बिहार: सीमित संसाधनों के बावजूद अगर इरादे मजबूत हों, तो सफलता जरूर मिलती है। इसका ताजा उदाहरण बने हैं पीरो प्रखंड के कटरियां गांव निवासी शिवभक्ति कुमार, जिन्होंने बिहार विद्यालय परीक्षा समिति द्वारा आयोजित मैट्रिक परीक्षा 2026 में 483 अंक हासिल कर टॉप-10 में 8वीं रैंक प्राप्त की है।
साधारण परिवार से निकला असाधारण प्रतिभा का सितारा
शिवभक्ति कुमार एक बेहद साधारण परिवार से आते हैं। उनके पिता मिंटू कुमार गुप्ता गांव में कपड़े की छोटी सी दुकान चलाते हैं, जबकि उनकी मां पूनम देवी गृहिणी हैं। आर्थिक सीमाओं के बावजूद शिवभक्ति ने कभी अपने सपनों को छोटा नहीं होने दिया और गांव में रहकर ही अपनी पढ़ाई पूरी की।
कड़ी मेहनत और अनुशासन बना सफलता की कुंजी
शिवभक्ति ने अपनी सफलता का राज बताते हुए कहा कि उन्होंने रोजाना 8 से 10 घंटे तक नियमित स्वाध्ययन किया। उनकी मेहनत, लगन और दृढ़ निश्चय ने उन्हें यह मुकाम दिलाया।उन्होंने अपनी इस उपलब्धि का श्रेय अपने माता-पिता, शिक्षकों और उत्क्रमित माध्यमिक विद्यालय कटरियां के शिक्षक अविनाश कुमार के मार्गदर्शन को दिया
आईएएस बनने का सपना
शिवभक्ति का सपना आगे चलकर आईएएस अधिकारी बनना है। उनका मानना है कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए, तो कोई भी मंजिल दूर नहीं होती। यह कहानी उन सभी छात्रों के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने का हौसला रखते हैं।



