ईरान को अमेरिका के दिन 48 घंटे के अल्टीमेटम के खत्म होने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संसद में आए और उन्होंने मिडिल ईस्ट में जारी जंग को लेकर पहली बार सार्वजनिक बयान दिया (Parliament speech Narendra Modi)। लोकसभा में 25 मिनट की स्पीच में उन्होंने जाहिर कर दिया कि मिडिल ईस्ट में जारी संकट शायद ही इतनी जल्द खत्म हो। उन्होंने कहा कि, हालात चिंताजनक हैं और इसका असर भारत समेत पूरी दुनिया पर पड़ रहा है। पीएम मोदी ने कहा कि
“मैं इस सदन में पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और भारत पर असर पर बात रखने के लिए आया हूं। इस समय वहां हालात चिंताजनक हैं। जय शंकर जी ने सदन को जरूरी जानकारी दी है। 3 हफ्ते से ज्यादा समय से यह संकट को हो गया है। लोगों के जीवन पर विपरीत असर हो रहा है। पूरी दुनिया इसके जल्द समाधान के लिए सभी पक्षों से आग्रह कर रही है”।
पीएम मोदी ने संसद में भाषण के जरिए देश को बताया कि मिडिल ईस्ट (Modi on Middle East war) में रह रहे एक करोड़ से ज्यादा भारतीयों की सुरक्षित घर वापसी उनकी प्राथमिकता है। साथ ही पीएम मोदी ने बताया कि, भारत में बड़ी मात्रा में कच्चा तेल (crude oil supply India), फर्टिलाइजर जैसी जरूरी चीजें होर्मुज स्ट्रेट (Hormuz Strait crisis) के रास्ते आती हैं। युद्ध के बाद से ही यहां से जहाजों का आना जाना बहुत चुनौतीपूर्ण हो गया है (Iran US tension impact India)। बावजूद इसके सरकार का ये प्रयास रहा है कि पेट्रोल-डीजल, गैस की सप्लाई बहुत ज्यादा प्रभावित न हो। उन्होंने तेल भंडारण को लेकर उठ रहे सवालों के जवाब भी दिए।
“बीते दशक में भारत ने संकट के इसी समय के लिए कच्चे तेल के भंडारण को प्राथमिकता दी है। आज हमारे पास 65 लाख मीट्रिक टन की रिजर्व की व्यवस्था पर काम जारी है। सरकार अलग अलग देशों के सप्लायर्स से संपर्क में है। प्रयास है जहां से संभव हो वहां से सप्लाई होती रहे। तेल गैस फर्टिलाइजर से जुड़े जहाज भारत तक सुरक्षित पहुंचे, इसके लिए सहयोगियों से संवाद कर रहे हैं”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को बताया कि युद्ध के कारण ग्लोबल सप्लाई चेन बाधित होती है, तो उसका भी भारत पर ज्यादा असर नहीं होगा। क्योंकि खाद्यान्न के उत्पादन में कोई कमी नहीं आई है। उन्होंने बताया कि, भारत पर इस युद्ध से उत्पन्न दुष्प्रभाव का असर कम हो इसके लिए एक रणनीति से काम किया जा रहा है। भारत सरकार ने एक ग्रुप बनाया है जो हर रोज मिलता है और आयात-निर्यात में आने वाली दिक्कतों पर निरंतर काम करता है। इस दौरान उन्होंने ईरान की हॉर्मुज स्ट्रेट बंद करने की धमकी की भी इशारों-इशारों में आलोचना की
“डिप्लोमेसी में भारत की भूमिका स्पष्ट है। हमने गहरी चिंता व्यक्त की है। मैंने वेस्ट एशिया के प्रमुखों से बात की है। सभी से तनाव कम करने की अपील की है। कॉमर्शियल जहाजों पर हमला और रुकावट अस्वीकार्य है। भारत सभी पक्षों को जल्द से जल्द शांतिपूर्ण समाधान के लिए प्रोत्साहित कर रहा है”
मिडिल ईस्ट में जारी जंग की वजह से गैस के दाम बढ़ाए गए। साथ ही कई जगहों पर ब्लैक में गैस सिलेंडर (LPG black marketing) मिलने से लोगों का गुस्सा फूट रहा है। लिहाज़ा, पीएम मोदी ने सभी राज्य सरकारों से अपील की, कि गैस की कालाबाजारी करने वालों पर नकेस कसें, ऐसे लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें।
“गैस की कालाबाजी बर्दाश्त नहीं”
“मैं इस सदन के ज़रिए सभी राज्य सरकारों से भी अपील करूंगा। ऐसे समय में ब्लैक मार्केट करने वाले और जमाखोर एक्टिव हो जाते हैं। इसके लिए कड़ी मॉनिटरिंग ज़रूरी है। जहां भी ऐसी शिकायतें आएं, तुरंत एक्शन लेना चाहिए। जब हर सरकार और देश का हर नागरिक मिलकर काम करेगा, तो हम हर चुनौती को चुनौती दे सकते हैं”।
पीएम मोदी ने मिडिल ईस्ट में जारी संकट की तुलना कोरोना संकट से करते हुए विपक्ष को भी घेरा। उन्होंने कहा कि, ऐसे समय में कुछ लोग फायदा उठाने की कोशिश करेंगे। लेकिन उन्हें कामयाब नहीं होने देना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बताया कि, भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को 41 देशों से आयात कर पूरा करता है। सरकार संवेदनशील भी है सतर्क भी है और हर सहायता के लिए तत्पर भी है



