अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी का मामला अब सिर्फ पैसे गायब होने तक सीमित नहीं रह गया है (ram mandir donation theft case)। पुलिस जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे ऐसे तथ्य सामने आ रहे हैं जो इस पूरे मामले को एक सुनियोजित साजिश की तरफ इशारा करते दिखाई दे रहे हैं। सबसे बड़ा खुलासा यह है कि गिरफ्तार किए गए 8 आरोपियों में से 5 आरोपी या तो एक ही इलाके में रहते हैं या फिर आपस में रिश्तेदार हैं। ऐसे में जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या चोरी की पूरी योजना पहले से तैयार की गई थी (ram mandir donation scam)।
एक ही कॉलोनी में रहते थे कई आरोपी
जांच में सामने आया है कि आरोपी लवकुश मिश्रा, अविनाश शुक्ला और अनुकल्प मिश्रा के घर कौशलपुरी कॉलोनी में बेहद करीब स्थित हैं। लवकुश मिश्रा के घर के ठीक पीछे अविनाश शुक्ला का मकान है, जबकि अनुकल्प मिश्रा का घर लगभग 200 मीटर की दूरी पर है। पुलिस का मानना है कि इतनी नजदीकी होने के कारण इनके बीच लगातार संपर्क होना स्वाभाविक था। दूसरी ओर, आरोपी मनीष यादव और टिन्नू यादव के घर भी एक-दूसरे से सटे हुए बताए जा रहे हैं। इस तरह कुल 8 में से 5 आरोपियों का एक-दूसरे से नजदीकी संबंध पुलिस के शक को और मजबूत कर रहा है (ram mandir money trail)।
अब साजिश के एंगल पर जांच
पुलिस अब यह जानने की कोशिश कर रही है कि क्या आरोपियों के बीच पहले से कोई समूह बना हुआ था (ayodhya ram mandir theft case)। जांच एजेंसियां मोबाइल कॉल डिटेल, लोकेशन, चैट हिस्ट्री और आपसी संपर्कों का विश्लेषण कर रही हैं। अधिकारियों का मानना है कि यदि सभी आरोपी पहले से संपर्क में थे, तो यह मामला अचानक हुई चोरी का नहीं बल्कि पहले से बनाई गई योजना का हो सकता है।
घरों पर छापेमारी से जुटाए जा रहे सबूत
रविवार को पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के घरों पर एक साथ छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान स्थानीय मजिस्ट्रेट भी मौजूद रहे। पुलिस ने परिवार के सदस्यों से पूछताछ की और पड़ोसियों से भी जानकारी जुटाई। जांच का मकसद यह पता लगाना है कि कहीं चोरी से जुड़े दस्तावेज, नकदी या अन्य सबूत तो घरों में छिपाकर नहीं रखे गए।
अब बैंक खातों और मनी ट्रेल पर फोकस
जांच एजेंसियां अब आरोपियों के बैंक खातों, लेनदेन और आय के स्रोतों की भी गहराई से जांच कर रही हैं। यह पता लगाया जा रहा है कि आरोपियों की वास्तविक आमदनी कितनी थी और हाल के दिनों में उनके खातों में किसी संदिग्ध रकम का लेनदेन हुआ या नहीं। पुलिस पूरे मनी ट्रेल को जोड़कर यह समझने की कोशिश कर रही है कि कथित चोरी की रकम आखिर कहां गई।
करीब 80 लाख रुपये की बरामदगी
जांच के दौरान अब तक करीब 79 लाख 85 हजार रुपये बरामद किए जा चुके हैं। सभी आरोपियों को अदालत ने न्यायिक हिरासत में भेजा था और अब पुलिस आगे की पूछताछ के लिए उनकी कस्टडी बढ़ाने की तैयारी में है। अधिकारियों का मानना है कि पूछताछ से इस पूरे नेटवर्क के बारे में और अहम जानकारियां मिल सकती हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है (ram mandir sit investigation)। यह टीम पूरे मामले की हर परत की जांच कर रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी स्पष्ट कर चुके हैं कि SIT की जांच पूरी होने के बाद पूरे मामले की सच्चाई सामने लाई जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
मामले में सबसे बड़ा सवाल
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या एक ही मोहल्ले में रहने वाले और आपस में जुड़े आरोपियों ने मिलकर पूरी योजना तैयार की थी, या फिर यह केवल संयोग है? पुलिस की जांच अब इसी एंगल पर केंद्रित है और आने वाले दिनों में इस मामले में कई और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।



