Swami Avimukteshwarananda Case: बाल यौन शोषण केस में फंसे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की मुसीबत बढ़ती ही जा रही हैं। एक तरफ जहां उन पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है, तो वही दूसरी ओर लेखिका भूमिका द्विवेदी ने चौंकाने वाला दावा किया है। भूमिका द्विवेदी ने बताया कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के वाराणसी मठ में आध्यात्म के रंग नहीं, बल्कि आलीशान जिंदगी बसती है।

‘मठ में आध्यात्म नहीं, सिर्फ चकाचौंध’
दरअसल भूमिका द्विवेदी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के मठ में दो महीने रहकर आईं है। वो काशी और प्रयाग पर शोध करके लिखना चाहती थी, इसीलिए उन्होंने 2 महीने मठ में रहकर वहां को करीब से जानने की कोशिश की। एक हिन्दी न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में भूमिका द्विवेदी ने कहा कि मठ में शोध के लिए जाने से पहले वो सोचती थी, कि मठ में सेवाभाव दिखेगा, हरियाली दिखेगी, तुलसी जी दिखेंगी, शिक्षा ग्रहण करते विद्धार्थी दिखेंगे, भक्तिमय माहौल दिखेगा। मगर जब उन्होंने मठ की चाकाचौंध देखी, तो उनका सोचा हुआ सब काफूर हो गया।

गुप्त कमरे और रहस्यमय दुनिया का क्या है सच?
भूमिका द्विवेदी ने बताया कि मठ में एक रहस्यमय दुनिया है, जो बड़ी आलीशान है। मठ में महंगी-शानदार कालीनें हैं, बड़े-बड़े टीवी हैं, स्विमिंग पूल है, जो कि बच्चों के लिए तो बिल्कुल नहीं है। लिफ्ट है। इसके अलावा लेखिका ने मठ में गुप्त कमरों का भी दावा किया है। उनका कहना है कि मठ में ऐसे रहस्यमय और गुप्त कमरे हैं, जहां किसी को भी जाने की इजाजत नहीं है। इसे दीदी लोगों का क्षेत्र कहते हैं, जहां कोई भी नहीं जा सकता। वहां केवल लिफ्ट से ही जाते हैं। ये पूरा साम्राज्य एक सखी के इशारे पर चलता है। वो मुस्कुराकर बताती हैं, कि मैं स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की सखी हूं।
गुप्त दरवाजे के अंदर क्या-क्या गुप्त है?
मठ में गुप्त कमरों के अलावा गुप्त दरवाजा भी है। जिस पर CCTV से पैनी नजर रखी जाती है। सखी के पास इस क्षेत्र का पूरा कंट्रोल है। मठ में एक अलीशान स्विमिंग पूल भी हैं, मगर वहां बटुकों की एंट्री बैन है। उन्होंने बताया कि वहां जो बच्चे हैं वो बेहद गरीब घरों से हैं, उनसे वहां खूब काम कराया जाता है।



