केंद्र सरकार में अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरन रिजिजू (Kiren Rijiju statement) ने देश में सांप्रदायिक सौहार्द और कानून-व्यवस्था को लेकर बड़ा बयान दिया है। राज्य अल्पसंख्यक आयोग सम्मेलन (minority commission conference) को संबोधित करते हुए रिजिजू ने दावा किया कि वर्ष 2014 के बाद देशभर में सांप्रदायिक झड़पों की घटनाओं में क्रमिक गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने की संवैधानिक जिम्मेदारी राज्य सरकारों की होती है। रिजिजू ने कहा,
“लोक व्यवस्था और कानून-व्यवस्था पूरी तरह राज्यों के अधिकार क्षेत्र का विषय है। राष्ट्रपति शासन की स्थिति अलग हो सकती है, लेकिन सामान्य परिस्थितियों में इसकी जवाबदेही राज्य सरकारों पर ही होती है।”
अपने संबोधन में उन्होंने 1984 के दंगे, गुजरात हिंसा और अन्य बड़े सांप्रदायिक संघर्षों (communal clashes India) का उल्लेख करते हुए कहा कि देश के इतिहास में ऐसे कई गंभीर घटनाक्रम दर्ज हैं, जिनका आधिकारिक रिकॉर्ड मौजूद है। उन्होंने कहा कि छोटे स्तर की घटनाएं अक्सर राष्ट्रीय विमर्श का हिस्सा नहीं बन पातीं, लेकिन उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 2014 के बाद सांप्रदायिक टकरावों में कमी देखने को मिली है।
सोशल मीडिया पर साधा निशाना
केंद्रीय मंत्री ने सोशल मीडिया की भूमिका को लेकर भी गंभीर चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स ने सूचना के प्रसार को बेहद तेज कर दिया है, लेकिन कई बार यही गति सामाजिक तनाव को बढ़ाने का माध्यम भी बन जाती है (social media and communal harmony) । रिजिजू ने कहा,
“पहले किसी राज्य की घटना दूसरे हिस्सों तक सीमित रूप से पहुंचती थी, लेकिन आज असम या केरल की कोई भी घटना कुछ ही मिनटों में पूरे देश में फैल जाती है। कई तत्व ऐसे मामलों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करते हैं, जिससे सांप्रदायिक सौहार्द प्रभावित होता है। राजनीतिक लाभ के लिए कुछ नेता भड़काऊ बयानबाजी का सहारा लेते हैं, जिससे समाज में विभाजन की स्थिति पैदा होती है।”
वक्फ संपत्तियों को लेकर भी जताई चिंता
सम्मेलन के दौरान रिजिजू ने वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन और रिकॉर्ड सत्यापन के मुद्दे को भी गंभीर बताया (Waqf property issue) । उन्होंने कहा कि देशभर में बड़ी संख्या में संपत्तियां अब तक विधिवत पंजीकृत नहीं हैं, जो भविष्य में कानूनी विवादों और प्रशासनिक चुनौतियों का कारण बन सकती हैं। उन्होंने अधिकारियों और राज्य प्रतिनिधियों से अपील की कि लंबित पंजीकरण प्रक्रियाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए, ताकि भविष्य में स्वामित्व संबंधी विवादों से बचा जा सके। राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग द्वारा आयोजित इस सम्मेलन में विभिन्न राज्यों के अल्पसंख्यक आयोगों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में अल्पसंख्यक कल्याण, अधिकार, सामाजिक समावेशन और नीति समन्वय जैसे मुद्दों पर व्यापक चर्चा की गई।


