Ghousia Mosque dispute in Sambhal: एक बार फिर यूपी का संभल सुर्खियों में आ गया है। इस बार वजह है 450 वर्गफीट में बनी घोसिया मस्जिद। वो घोसिया मस्जिद जिसका मालिकाना हक प्रशासन के मुताबिक, मोहन सिंह और भूराज सिंह पुत्र सुखी सिंह के नाम पर है। वो घोसिया मस्जिद जिसके आसपास 2700 से ज्यादा लोग रहते हैं। लेकिन पिछले साल स्थानीय प्रशासन ने इस मस्जिद में नमाजियों की संख्या सीमित करने का आदेश दिया था। इसके बाद मुनाजिर नामक शख्स ने 18 जनवरी, 2026 को हाईकोर्ट में याचिका दायर की। 27 फरवरी को पहली सुनवाई हुई, और अब आदेश हाईकोर्ट की साइट पर अपलोड हुआ।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने क्या कहा?
आदेश में जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने कहा कि, “ये राज्य का कर्तव्य है कि वह सुनिश्चित करे कि हर समुदाय निर्धारित पूजा स्थल पर शांतिपूर्वक पूजा कर सके। अगर वो निजी संपत्ति है, तो राज्य से किसी इजाजत की जरूरत नहीं। कोर्ट पहले ही साफ कर चुका है कि राज्य का दखल सिर्फ वहीं जरूरी है, जहां प्रार्थना या धार्मिक काम सार्वजनिक भूमि पर आयोजित किए जाने हों। प्रशासन मस्जिद में नमाजियों की संख्या सीमित नहीं कर सकता। अगर डीएम राजेंद्र पेंसिया और एसपी के के विश्नोई को लगता है कि वो कानून व्यवस्था नहीं संभाल पा रहे, तो उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए। या फिर ट्रांसफर करवा लेना चाहिए। हर परिस्थिति में कानून व्यवस्था बनाए रखना उनका काम है।”
सरकारी वकील ने क्या दलील दी?
सरकारी वकील ने कोर्ट को बताया कि कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने नमाजियों की संख्या सीमित करने का आदेश दिया था। जिसका प्रमाण 2024 में हुई घटनाएं हैं। लेकिन, कोर्ट ने सरकारी वकील की दलील को सिरे से खारिज कर दिया। और सख्त टिप्पणी करने के साथ इस मामले की अगली सुनवाई 16 मार्च को मुकर्रर कर दी। साथ ही कोर्ट ने याचिकाकर्ता को कहा कि, आपने अब तक मस्जिद या नमाज की जगह की कोई तस्वीर कोर्ट में दाखिल नहीं की है। इस पर याचिकाकर्ता ने समय मांगा। जिसके बाद कोर्ट ने उन्हें नमाज की जगह की तस्वीरें और राजस्व रिकॉर्ड दाखिल करने के लिए इजाजत दे दी। अब वो इसे 16 मार्च से पहले पेश करेंगे।
किसकी याचिका पर हाईकोर्ट में हुई सुनवाई?
इस मामले में याचिका लगाने वाले का नाम मुनाजिर खान है, जिसे इलाहाबाद हाईकोर्ट में रिट याचिका दाखिल करते हुए कहा कि उसे गाटा संख्या 291 पर रमजान के दौरान नमाज अदा करने से रोका जा रहा है। याचिकाकर्ता के वकील ने सुनवाई के दौरान कहा कि यहां एक मस्जिद है। हालांकि कोर्ट में याचिकाकर्ता ने मस्जिद या किसी ऐसी जगह की कोई भी तस्वीर पेश नहीं की जिसके अंदर नमाज अदा की जानी हो। अब सवाल ये है कि, क्या याचिकाकर्ता 16 मार्च को नमाज अदा करने की जगह की तस्वीरें पेश कर पाएगा? क्या घोसिया मस्जिद के मालिकाना हक को लेकर चल रहे विवाद पर भी कोर्ट संज्ञान लेगा? क्या कानून-व्यवस्था के मुद्दे को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ऐसा फैसला सुनाएगा जिससे दोनों पक्ष संतुष्ट हों? सबकी नजरें इलाहाबाद हाईकोर्ट पर टिकी होंगी।
कब चर्चा में आया यूपी का संभल?
नवंबर 2024 को संभल की शाही जामा मस्जिद के सर्वे को लेकर हिंसा हुई थी। शाही जामा मस्जिद को लेकर याचिका के बाद, जिला अदालत के आदेश पर 19 नवंबर और फिर 24 नवंबर 2024 को मस्जिद परिसर का सर्वे किया गया। लेकिन, 24 नवंबर को दूसरे सर्वे के दौरान भीड़ और सुरक्षाबलों के बीच झड़प हो गई। जिसमें पथराव और फायरिंग हुई। पुलिस के मुताबिक इस झड़प में 5 लोगों की मौत हो गई और कई लोग घायल हुए। हिंसा की इस दूसरी वारदात के बाद संभल किले में तब्दील में कर दिया गया। शहर में इंटरनेट बंद कर दिया गया, स्कूल बंद कर दिए गए और बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई। इस घटना पर विपक्ष ने सरकार की भूमिका पर सवाल उठाए, जबकि प्रशासन ने दावा किया कि माहौल बिगाड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई की गई। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जिसने निचली अदालत की कार्यवाही पर रोक लगाते हुए मामले को उच्च न्यायालय में स्थानांतरित करने का निर्देश दिया। लेकिन, पुलिस ने संभल हिंसा की जांच के लिए SIT का गठन किया। SIT ने इस हिंसा को सुनियोजित साजिश करार दिया। संभल हिंसा के मास्टरमाइंड के तौर पर नाम सामने आया, शारिक साठा का। आरोप है कि उसी ने भीड़ को उकसाया, हथियार मुहैया कराए और इस घटना को अंजाम दिया। तब से लेकर अबतक शारिक साठा समेत कई अपराधियों के घर कुर्क कर दिए गए। कानून ने अपना शिकंजा कसते हुए हिंसा में शामिल लोगों को गिरफ्त में ले लिया। संभल में सुरक्षा कड़ी करने के लिए जामा मस्जिद के पास, दीपासराय और हिंदूपुरा खेड़ा में नए थाने बनाए गए। तो आतंकी गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए संभल में एटीएस की फील्ड यूनिट भी स्थापित की जा रही है।



