NEET UG 2026: NEET की परीक्षा की नई तारीख घोषित हो गई है। 21 जून को री-एग्जाम होगा, साथ ही व्यवस्था ये भी बनाई गई है कि अगले साल से NEET का पेपर कंप्यूटराइज्ड होगा।। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने घोषणा की है कि 2026 के पेपर लीक मामले के बाद, अगले साल (2027) से NEET परीक्षा पारंपरिक पेन-एंड-पेपर (OMR) के बजाय कंप्यूटर आधारित (CBT – Computer Based Test) होगी। ये बदलाव इसलिए किया गया है, ताकि पेपर लीक जैसी गड़बड़ियों को रोका जा सके। मगर सवाल ये भी है, अबतक जो हो चुका, उसका क्या? ना जाने कितने सालों से कितने ही मेधावी छात्र-छात्राओं के भविष्य से खिलवाड़ हो चुका है। जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, पेपर लीक की ऐसी ‘सीक्रेट साजिश’ से पर्दा उठ रहा है, जिसके तार इतने गहरे है कि शायद इसका दूसरा छोर ना जाने कितने मीलों-कोसों दूर मिले, या फिर मिले ही नहीं।

संगठित ‘एग्जाम माफिया नेटवर्क’ की कहानी
देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG-2026 अब सिर्फ पेपर लीक नहीं, बल्कि एक संगठित ‘एग्जाम माफिया नेटवर्क’ की कहानी बनती जा रही है। CBI की जांच में ऐसे खुलासे हो रहे हैं, जिन्होंने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

ये पांच आरोपी हुए गिरफ्तार
अब तक जांच एजेंसी ने जयपुर से 3, गुरुग्राम से 1 और नासिक से 1 आरोपी को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में शुभम खैरनार (नासिक), मंगीलाल बिवाल (जयपुर), विकास बिवाल (जयपुर), दिनेश बिवाल (जयपुर) और यश यादव (गुरुग्राम) शामिल हैं।

घर से शुरू हुए खेल को बनाया व्यापार
सूत्रों के मुताबिक, इस पूरे खेल की शुरुआत राजस्थान से हुई, जहां दो सगे भाइयों ने कथित तौर पर करीब 30 लाख रुपये देकर परीक्षा का प्रश्नपत्र हासिल किया। लेकिन कहानी सिर्फ यहीं खत्म नहीं हुई। जांच एजेंसियों का दावा है कि पेपर पहले परिवार के बच्चों तक पहुंचा और फिर धीरे-धीरे यह “मोटी और काली कमाई का जरिया” बन गया।
परिवार से शुरू हुआ ‘पेपर नेटवर्क’
जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार आरोपी मंगीलाल बिवाल और दिनेश बिवाल सगे भाई हैं। दिनेश का बेटा विकास NEET की तैयारी कर रहा था और सीकर में रहकर पढ़ाई कर रहा था। आरोप है कि पिता ने बेटे के लिए पेपर खरीदा, लेकिन बाद में उसी पेपर को कई छात्रों तक पहुंचाया गया। CBI सूत्रों के अनुसार, प्रश्नपत्र की सॉफ्ट कॉपी बनाई गई और फिर चुनिंदा छात्रों व अभिभावकों से मोटी रकम लेकर उसे शेयर किया गया। यही वजह है कि अब जांच सिर्फ आरोपियों तक सीमित नहीं है, बल्कि उन छात्रों और परिवारों तक भी पहुंच रही है जिन्होंने कथित तौर पर पैसे देकर पेपर लिया।
पहले भी चयनित हुए परिवार के सदस्य
जांच एजेंसियों को यह भी पता चला है कि आरोपी परिवार के चार सदस्य पहले भी NEET में चयनित हो चुके हैं। अब यह जांच का बड़ा विषय बन गया है कि क्या पिछले वर्षों में भी इसी तरह पेपर लीक या सेटिंग का खेल चलता रहा। मांगीलाल और दिनेश पहले भी नीट का पेपर लीक कर आगे बेच चुके है। पिछले साल NEET 2025 में भी बिवाल परिवार के सभी 5 बच्चों का MBBS में सलेक्शन हुआ था। आरोप है कि इन्हें NEET का पेपर परीक्षा से पहले मिल गया था। नीट पेपर लीक का आरोपी मांगीलाल का बेटा सवाईमाधोपुर मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस कर रहा है। बताया जा रहा है विकास बिवाल भी आगे पेपर बेचने में शामिल हुआ था। हरियाणा का यश यादव भी सीकर में रहकर पढ़ता था। तब मांगीलाल का परिवार उनके नज़दीक आया था। ये महाराष्ट्र के नेटवर्क के जरिए पेपर लाते थे। जांच टीम इसी नेटवर्क की पडताल में जुटी है कि आखिर बिलाल परिवार किसने दम पर ये खेल खेल रहा था। वो बड़े लोग कौन हैं जिनके लिए बिवाल परिवार काम कर रहा था।
700 छात्रों तक कैसे पहुंचा पेपर?
इसी मामले में बड़ा खुलासा देहरादून कनेक्शन को लेकर भी हुआ है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, आरोपी राकेश कुमार मंडवारिया ने कथित तौर पर करीब 700 छात्रों तक पेपर पहुंचाया। पहले पेपर डिजिटल फॉर्म में भेजा गया, फिर उसकी प्रिंट कॉपी बनाकर अलग-अलग राज्यों में सप्लाई की गई। सूत्रों का दावा है कि कुछ छात्रों को परीक्षा से पहले “गेस पेपर” के नाम पर वही सवाल दिए गए थे, जो बाद में असली परीक्षा में आए। इससे कई छात्रों और अभिभावकों को पहले ही शक हो गया था कि बड़ा खेल चल रहा है।
डॉक्टर, कोचिंग और डिजिटल चैनल जांच के घेरे में
जांच में गुरुग्राम के यश यादव नाम के डॉक्टर का नाम भी सामने आया है। एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि आखिर पेपर सबसे पहले कहां से लीक हुआ और इसमें कौन-कौन शामिल था। CBI मोबाइल फोन, चैट, क्लाउड डेटा और डिजिटल ट्रांजैक्शन की फॉरेंसिक जांच कर रही है। कई इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जब्त किए गए हैं, जिनसे और बड़े खुलासे होने की संभावना है। CBI अब इस नेटवर्क के पीछे मौजूद “मास्टरमाइंड” तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। आने वाले दिनों में कई और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
सिस्टम पर सबसे बड़ा सवाल
इस पूरे मामले ने देश की सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल प्रवेश परीक्षा की विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। लाखों छात्र सालभर मेहनत करते हैं, लेकिन अगर पैसे के दम पर पेपर पहले ही बिक जाए तो मेहनत और मेरिट दोनों पर चोट पड़ती है।


