केदारनाथ धाम को अपना 325वां रावल मिलने जा रहा है। 15 फरवरी यानि महाशिवरात्रि के मौके पर इसकी विधिवत घोषणा की जाएगी। ऊखीमठ में मौजूद ओंकारेश्वर मंदिर से शिवरात्रि के दिन शिवाचार्य शांति लिंग (केदार लिंग) के नाम की घोषणा की जाएगी। 45 वर्षीय शिवाचार्य शांति लिंग भीमाशंकर लिंग के ही शिष्य हैं, जो केदारनाथ धाम के 325वें रावल बनेंगे।

दरअसल केदारनाथ धाम के मौजूदा रावल 70 साल के भीमाशंकर लिंग ने स्वास्थ्य कारणों के चलते ये पद संभालने में असमर्थता जताई है और अपने शिष्य शिवाचार्य शांति लिंग को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया है। जिसकी विधिवत घोषणा महाशिवरात्रि के दिन की जाएगी।

केदारनाथ के रावल को लेकर क्या है परंपरा
परंपरा के अनुसार रावल केदारनाथ धाम के मुख्य पुजारी होते हैं। ये केदारनाथ धाम में कपाट खुलने से लेकर 6 महीने बाद कपाट बंद होने तक केदारनाथ धाम में मौजूद रहते हैं, इन्ही के द्वारा केदारनाथ धाम में हर दिन भोलेनाथ की पूजा सम्पन्न होती है। केदारनाथ का रावल बनने के महत्वपूर्ण नियम भी हैं। रावल अविवाहित ही रहते हैं और कर्नाटक के वीर शैव संप्रदाय से संबंध रखते हैं। ये पंरपरा करीब 400 साल से चली आ रही है। भुकंड लिंग केदारनाथ के पहले रावल थे। भीमाशंकर लिंग 324वें रावल हैं और अब 325वें रावल उनके शिष्य शिवाचार्य शांति लिंग बनेंगें।



