Iranian women celebrate Khamenei’s death: अमेरिका के हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई है। ईरान की मीडिया ने मौत की पुष्टि की है और 40 दिन का शोक घोषित किया है। खामेनेई की मौत से कई शोक का माहौल है, लोग बेखौफ होकर सड़क पर उतर आए हैं, तो दूसरी ओर खामेनेई की मौत के बाद जश्न की तस्वीरें भी सामने आई हैं।
लोगों का डांस करते हुए वीडियो
ईरान के कई शहरों में खामेनेई की मौत की सुनते ही लोगों ने जश्न मनाना शुरू कर दिया। कुछ ने तेज आवाज में गाने बजाए, तो कुछ ने गाड़ियों के ही हॉर्न को लगातार और तेजी से बजाकर अपनी खुशी का इजहार किया। तेहरान,कराज और इस्फ़हान सहित कई जगहों पर लोग गाड़ियों से उतर-उतरकर खुशी मनाते हुए अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। अब सवाल ये कि अपने नेता के मरने पर लोग जश्न क्यों मना रहे हैं? खासकर महिलाएं इतनी खुश क्यों हैं?
दरअसल खामेनेई ने महिलाओं को लेकर ऐसे कड़े सामाजिक प्रतिबंध लगाए थे, जिन्हें महिला अधिकारों के हनन के तौर पर देखा गया।
हिजाब पहनना किया था अनिवार्य: खामेनेई के शासन में ईरान की महिलाओं के लिए सार्वजनिक रूप से हिजाब पहनना अनिवार्य किया गया था। मोरालिटी पुलिस पर महिलाओ को प्रताड़ित करने का आरोप लगा था, जिसका शिकार महसा अमिनी भी बनी थी। कई महिलाओं ने इसके विरोध में बाल तक काट दिए थे।
महिलाओं को लेकर रूढ़िवादिता: खामेनेई ने महिलाओं पर ऐसी-ऐसी सोच लादी कि उन्हें महिलाओं की आजादी के सबसे बड़े बाधक के रूप में देखा जाने लगा था। उन्होंने महिलाओं को फूल बताकर घर तक ही सीमित रखने की बात की थी।
मौलिक अधिकारों का दमन: महिलाओं को कहीं आना-जाना हो, शादी हो या तलाक। इन सभी चीजों को लेकर कड़े प्रतिबंधों का सामना करना पड़ता था। महिलाओं से उनकी स्वतंत्रता एक तरह से छीन ली गई थी।
युवाओं में भी भारी नाराजगी: युवा किसी भी देश का हो, युवा हमेशा आजादी का ही पक्षधर रहता है। मगर ईरान में ऐसा नहीं हो रहा था। ईरान की भी युवापीढ़ी आधुनिकता और स्वतंत्रता से जीता चाहती है, मगर खामेनेई के शासन में ऐसा हो नहीं पा रहा था। युवा आरोप लगाते थे कि उनकी स्वतंत्रता और मॉर्डन सोच को कुचला जा रहा है।



