शंभू बॉर्डर पर धरना दे रहे पंजाब के किसान अब बुधवार को दिल्ली कूच करेंगे। किसानों ने ये फैसला केंद्र सरकार के साथ हुई मीटिंग के बाद लिया। केंद्र ने कपास, मक्का, मसूर, अरहर और उड़द यानी 5 फसलों पर MSP देने का प्रस्ताव दिया था। लेकिन, किसानों ने ये प्रस्ताव खारिज कर दिया। किसान नेता सरवन सिंह पंढेर ने बताया कि, उन्होंने सरकार के प्रस्ताव को क्यों खारिज किया है। सरवन सिंह पंढेर ने कहा कि, ''बहुत सारे विशेषज्ञों के मुताबिक 5 फसलों के लिए केंद्र सरकार कांट्रैक्ट करेगी। इसमें जो किसान पहले से इसकी खेती कर रहे हैं वो बाहर हो जाएंगे। इसमें 5 साल की सीमा निर्धारित की गई थी, जो ठीक नहीं है।'' उन्होंने कहा कि, ''किसानों से होने वाली लूट को MSP कानून के माध्यम से ही रोका जा सकता है। लेकिन कार्पोरेट घराने इसे लाने नहीं दे रहे हैं। सरकार चाहे तो इसके लिए विशेष सत्र बुला सकती है। कोई भी विपक्षी दल इसका विरोध नहीं करेगा।''

PM मोदी को आंदोलनकारी किसानों की चुनौती!
किसान नेता सरवन सिंह पंढेर ने सरकार से किसानों की मांग मानने की अपील की। साथ ही उन्होंने कहा कि, दिल्ली कूच का उनका कार्यक्रम पहले की तरह रहेगा। उन्होंने कहा कि, ''कल (बुधवार) 21 फरवरी को 11 बजे तक का समय दिया गया है, उसके बाद हम दिल्ली जाएंगे। अभी तक केंद्र सरकार ने बाकी मांगों पर भी हमें कोई जानकारी नहीं दी है। सरकार के पास पहले ही दो साल का समय था। अगर नीयत ठीक है तो समय बहुत है, अगर नीयत ठीक नहीं है तो समय नहीं है।'' इसके अलावा पंढेर ने कहा कि, ''BJP ऐसा दावा करती है कि नरेंद्र मोदी सबसे मजबूत प्रधानमंत्री हैं। हम ये मान लेते हैं लेकिन सरकार हमारी मांगे मानें तो हम भी मान लेंगे। प्रधानमंत्री मजबूत हैं तो WTO से खेती के मामले में भारत सरकार बाहर निकले।''

गुरनाम सिंह चढूनी ने दी सरकार को धमकी?
किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी ने भी सरकार को चेतावनी दी है। उन्होंने धमकी भरे अंदाज़ में कहा कि, ''सरकार के पास 21 फरवरी तक का समय है। सरकार को सोचना और समझना चाहिए कि तिलहन और बाजरा बहुत महत्वपूर्ण हैं। जैसे उन्होंने दालों, मक्का और कपास का उल्लेख किया, उन्हें इन दोनों फसलों को भी शामिल करना चाहिए। अगर इन दोनों को शामिल नहीं किया गया तो हमें इस बारे में फिर से सोचना होगा। कल हमने फैसला लिया कि अगर 21 फरवरी तक सरकार नहीं मानी तो हरियाणा भी आंदोलन में शामिल होगा।'' वहीं, आज रात 12 बजे तक हरियाणा के कई जिलों में इंटरनेट सेवा पर रोक लगा दी गई है। अंबाला, कुरुक्षेत्र, कैथल,जींद, हिसार, फतेहाबाद और सिरसा में इंटरनेट सेवा रोक दी गई है।

सरकार का ऑफर किसानों के लिए फायदेमंद?
किसानों की प्रमुख मांग है MSP गारंटी कानून। दरअसल, केंद्र सरकार ने 23 फसलों की खरीद के लिए MSP तय किया हुआ है। हर साल CACP की सिफारिशों के अनुरूप केंद्र सरकार MSP की घोषणा करती है और राज्य सरकार बतौर नोडल एजेंसी नोटिफाईड फसलों की खरीद करती है। MSP पर फसलों की व्यवस्था से किसान खुद को परेशान बता रहे हैं। वो किसान MSP गारंटी की मांग कर रहे हैं। किसान संगठनों का कहना है कि सरकार अगर गांरटी कानून बना देगी, तो इसे खुले बाजार में फसलों की MSP से नीचे खरीद नहीं होगी और किसानों को फसलों के निश्चित दाम मिल सकेंगे। जबकि, सरकार 22 फसलों की MSP तय करती है। यही नहीं केंद्र सरकार 5 फसलों की MSP पर खरीद की गारंटी देने को भी तैयार है। अगर आंदोलनकारी किसान ऐसा होने देते हैं तो कुल 7 फसलों पर बेहतर MSP का लाभ किसानों को मिलेगा, क्योंकि देश के अधिकांश राज्यों में गेहूं और चावल की खरीद MSP पर होती है, वहीं खेती में इसके फायदे की बात करें तो कहा जा सकता है कि दलहनी फसलों, कपास और मक्के की गारंटीड MSP से किसानों को फायदा होगा।




