Russia Petrol Export Ban From 1 April: जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट के उद्घाटन समारोह में जनता को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मिडिल ईस्ट संकट का जिक्र किया। उन्होंने विपक्ष पर अफवाह फैलाने का आरोप लगाने के साथ बताया किया कि सरकार जनता को किसी भी तरह की परेशानी ना होने देने के लिए हर मुमकिन कोशिश कर रही है। इस संकट की घड़ी में तेल और गैस की आपूर्ति बाधित ना हो, इसके लिए नीति, कूटनीति और रणनीति..हर दिशा में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि, “आज पूरा विश्व कितना चिंतित है, पश्चिम एशिया में एक महीने से युद्ध चल रहा है, युद्ध की वजह से कई सारे देशों में खाने-पीने के सामान, पेट्रोल, डीजल, गैस, खाद, ऐसी कई जरूरी चीजों का चारों तरफ संकट पैदा हो गया है। देश इस संकट का सामना करने के लिए प्रयास कर रहा है। इस संकट का पूरी शक्ति से मुकाबला कर रहा है। देशवासियों के ताकत के भरोसे कर रहा है। भारत बहुत बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और गैस युद्ध प्रभावित क्षेत्रों से मंगाता है। इसलिए सरकार हर वो कदम उठा रही है, जिससे सामान्य परिवारों पर, हमारे किसान भाइयों पर, इस संकट का बोझ न पड़े।
रूस के फैसले से चौंका भारत?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जनता को आश्वस्त कर रहे थे कि सरकार हालात पर पैनी नजर बनाए हुए है। उधर, रूस ने 1 अप्रैल से 31 जुलाई तक पेट्रोल के एक्सपोर्ट पर रोक लगाने का ऐलान कर दिया (Russia petrol export ban)। रूस के उप प्रधानमंत्री एलेक्जेंडर नोवाक ने ऊर्जा मंत्रालय को इस बाबत प्रस्ताव तैयार का निर्देश भी दे दिया (Russia fuel export news)। रूस का कहना है कि, वो ये कदम सिर्फ इसलिए उठा रहा है ताकि घरेलू सप्लाई पर असर ना हो और कीमतों पर काबू रखा जा सके (Russia petrol ban April 1)। रूस की चिंता वाजिब भी है (fuel shortage Russia) क्योंकि ईरान-इजरायल जंग की वजह से ऑयल सप्लाई और पेट्रोलियम प्रोडक्शन मार्केट में अस्थिरता बढ़ी है। कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। ऐसे में कहीं तेल सप्लाई करते-करते रूस का ही तेल ना निकल ना जाए, इसलिए उसने पेट्रोल निर्यात पर एक तय समय तक रोक लगाने का फैसला किया है (Russia oil policy 2026)।
रूस के कौन कितना ऑल इम्पोर्ट करता है?
- रूस हर रोज 1.2 से 1.7 लाख बैरल पेट्रोल निर्यात करता है
- रूस ने पिछले साल करीब 50 लाख मीट्रिक टन पेट्रोल एक्सपोर्ट किया था
- 2025 में रूस से चीन ने 63 हजार करोड़ का तेल इंपोर्ट किया था
- तुर्किए ने 27,300 करोड़ रुपए का ऑयल इंपोर्ट किया था
- भारत ने 23,000 करोड़ रुपए का तेल रूस से खरीदा था़
रूस के फैसले का भारत पर कितना असर?
अप्रैल से पेट्रोल का निर्यात रोकने का रूस का फैसला भारत पर कितना असर डालेगा (petrol price global impact) ? एक्सपर्ट्स का मानना है कि, भारत सीधे तौर पर पेट्रोल जैसे तैयार ईंधन पर ज्यादा निर्भर नहीं है। भारत क्रूड ऑयल खरीदने पर ज्यादा जोर देता है (petrol export ban impact India)। क्रूड ऑयल को ही रिफाइन कर पेट्रोल और डीजल बनाए जाते हैं। भारत अपनी जरूरत का करीब 80% कच्चा तेल आयात करता है, जिसमें से लगभग 20% रूस से आता है। भारत बहुत कम मात्रा में पेट्रोल या अन्य तैयार ईंधन आयात करता है। इसके बजाय बड़े रिफाइनरी नेटवर्क के जरिए कच्चे तेल को खुद प्रोसेस करता है। यही वजह है कि रूस के पेट्रोल निर्यात पर लगी रोक का भारत पर सीधा असर पड़ने की संभावना बहुत कम है। जानकारी के लिए आपको बता दें कि, भारत रोजाना करीब 56 लाख बैरल कच्चा तेल रिफाइन करता है। यह ना सिर्फ अपनी घरेलू जरूरत पूरी करता है, बल्कि तैयार ईंधन का निर्यात भी करता है।



