China spying on US military bases: अमेरिका-इजराइल और ईरान में छिड़ी संग्राम के बीच एक सनसनीखेज खबर सामने आई है। चीन सैटेलाइट्स के जरिए अमेरिका के सैन्य अड्डों की जासूसी कर रहा है। सोशल मीडिया पर चीनी मिलिट्री सैटेलाइट की तस्वीरें छाई हुई हैं। इन तस्वीरों में अमेरिका के सैन्य अड्डों की पूरी जानकारी है। हालांकि चीन ने इन सैटेलाइट तस्वीरों पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। मगर ये तस्वीरें इतनी क्लीयर हैं कि अमेरिका के सैन्य अड्डों पर खड़े विमान और मिलाइलें साफ-साफ देखी जा सकती है।

लोकेशन ट्रैकिंग में सब कुछ एकदम क्लीयर दिख रहा
आशंका है कि चीन इन खुफिया जानकारियों को ईरान को दे रहा है। हर सैटेलाइट तस्वीरें पूरी डीटेल भरी हुई है। इन तस्वीरों में इतनी जानकारी है, जियोलोकेशन के साथ इसका सबकुछ क्लीयर है, कि कोई गाइडेड मिसाइल एक झटके में अमेरिका के सैन्य अड्डों को तबाह कर सकती है। इन सैटेलाइट तस्वीरों से अंदाजा लगाया जा सकता है कि चीन की जासूसी करने की क्षमता कितनी ज्यादा है, जो कि भारत के लिए भी चिंता की बात है।
अमेरिका के सैन्य अड्डों पर चीन की पैनी नजर
Russia News के मुताबिक चीन 300 से अधिक जिलिन-1 उपग्रहों के जरिए ईरान पर अमेरिकी हमलों पर नज़र रख रहा है। 300 से अधिक जिलिन-1 उपग्रह अमेरिकी ऑपरेशन के हर पल को रिकॉर्ड कर रहे हैं, जिसमें गोला-बारूद लोड करने से लेकर मिसाइलों के प्रक्षेप पथ तक सब कुछ शामिल है। बीजिंग अमेरिकी सैन्य सिद्धांत को एक डिजिटल डेटाबेस में बदल रहा है, जिसमें ईंधन भरने का समय,उड़ान पथ और एंटी-डिफेंसिव सिस्टम की प्रतिक्रिया को ट्रैक किया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि ये डेटा चीन को अनुसंधान एवं विकास में दशकों तक चलने वाला फायदा देता है, अमेरिका लड़ता है, जबकि चीन अध्ययन करता है।



