डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के बयान ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के मामले को फिर से हवा दे दी। दरअसल सीएम योगी ने तो इस मुद्दे पर सख्त रुख दिखा दिया था, कि हर कोई शंकराचार्य नहीं हो सकता, मगर शायद ब्रजेश पाठक डैमेज कंट्रोल का दम दिखाकर कुछ मैसेज देना चाह रहे थे। इसीलिए उन्होंने बटुक ब्राह्मणों को अपने घर बुलाकर सम्मान कर सियासी संदेश देने की कोशिश की, ब्रजेश पाठक ने यहां तक कह दिया “कि चोटी नहीं खींचनी चाहिए थी, ये महापाप है। जिन लोगों ने चोटी को छुआ है, उन्हें पाप लगेगा। कई बरस बाद तक पाप लगेगा। सबकुछ बहीखाते में लिखा जा रहा है”।

शिवपाल यादव ने कसा तंज
ब्रजेश पाठक ने जो कार्ड खेलने की कोशिश की, उन्हें वही उल्टा पड़ गया। सपा नेता शिवपाल यादव ने तंज कसा कि क्या आप सरकार से बाहर हैं? आप भी तो उसी सरकार का हिस्सा हैं? इस्तीफा देकर बाहर निकलें तो मानें। शिवपाल यादव ने कहा कि ब्रजेश पाठक उसी पार्टी का हिस्सा हैं और मंत्रिमंडल में भी हैं। अगर उनको इतना ही बुरा लगा है तो उनको इस्तीफा दे देना चाहिए। पाप तो उनको भी लगेगा, क्योंकि वो मंत्रिमंडल के सदस्य हैं। अपमान तो वहीं से हुआ है।

क्या है शंकराचार्य विवाद
प्रयागराज में माघ मेले में मौनी अमावस्या के दिन स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती अपने शिष्यों के साथ स्नान के लिए जा रहे थे। वो पालकी पर ही सवार होकर संगम तक स्नान के लिए जाना चाहते थे, जिन्हें नियमों के मुताबिक पुलिस ने रोक लिया और पैदल जाने के लिए कहा। जिसके बाद पुलिस अधिकारियों के साथ उनकी बहस हुई। यहीं से विवाद बढ़ा और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने आरोप लगाया कि उन्हें संगम स्नान से रोका गया और बटुक ब्राह्मणों की चोटी खींची गई।

विवाद के बाद सीएम योगी ने अपनाया था सख्त रुख
इस मामले में बीजेपी की तरफ से केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक ने मोर्चा संभाला और डैमेज कंट्रोल की कोशिश की। मगर सीएम योगी आदित्यनाथ ने इस मुद्दे पर सख्त रुख अपनाया। 13 फरवरी को इस मामले पर सीएम योगी ने कहा था कि हर व्यक्ति शंकराचार्य नहीं लिख सकता। विद्वत परिषद के प्रमाण से ही व्यक्ति शंकराचार्य होता है।



