को तैनात करने की योजना बनाई गई है (Election Commission security plan)। इनमें Border Security Force (BSF), Central Reserve Police Force (CRPF), Central Industrial Security Force (CISF), Sashastra Seema Bal (SSB) और Indo-Tibetan Border Police (ITBP) के जवान शामिल होंगे (CRPF BSF election duty)। 2021 के विधानसभा चुनाव में जहां CAPF की 1071 कंपनियां तैनात थीं, वहीं इस बार 2400 से 3000 कंपनियां तैनात करने की तैयारी है । इनमें से 480 कंपनियां पहले ही West Bengal में पहुंच चुकी हैं।
- 31 मार्च तक 300 और कंपनियां पहुंचेंगी
- 7 अप्रैल तक 300 और कंपनियों की तैनाती
- 10 और 13 अप्रैल तक बाकी सभी कंपनियां तैनात कर दी जाएंगी
- सबसे ज्यादा 230 कंपनियां CRPF की होंगी
- पोलिंग बूथों पर सिर्फ CAPF का कंट्रोल
इस बार सबसे बड़ा बदलाव यह है कि मतदान के दिन 23 और 29 अप्रैल को हर पोलिंग बूथ (West Bengal poll phases) की 100% सुरक्षा और नियंत्रण अर्धसैनिक बलों के हाथ में होगा (CRPF BSF election duty)। राज्य पुलिस की भूमिका सीमित रखी गई है। बंगाल पुलिस केवल मतदाताओं की लाइन व्यवस्थित कराने और जरूरत पड़ने पर CAPF की मदद करेगी। पोलिंग बूथ की जिम्मेदारी उनके पास नहीं होगी (Paramilitary forces in Bengal)।

क्यों लिया गया यह फैसला?
पिछले चुनावों के अनुभवों को देखते हुए (TMC vs BJP clash) चुनाव आयोग ने यह सख्त कदम उठाया है। CAPF न सिर्फ पोलिंग बूथों पर तैनात रहेगी बल्कि चुनाव कर्मचारियों, अधिकारियों और मतदाताओं की सुरक्षा भी सुनिश्चित करेगी (Bengal polling booth security)।
ये है मकसद (Free and fair election India)
- मतदाताओं पर कोई दबाव न बने
- किसी को डराया-धमकाया न जा सके
- चुनाव भयमुक्त, पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से हो



