Mahakaleshwar Mandir: भारत अपनी प्राचीनता को लेकर दुनियाभर में प्रसिद्ध है। कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक भारत की संस्कृति और आस्था का अनोखा संगम देखने को मिलता है। यहां आस्था और विश्वास की डोर इतनी मजबूत है, कि लोग यहां सात समंदर पार से भी खिंचे चले आते हैं। ऐसा ही चुंबकीय आर्कषण का केंद्र है उज्जैन का महाकालेश्वर मंदिर, जहां रहस्यों और चमत्कारों का अद्भुत संगम है। indianviewer.com अपने इस लेख के जरिए आपको बताएगा महाकाल की नगरी में स्थिति महाकालेश्वर मंदिर से जुड़े रहस्य और चमत्कार।

महाकालेश्वर मंदिर: मध्यप्रदेश के उज्जैन शहर में स्थित महाकालेश्वर मंदिर 12 ज्योतिर्लिंगों में एक है। जहां एकमात्र दक्षिणमुखी स्वयंभू शिवलिंग विराजमान है। हिन्दू धर्म में ऐसी मान्यता है कि महाकाल की मर्जी के बिना महाकालेश्वर मंदिर में बाबा के दर्शन नहीं होते। जब तक भक्त को बाबा का बुलावा ना आए वो महाकाल के दरबार में हाजिरी नहीं लगा सकता। अनादि काल से निर्मित स्वयंभू शिवलिंग वाला भगवान शिव का ये मंदिर कई रहस्यों और किस्सों से जुड़ा है।
महाकालेश्वर मंदिर से जुड़ा आध्यात्मिक रहस्य
महाकाल का स्वरुप हमें समय का महत्व समझाता है। समय ही सबसे शक्तिशाली है और जो समय का महत्व समझ गया उसका काल भी कुछ नहीं बिगाड़ सकता। ऐसी मान्यता है कि महाकाल के दर्शन मात्र से अकाल मृत्यु का योग टल जाता है।
महाकालेश्वर मंदिर से जुड़े रहस्य
दक्षिणमुखी स्वयंभू शिवलिंग: महाकालेश्वर मंदिर संपूर्ण जगत में एकमात्र ऐसा भगवान शिव का मंदिर है जो दक्षिणमुखी है। धार्मिक मान्याओं के अनुसार दक्षिण दिशा को काल यानी मृत्यु की दिशा माना गया है। महाकाल दक्षिण दिशा में विराजमान होकर भक्तों को अकाल मृत्यु से भयमुक्त करते हैं।
भस्म आरती का रहस्य: महाकालेश्वर मंदिर में प्रतिदिन प्रात:काल होने वाली भस्म आरती गहरे रहस्यों में से एक है। जानकारों की माने तो प्राचीन काल में भस्म आरती श्मशान की ताजी राख से की जाती थी, जो जीवन और मृत्यु के चक्र को दर्शाता है। हालांकि वर्तमान काल में भस्म आरती गोबर के उपलों की राख से की जाती है।
तीसरी मंजिल पर स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर साल में एक बार खुलता है: महाकालेश्वर मंदिर की तीसरी मंजिल पर स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर सिर्फ नागपंचमी के दिन खुलता है। इस मंदिर में नागराज तक्षक के ऊपर भगवान शिव पूरे परिवार के साथ विराजमान है। नागचंद्रेश्वर मंदिर विश्व का एकमात्र ऐसा मंदिर है जहां भगवान शिव शेषनाग पर नहीं बल्कि तक्षक नाग की शैया पर विराजमान है।

रात में नहीं रुकता कोई राजा या मंत्री: पौराणिक कथाओं के अनुसार उज्जैन के एकमात्र राजा केवल महाकाल हैं। राजा विक्रमादित्य के शासन के बाद से आज तक यहा किसी ने शासक नहीं किया। ऐसा भी मानना है, कि अगर पद पर आसीन कोई राजा, मंत्री और प्रधानमंत्री उज्जैन में रात बिताता है तो उसका परिणाम ठीक नहीं होता। एक रिपोर्ट के अनुसार देश के चौथे प्रधानमंत्री मोरार जी देसाई के उज्जैन में रात रुकने के बाद दूसरे ही दिन उनकी सरकार गिर गई थी। कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा को भी उज्जैन में रात रुकने के कुछ दिन बाद ही अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था।



