नई दिल्ली: ईरान और अमेरिका-इज़रायल (Iran US-Israel war) के बीच जारी युद्ध सोमवार को 31वें दिन में प्रवेश कर गया। इस दौरान संघर्ष का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है (US Iran conflict) और अब खाड़ी देशों तक इसकी आंच पहुंच चुकी है। 31वें दिन हालात और गंभीर हो गए हैं, जहां एक भारतीय नागरिक की मौत के साथ वैश्विक तेल संकट भी गहराता जा रहा है।
कुवैत में भारतीय नागरिक की मौत
कुवैत स्थित भारतीय दूतावास ने पुष्टि की है कि 29 मार्च को एक डीसैलिनेशन प्लांट पर हुए हमले में एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई (Kuwait attack Indian death)। दूतावास ने शोक व्यक्त करते हुए कहा है कि वह कुवैती प्रशासन के संपर्क में है और हर संभव सहायता प्रदान की जा रही है।
ईरान के तेल पर कब्जा चाहता हूं: ट्रंप
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ब्रिटिश अखबार को दिए इंटरव्यू में कहा कि वह ईरान के तेल पर कब्जा करना चाहते हैं (Trump Iran oil statement)। हालांकि, उन्होंने यह भी दावा किया कि अमेरिका ईरान से सीधे और परोक्ष दोनों तरीकों से बातचीत कर रहा है। जिसे ईरान ने खारिज कर दिया। ट्रंप ने ईरान के प्रमुख तेल टर्मिनल खार्ग द्वीप पर कब्जा करने की संभावना भी जताई। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह कदम बेहद जोखिम भरा हो सकता है क्योंकि यह क्षेत्र ईरान की मिसाइल रेंज में आता है।

इज़रायल-लेबनान मोर्चे पर बढ़ा तनाव
इज़रायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने दक्षिणी लेबनान में सैन्य कार्रवाई तेज करने के आदेश दिए हैं। उन्होंने हिज़्बुल्लाह के रॉकेट हमलों के जवाब में ‘बफर ज़ोन’ बढ़ाने की बात कही गई है (Lebanon Israel conflict)। लेबनान के अधिकारियों के अनुसार, अब तक 1,200 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं और 10 लाख से ज्यादा लोग विस्थापित हुए हैं। पांच इज़रायली सैनिकों की भी मौत हुई है।
अब तक कुल नुकसान (Casualties)
- ईरान में 1,900 से मौतें
- इज़रायल में 19 मौतें
- इराक में 80 सुरक्षाकर्मी की मौत
- खाड़ी देशों में 20 मौतें
- वेस्ट बैंक में 4 मौतें
- अमेरिका में 13 सैनिक मारे गए
अब जमीनी जंग की भी गहराई आशंका
ईरान के संसद अध्यक्ष Mohammad Bagher Ghalibaf ने कहा कि उनकी सेना अमेरिकी जमीनी सैनिकों का इंतजार कर रही है, ताकि उन्हें सबक सिखाया जा सके। ईरान ने यह भी चेतावनी दी है कि वह फारस की खाड़ी में बारूदी सुरंगें बिछा सकता है। खाड़ी देशों में जमीनी हमले भी हो सकते हैं।

युद्ध से तेल संकट गहराया
युद्ध का असर वैश्विक बाजार (global oil crisis) पर साफ दिख रहा है। Strait of Hormuz पर तनाव के कारण दुनिया की तेल सप्लाई पर खतरा मंडरा रहा है, क्योंकि यहां से करीब 20% तेल ट्रांसपोर्ट होता है (Strait of Hormuz crisis)।
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बातचीत की कोशिशें जारी हैं, मगर ये बातचीत किसी नतीजें पर पहुंचती नजर नहीं आ रही हैं (Middle East war 2026)। बातचीत के लिए अमेरिका ने 15 सूत्रीय प्रस्ताव दिया है, जबकि ईरान ने 5 शर्तें रखी हैं।



