Harish Rana’s passive euthanasia process at AIIM: गाजियाबाद के हरीश राणा को इच्छा मृत्यु के लिए दिल्ली एम्स शिफ्ट कर दिया गया है। अब आज कमेटी की फाइनल मीटिंग होगी, जिसमें तय किया जाएगा कि आगे का प्रोसेस कैसे करना है। इससे पहले हरीश राणा के लाइफ सपोर्ट सिस्टम की सफाई की गई। एम्स के एक्सपर्ट निष्क्रिय इच्छामृ्त्यु के लिए ऐसी प्रक्रिया अपनाएंगे, जो पेनलेस हो यानि कि जिसमें बिल्कुल भी दर्द न हो। डॉ सीमा मिश्रा की अगुवाई में पूरी प्रक्रिया की जा रही है। हालांकि एम्स ने अपने अधिकारिक बयान में इतना ही कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार आगे की पूरी प्रक्रिया की जा रही है।

हरीश के साथ आगे की प्रक्रिया क्या होगी?
एक्सपर्ट के मुताबिक ऐसी प्रक्रिया में सबसे पहले ये देखा जाता है कि मरीज किस प्रकार के सपोर्ट सिस्टम की वजह से जिंदा है। गाइड लाइन्स के मुताबिक धीरे-धीरे उसी सपोर्ट सिस्टम को कम किया जाता है या फिर हटाया जाता है। इसमें वेटिंलेटर भी हो सकता है और न्यूट्रिशियन भी। हरीश राणा के केस में वेंटिलेटर नहीं लगा है, मगर न्यूट्रिशियन सपोर्ट सिस्टम लगा है। बताया जा रहा है कि हरीश के गले में पहले एक ट्यूब डाली गई थी और पेट में भी एक न्यूट्रीशियन ट्यूब डाली गई थी। यानि बाहर से लिक्विड फूड दिया जा रहा है। हरीश राणा को यूरिन के लिए कैथेटर भी लगाया गया था। एक्सपर्ट के मुताबिक इसे भी तुरंत नहीं हटाया जा सकता है, क्योंकि इससे पेन होता है। यानि कि पूरी प्रक्रिया काफी जटिल है, क्योंकि हरीश राणा के लिए ये पूरी प्रक्रिया पेनलेस करनी होगी।

हरीश राणा के साथ क्या हुआ था?
हरीश राणा 13 साल से मेडिकल सपोर्ट सिस्टम पर हैं। जब वो पंजाब यूनिवर्सिटी के छात्र थे, उस दौरान साल 2013 में वो अपने पीजी की चौथी मंजिल से गिर गए थे। हरीश राणा के सिर में गंभीर चोटें आई थी, जिस कारण उन्हें 100% क्वाडीप्लेजिक डिसेबिलिटी हो गई। हरीश के माता-पिता की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने 11 मार्च को हरीश को निष्क्रिय इच्छा मृत्यु की इजाजत दी थी। कोर्ट ने कहा था कि 13 साल में हरीश की हालत में कोई सुधार नहीं आया, कृत्रिम तरीके मरीज को जिंदा रखना तब तक ही उचित है, जबतक इलाज से कुछ लाभ हो रहा हो, उसके ठीक होने की कोई संभावना हो। सुप्रीम कोर्ट ने मरीज को दिल्ली एम्स में भर्ती कराने और जरूरी प्रक्रिया को पूरी करने के निर्देश दिए थे।



