लखनऊ, 5 जून। उत्तर प्रदेश सरकार ने (UP Government) विभिन्न न्यायालयों में सरकार की ओर से पैरवी करने वाले शासकीय अधिवक्ताओं (Government Advocates) को बड़ी राहत देते हुए उनकी रिटेनरशिप और बहस फीस में वृद्धि करने का फैसला लिया है (Lawyer Fee Hike)। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में लिए गए इस निर्णय का प्रदेशभर के अधिवक्ता समुदाय ने जोरदार स्वागत किया है और इसे ऐतिहासिक कदम बताया है।
अधिवक्ताओं ने जताया सीएम योगी के प्रति आभार
महाधिवक्ता कार्यालय (Mahadhivakta office) से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों और अधिवक्ताओं ने मुख्यमंत्री (Yogi Adityanath) के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह फैसला लंबे समय से लंबित मांग को पूरा करने वाला है। उनका मानना है कि इससे न केवल अधिवक्ताओं का मनोबल बढ़ेगा बल्कि न्यायालयों में राज्य सरकार के पक्ष की प्रभावी और गुणवत्तापूर्ण पैरवी भी सुनिश्चित हो सकेगी।
करीब 14 साल के बाद फीस में हुई बढ़ोत्तरी
अधिवक्ताओं ने कहा कि बदलते न्यायिक परिदृश्य में मुकदमों की संख्या लगातार बढ़ रही है और कानूनी विषय पहले की तुलना में अधिक जटिल होते जा रहे हैं। ऐसे समय में शासकीय अधिवक्ताओं की जिम्मेदारियां भी बढ़ी हैं। इसके बावजूद कई श्रेणियों में फीस संरचना वर्षों से अपरिवर्तित थी। जनपद स्तर के अधिवक्ताओं की फीस में लगभग 10 वर्ष बाद जबकि महाधिवक्ता स्तर की फीस में करीब 14 वर्ष बाद संशोधन किया गया है। ये निर्णय प्रदेश सरकार की संवेदनशीलता और दूरदर्शिता को दर्शाता है।
सभी सरकारी वकीलों को मिलेगा लाभ
सरकार के इस निर्णय का लाभ जिला एवं सत्र न्यायालयों से लेकर उच्च न्यायालय (High Court Advocates) और सर्वोच्च न्यायालय तक (Supreme Court Panel Lawyers) राज्य सरकार का पक्ष रखने वाले विभिन्न श्रेणी के अधिवक्ताओं को मिलेगा। इनमें जनपद न्यायालयों में कार्यरत जिला शासकीय अधिवक्ता, अपर जिला शासकीय अधिवक्ता, सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता, उप जिला शासकीय अधिवक्ता, नामित अधिवक्ता, विशेष अधिवक्ता एवं न्याय मित्रों से लेकर उच्च न्यायालय इलाहाबाद, लखनऊ खंडपीठ तथा उच्चतम न्यायालय में राज्य का पक्ष रखने वाले महाधिवक्ता, अपर महाधिवक्ता, मुख्य स्थायी अधिवक्ता, स्थायी अधिवक्ता, शासकीय अधिवक्ता, ब्रीफ होल्डर, एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड तथा विभिन्न श्रेणी के पैनल अधिवक्ताओं तक इस निर्णय का व्यापक लाभ पहुंचेगा।
रिटेनरशिप और प्रति सुनवाई फीस में 50% की वृद्धि
अधिवक्ताओं के अनुसार (Advocate Community) मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने न्यायालयों में राज्य हितों की मजबूत पैरवी की आवश्यकता को समझते हुए समयानुकूल पुनरीक्षण की अवधारणा को स्वीकार किया है। इसी के तहत रिटेनरशिप (Advocate Retainership Fee) और प्रति सुनवाई फीस में 50 प्रतिशत तक की वृद्धि की गई है (Government Counsel Fee Increase)। इससे सरकारी मामलों की तैयारी और पैरवी की गुणवत्ता में सुधार आएगा तथा महत्वपूर्ण मामलों में शासन का पक्ष अधिक मजबूती से रखा जा सकेगा।
“इससे न्यायिक व्यवस्था और मजबूत होगी”
महाधिवक्ता और उनकी टीम ने कहा कि यह निर्णय केवल आर्थिक लाभ तक सीमित नहीं है, बल्कि न्यायिक व्यवस्था (Legal System UP) को अधिक प्रभावी, जवाबदेह और परिणामोन्मुख बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इससे अधिवक्ताओं को बेहतर संसाधन और प्रोत्साहन मिलेगा, जिसका सीधा लाभ राज्य सरकार और आम जनता दोनों को मिलेगा।
“योगी सरकार ने अधिवक्ताओं को सम्मान दिया”
अधिवक्ता समुदाय ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राज्य मंत्रिमंडल (Uttar Pradesh Cabinet Decision) का धन्यवाद करते हुए कहा कि सरकार ने अधिवक्ताओं की भूमिका और योगदान का सम्मान किया है। यह फैसला सुशासन, न्यायिक सुधार और राज्य हितों की रक्षा के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। अधिवक्ताओं ने उम्मीद जताई कि भविष्य में भी समय-समय पर पारिश्रमिक और सुविधाओं की समीक्षा कर न्यायिक व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाया जाएगा।



