Wednesday, September 16, 2026
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“फिल्मों में फ्लॉप हिरोइन कर रही सस्ती…”, जौहर पर बयान देने वाली स्वरा भास्कर को सोशल मीडिया पर पड़ रही गालियां!

दिल्ली के एक कार्यक्रम में अभिनेत्री स्वरा भास्कर ने 2018 में आई संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘पद्मावत’ के जौहर सीन पर सवाल उठाए। जिसके बाद सोशल मीडिया पर एक नया विवाद खड़ा हो गया। स्वरा ने इस दृश्य की तुलना ‘रेप सर्वाइवर’ (बलात्कार पीड़ितों) की मानसिक स्थिति से करते हुए कहा कि यह सीन समाज में गलत संदेश देता है। स्वरा ने कहा कि, “मैं फिल्म देख रही थी और मैंने इसमें 800 महिलाओं को जौहर करते देखा। भगवान न करे, अगर मैं कोई रेप सर्वाइवर होती, तो यह फिल्म मुझे क्या संदेश दे रही है? मुझे ऐसा महसूस होता कि मैं कायर हूँ क्योंकि मैंने अपनी इज्जत बचाने के लिए आत्महत्या नहीं की।” उन्होंने सवाल उठाया कि क्या आज के समाज में हम यह बताना चाहते हैं कि एक महिला की शारीरिक पवित्रता उसकी जान से ज्यादा कीमती है? क्या बलात्कार किसी महिला के जीवन का अंत है? उन्होंने दिल्ली में हाल ही में हुए एक अपराध और ‘निर्भया’ का उदाहरण देते हुए कहा कि महिलाओं को जीने का पूरा अधिकार है और उनके जीने की इच्छा को कम नहीं आंका जाना चाहिए।

शुरु हुआ विवाद तो स्वरा ने दी सफाई

बयान पर भारी आलोचना और ट्रोल होने के बाद स्वरा भास्कर ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर अपनी सफाई दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके बयान का गलत अनुवाद और भ्रामक प्रचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा, “मैंने यह बिल्कुल नहीं कहा कि रानी पद्मावती या जौहर करने वाली अन्य महिलाएँ कायर थीं।” उन्होंने साफ किया कि उनकी टिप्पणी आज के ‘रेप कल्चर’ और काल्पनिक फिल्म देखने के बाद एक काल्पनिक स्थिति में उनकी व्यक्तिगत भावना पर आधारित थी।

स्वरा भास्कर को शहजाद पूनावाला ने क्या कहा?

स्वरा भास्कर के जौहर और रानी पद्मावती को लेकर दिए गए बयान पर बीजेपी के पूर्व प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने तीखा पलटवार किया। पूनावाला ने एक वीडियो जारी कर स्वरा भास्कर पर इतिहास को संदर्भ से काटकर देखने और चित्तौड़ की राजपूत महिलाओं के बलिदान पर सवाल उठाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि, “हमें ऐसा कहने का मौका मत दो कि ‘बस करो’, क्योंकि कभी-कभी आप खुद को अपने सबसे बड़े नेता राहुल गांधी से भी ज्यादा नासमझ और अक्षम साबित कर देती हैं। सिर्फ आप या राहुल गांधी जैसे बेवकूफ ही 2026 के एक आधुनिक देश की तुलना 1303 के घिरे हुए चित्तौड़ से कर सकते हैं।”

सोशल मीडिया पर स्वरा का विरोध

सोशल मीडिया पर स्वरा भास्कर की गिरफ्तारी की मांग भी उठने लगी है। कुछ लोग कह रहे हैं कि, जौहर पर स्वरा का विरोध आज का नहीं है, बल्कि वह पहले से इसपर बयान देती रही हैं। लोगों की दलील है कि, ‘जौहर’ को केवल आज की सोच और व्यक्तिगत पसंद के चश्मे से देखकर उस दौर की युद्ध परिस्थितियों, आक्रमणों और महिलाओं के सामने मौजूद भयावह परिस्थितियों को नजरअंदाज करना इतिहास के साथ न्याय नहीं है। अगर कोई महिला अपनी अस्मिता और सम्मान की रक्षा के लिए जौहर को चुनती थी, तो उस निर्णय को केवल आज के नजरिए से “गलत” घोषित करना भी उतना ही एकतरफा है। इसके अलावा लोग यह भी कह रहे हैं कि, स्वरा ना सिर्फ अपनी आज की सोच थोपना चाहती है, बल्कि सस्ती लोकप्रियता पाने के लिए ऐसे विवादास्पद बयान दे रही है।

क्या था जौहर का इतिहास और सच?

जौहर मध्यकालीन भारत में राजपूत समाज की महिलाओं द्वारा किया जाने वाला एक सामूहिक आत्मदाह था, जिसे वह युद्ध में हार और शत्रुओं द्वारा पकड़े जाने या अपमानित होने से बचने के लिए अपनाती थीं। जब किसी किले की रक्षा करते हुए राजा की हार निश्चित हो जाती थी, तब दुश्मन सेना के अत्याचार और अपमान से बचने के लिए महिलाएँ स्वेच्छा से अपने प्राण त्याग देती थीं। किले के भीतर एक बड़ी चिता जलाई जाती थी, जिसमें रानियाँ और अन्य महिलाएँ वैदिक मंत्रों और पूजा-पाठ के साथ अग्नि में प्रवेश करती थीं। महिलाओं द्वारा जौहर करने के बाद, पुरुष योद्धा केसरिया बाना पहनकर अंतिम निर्णायक युद्ध के लिए मैदान में उतरते थे और वीरगति प्राप्त करते थे। इस संपूर्ण अनुष्ठान को ‘शाका’ कहा जाता था। चित्तौड़गढ़ के किलों में रानी पद्मिनी और रानी कर्णावती के नेतृत्व में हुए जौहर इतिहास में सबसे प्रसिद्ध हैं।

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