Rajnath Singh on Middle East tensions: मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव पर पहली बार रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने बयान दिया है। राजनाथ सिंह ने कहा कि मध्य एशिया में जो हो रहा है, वो बहुत असामान्य है, ये अनुमान लगाना मुश्किल है कि हमारे पड़ोसी में स्थितियां किस तरह से बदलेंगी। राजनाथ सिंह ने ये सब बातें पश्चिम बंगाल में आयोजित मैरीटाइन कॉन्क्लेव ‘सागर संकल्प’ के दौरान कही।
‘पुराना भरोसा, पुराने ऑर्डर सब बदल रहा’
राजनाथ सिंह ने कहा कि पहले समंदर को केवल व्यापार का जरिया माना जाता था, मगर आज ये रणनीतिक प्रभुत्व का केन्द्र बना रहा है। वैश्विक व्यवस्थाएं, पुरानी रूढ़िया और मान्यताएं टूट रही है, वैश्चिव स्तर पर बदलाव हो रहा है। पुराने विचार, पुराना भरोसा, पुराने ऑर्डर सब कुछ बदलता नजर आ रहा है। इन अनिश्चितताओं को समझने की जरूरत है। ग्लोबल लेवल पर नई परिस्थितियां दिखाई दे रही है। एनर्जी के रास्तों को लेकर नए समीकरण बन रहे हैं।
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज क्या है, जिसको लेकर मचा है हाहाकार
दरअसल एनर्जी का मुद्दा युद्ध से कैसे जुड़ा है, पहले ये समझिए। दरअसल ईरान ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को बंद किया हुआ है। इस सबसे अहम समुद्री मार्ग के बंद होने से दुनिया में हाहाकार मचा रहा है। क्योंकि भौगोलिक रूप से छोटा होने के बावजूद इसका वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में बेहद बड़ा योगदान है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज करीब 33 किलोमीटर चौड़ा एक संकरा समुद्री रास्ता है। ये ईरान, ओमान और संयुक्त अरब अमीरात के बीच स्थित है। समुद्री मार्ग से होने वाले कच्चे तेल के वैश्विक व्यापार का लगभग 20 से 25 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। सऊदी अरब, इराक, कुवैत और यूएई जैसे प्रमुख तेल उत्पादक देश अपने तेल निर्यात के लिए इसी मार्ग पर निर्भर हैं। वहीं, कतर की पूरी एलएनजी (LNG) आपूर्ति भी इसी रास्ते से दुनिया के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचती है। अनुमान है कि हर दिन लगभग 2 करोड़ बैरल कच्चा और रिफाइंड तेल इस समुद्री मार्ग से गुजरता है। ये दुनिया की कुल तेल खपत का लगभग पांचवां हिस्सा है। यही वजह है कि, इस रास्ते में किसी भी तरह की रुकावट का असर सिर्फ रीजनल नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर दिखाई देता है।



