अमेरिका और ईरान की डील के बाद मिडिल ईस्ट में तनाव भले ही कम होता दिख रहा है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही भी धीरे-धीरे सामान्य होने के संकेत मिल रहे हैं, लेकिन भारत अभी कोई जोखिम लेने के मूड में नहीं है। देश की ऊर्जा सुरक्षा, समुद्री व्यापार और हजारों भारतीय नाविकों की सुरक्षा को देखते हुए केंद्र सरकार ने खाड़ी क्षेत्र की गतिविधियों पर कड़ी निगरानी शुरू कर दी है (India Maritime Security)।
खाड़ी संकट पर सरकार की पैनी नजर
बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय (MoPSW) के अनुसार, फारस की खाड़ी में मौजूद भारतीय जहाजों और ऊर्जा कार्गो की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के लिए कई मंत्रालयों के बीच लगातार समन्वय किया जा रहा है। (Shipping Ministry India) सरकार की सबसे बड़ी चिंता यह है कि हॉर्मुज से गुजरने वाला समुद्री मार्ग वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति की जीवनरेखा माना जाता है और यहां किसी भी तरह का व्यवधान सीधे भारत की ऊर्जा जरूरतों को प्रभावित कर सकता है।
LNG लेकर निकला ‘दिशा’,बाकी जहाज खाड़ी में फंसे!
मंत्रालय के निदेशक ओपेश कुमार शर्मा ने बताया कि माल्टा-ध्वज वाला LNG कैरियर ‘दिशा’ (LNG Carrier Disha) 15 जून को हॉर्मुज जलडमरूमध्य पार कर चुका है (Strait of Hormuz Shipping) और गुजरात के दहेज बंदरगाह पहुंचने वाला है। यह जहाज 62,370 मीट्रिक टन एलएनजी लेकर भारत आ रहा है। हालांकि ‘दिशा’ के बाद अब तक कोई अन्य भारतीय ध्वज वाला जहाज खाड़ी क्षेत्र से बाहर नहीं निकला है, जिससे सरकार की सतर्कता और बढ़ गई है। सरकार पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय, शिपिंग कंपनियों और अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ लगातार संपर्क में है। सरकार का मकसद साफ है कि किसी भी आपात स्थिति से पहले तैयारी और भारतीय हितों की सुरक्षा वक्त से पहले कर ली जाए (Indian Vessels Gulf Region)।
कंट्रोल रूम में लगातार बजती घंटी बढ़ा रही चिंता
खाड़ी संकट के दौरान भारतीय नाविकों की सुरक्षा भी सरकार की प्राथमिकता बनी हुई है। महानिदेशालय शिपिंग (DG Shipping) द्वारा स्थापित कंट्रोल रूम लगातार सक्रिय है। अब तक इस कंट्रोल रूम पर 13 हजार से अधिक कॉल और 29 हजार से ज्यादा ईमेल मिल चुके हैं। पिछले 72 घंटों में ही सैकड़ों कॉल और हजार से अधिक ईमेल दर्ज किए गए, जो क्षेत्र में बनी चिंता को दर्शाते हैं।
हजारों नाविकों के लिए चला ऑपरेशन
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अब तक 3,639 से अधिक भारतीय नाविकों की सुरक्षित स्वदेश वापसी कराई जा चुकी है। उधर, समुद्री व्यापार को सुचारू बनाए रखने के लिए सभी प्रमुख भारतीय बंदरगाहों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। हालांकि राहत की बात यह है कि फिलहाल देश के किसी भी बंदरगाह पर परिचालन प्रभावित नहीं हुआ है और कहीं भी जहाजों की भीड़ या लॉजिस्टिक संकट की स्थिति नहीं है (India Port Operations)। विशेषज्ञों का मानना है कि हॉर्मुज में आवाजाही दोबारा शुरू होना सकारात्मक संकेत जरूर है, लेकिन क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। यही वजह है कि भारत ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला, तेल-गैस कार्गो और समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर चौकन्ना बना हुआ है। आने वाले दिनों में खाड़ी क्षेत्र की स्थिति भारत की ऊर्जा रणनीति और समुद्री व्यापार के लिए बेहद अहम साबित हो सकती है (Maritime Surveillance India)।



