Monday, May 25, 2026
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Impact of war in the Middle East: तेल के लिए त्रस्त होने वाली है दुनिया! जानिए संकट की घड़ी में भारत कैसे बचेगा?

इजराइल और अमेरिका (Israel and America) आक्रामक रवैये के बाद भी ईरान हथियार डालने को तैयार नहीं है, बल्कि हमलों ने ईरान को पहले से कहीं ज्यादा घातक बना दिया है। ईरान ने मिडिल ईस्ट (middle east) में अमेरिका के मित्र देशों को निशाना बनाना शुरु कर दिया है। ईरान का मकसद इन देशों को चोट पहुंचाकर तेल के क्षेत्र को प्रभावित करना है। ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई (Ali Khamenei) की मौत के बाद ईरानी सेना ने दुबई में दुनिया के सबसे बड़े ऑयल टैंक अरामको (Aramco oil tank) पर अटैक किया। ईरान की ओर से किए गए इस ड्रोन अटैक के बाद अरामको को अपनी रास तनुरा ऑयल रिफाइनरी (Ras Tanura Oil Refinery) को बंद करना पड़ा। बड़ी बात ये है कि इस ऑयल रिफाइनरी के बंद होने की खबर भर से ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें साढ़े 9 फीसदी के करीब बढ़ गईं।

फाइल फोटो

सबसे अहम समुद्री मार्ग बंद होने से बढ़ी टेंशन

इस अटैक ने एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्टर (Energy Infrastructure) को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अगर ईरान टारगेट करके ऑयल रिफाइनरीज़ पर हमला करेगा तो क्या होगा? तेल की कीमतों को कंट्रोल कैसे किया जाएगा? क्योंकि, ईरान के आक्रामक रवैये के साथ स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज वाली स्ट्रैटजी भी ऑयल प्राइसेज़ में आग लगा सकती है। दरअसल, युद्ध शुरु होने के चंद घंटों के भीतर ईरान ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (Strait of Hormuz) को बंद करने का ऐलान कर दिया। जिसकी वजह से सैकड़ों जहाज़ वहां फंस गए। बताया जा रहा है कि करीब 150 तेल टैंकर इस रास्ते में फंसे हुए हैं। सबसे अहम समुद्री मार्ग के बंद होने से भारत समेत दुनिया भर के देशों को टेंशन होने लगी है।

फाइल फोटो

कितना महत्वपूर्ण है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज?

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) करीब 33 किलोमीटर चौड़ा एक संकरा समुद्री रास्ता है, जो कि ईरान, ओमान और संयुक्त अरब अमीरात के बीच स्थित है। ये भौगोलिक रूप से छोटा तो है, बावजूद इसके वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में इसका काफी बड़ा योगदान है। समुद्री मार्ग से होने वाले कच्चे तेल के वैश्विक व्यापार का करीब 20 से 25 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। सऊदी अरब, इराक, कुवैत और यूएई जैसे प्रमुख तेल उत्पादक देश अपने तेल निर्यात के लिए इसी मार्ग पर निर्भर हैं। कतर की पूरी एलएनजी (LNG) आपूर्ति भी इसी रास्ते से दुनिया के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचती है। अनुमान के मुताबिक हर दिन लगभग 2 करोड़ बैरल कच्चा और रिफाइंड तेल इस समुद्री मार्ग से गुजरता है। ये दुनिया की कुल तेल खपत का लगभग पांचवां हिस्सा है। यही वजह है कि इस रास्ते में किसी भी तरह की रुकावट का असर व्यापक होता है। इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर दिखाई देता है। यहां से भारत के भी कच्चे तेल का करीब आधा हिस्सा आता है।

फाइल फोटो

भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर, कैसे?

हालांकि भारत के लिए राहत की खबर ये है कि यहां कोई बड़ा संकट जल्द नहीं आएगा। भारत का मजबूत स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतों को स्थिर रखने में मदद करेगा। केपलर इन्वेंटरी डेटा के मुताबिक भारत के पास वर्तमान में करीब 10 करोड़ बैरल कच्चा तेल भंडार मौजूद है। जो कि किसी भी आपात स्थिति में भारत के लिए मददगार साबित होगा। दूसरा कच्चे तेल की आपू्र्ति को सामरिक पेट्रोलियम भंडार(SPR),वाणिज्यिक स्टॉक और रूस से आने वाली वैकल्पिक आपूर्ति के जरिए इसमें बैलेंस बनाया जा सकता है। खाड़ी देशों से तेल आने में कुछ वक्त लगता भी है तो भारत की रिफाइनरियां रुकेंगी नहीं।

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