राम मंदिर आंदोलन और उसके निर्माण के दौरान कांग्रेस पार्टी पर कई बार मंदिर निर्माण की प्रक्रिया को बाधित करने और विरोध करने के आरोप लगे हैं। विरोधियों और राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, कांग्रेस ने विभिन्न अवसरों पर राम मंदिर का विरोध किया या उसमें देरी करने की कोशिश की। संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA-1) सरकार के दौरान वर्ष 2007 में सेतुसमुद्रम परियोजना के मामले में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की ओर से सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दाखिल किया गया था। इस हलफनामे में कहा गया था कि भगवान राम के ऐतिहासिक अस्तित्व और रामायण में वर्णित चरित्रों के कोई पुख्ता वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं। भाजपा और हिंदू संगठनों ने इसे भगवान राम का अपमान और मंदिर की राह में रोड़ा अटकाने की कोशिश माना था।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टालने की अपील
दिसंबर 2017 में अयोध्या मामले की सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और प्रख्यात वकील कपिल सिब्बल ने सुन्नी वक्फ बोर्ड की ओर से पैरवी करते हुए कोर्ट से अपील की थी कि इस मामले की सुनवाई 2019 के लोकसभा चुनावों तक टाल दी जाए। विरोधियों ने इसे राम मंदिर के फैसले में जानबूझकर देरी करने की राजनीतिक चाल बताया था।
प्राण प्रतिष्ठा समारोह का बहिष्कार
जनवरी 2024 को अयोध्या में हुए रामलला के प्राण प्रतिष्ठा समारोह के लिए कांग्रेस के शीर्ष नेताओं (मल्लिकार्जुन खरगे, सोनिया गांधी और अधीर रंजन चौधरी) को आमंत्रण भेजा गया था। कांग्रेस आलाकमान ने इस निमंत्रण को आधिकारिक तौर पर यह कहते हुए ठुकरा दिया कि यह भाजपा और आरएसएस का एक “राजनीतिक कार्यक्रम” है और अधूरे मंदिर का उद्घाटन चुनावी लाभ के लिए किया जा रहा है।
भूमि पूजन और स्थापना दिवस पर विरोध प्रदर्शन
5 अगस्त 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राम मंदिर का भूमि पूजन किया था। इसके बाद, 5 अगस्त 2022 को कांग्रेस ने देशव्यापी महंगाई के खिलाफ प्रदर्शन के लिए काले कपड़े पहने थे, जिस पर तत्कालीन गृह मंत्री अमित शाह ने आरोप लगाया था कि कांग्रेस ने जानबूझकर राम मंदिर भूमि पूजन की वर्षगांठ के दिन तुष्टीकरण की राजनीति के तहत यह विरोध प्रदर्शन किया था।
हालिया नियुक्तियों पर सवाल
हाल ही में सितंबर 2026 में, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के रूप में सेवानिवृत्त एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति की गई है। कांग्रेस नेता राशिद अल्वी और उदित राज ने इस नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए इसे राजनीतिक रंग देने का प्रयास किया है, जिसे भाजपा ने सेना और मंदिर विरोधी सोच करार दिया है।



