पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र में (West Asia crisis) बिगड़ती सुरक्षा स्थिति के बीच भारत ने अपने नागरिकों की सुरक्षित वापसी तेज कर दी है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, 28 फरवरी से अब तक करीब 5,98,000 भारतीय यात्री स्वदेश लौट चुके हैं (Indians return from Middle East)। विदेश मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव (खाड़ी) असीम आर महाजन ने अंतर-मंत्रालयी ब्रीफिंग में बताया कि क्षेत्र में हालात चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं, लेकिन उड़ानों की संख्या धीरे-धीरे बढ़ रही है (Nearly 598000 Indians return from West Asia crisis)।
उड़ानों की स्थिति में सुधार
संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से भारत के लिए करीब 90 उड़ानें संचालित होने की उम्मीद है (UAE India flights)। सऊदी अरब और ओमान से भी नियमित उड़ानें जारी हैं। कतर का हवाई क्षेत्र आंशिक रूप से खुला है। कतर एयरवेज की 8–10 उड़ानें संभव हैं। हालांकि कुवैत और बहरीन का हवाई क्षेत्र अब भी बंद है (Kuwait Bahrain airspace closed)। इन प्रतिबंधों के चलते सरकार अपने नागरिकों को दूसरे वैकल्पिक मार्गों के जरिए निकाल रही है (Indian embassy assistance abroad)।

सरकार इन मार्गों से नागरिकों को निकाल रही
- ईरान → आर्मेनिया/अज़रबैजान → भारत
- इज़राइल → मिस्र/जॉर्डन → भारत
- इराक → जॉर्डन/सऊदी अरब → भारत
दुबई में विमान मलबा गिरने की घटना
(MEA briefing on West Asia situation) दक्षिणी दुबई में घरों पर विमान का मलबा गिरने से 3 भारतीय नागरिक घायल हो गए। इसके अलावा 1 बांग्लादेशी और 1 श्रीलंकाई नागरिक भी घायल हुए हैं। घायलों का स्थानीय अस्पतालों में इलाज जारी है, जिनमें से एक भारतीय को छुट्टी भी मिल चुकी है। भारतीय दूतावास लगातार संपर्क में है और हर संभव मदद दे रहा है।

सरकार की निगरानी और सहायता
- विदेश मंत्रालय ने विशेष नियंत्रण कक्ष स्थापित किया है
- खाड़ी देशों में भारतीय दूतावास 24×7 सक्रिय
- स्थानीय सरकारों के साथ लगातार समन्वय
2 नागरिकों की बॉडी भी लाई गई
सरकार ने दो भारतीय नागरिकों की मृत्यु और उनके शव को भारत लाने की पुष्टि की है। एक की मौत 11 मार्च को इराक तट के पास दुर्घटना में हुई थी, जबकि दूसरी मौत 29 मार्च को कुवैत में हुई थी। उनके परिवारों से संपर्क बनाए रखते हुए सरकार ने गहरी संवेदना व्यक्त की है। ये स्थिति ऐसे समय में बनी है जब अमेरिका–इज़राइल और ईरान के बीच संघर्ष (Iran Israel conflict impact) दूसरे महीने में प्रवेश कर चुका है। पूरे पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा हुआ है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति भी प्रभावित हो रही है।



