नई दिल्ली/जयपुर: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एक बार फिर 2022 के कांग्रेस अध्यक्ष चुनाव से जुड़े विवाद को सार्वजनिक रूप से उठाकर पार्टी के अंदर नई राजनीतिक चर्चा छेड़ दी है। गहलोत का यह बयान ऐसे समय आया है जब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का कार्यकाल अभी जारी है और पार्टी नियमों के मुताबिक अगला अध्यक्षीय चुनाव 2027 में होने की संभावना है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि आखिर चार साल पुराने विवाद को गहलोत ने अभी क्यों याद किया?
अशोक गहलोत ने क्या कहा?
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर बड़ा बयान देते हुए कहा है कि अगर सोनिया गांधी और कांग्रेस नेतृत्व उन्हें पार्टी अध्यक्ष बनाना चाहता, तो वह कभी इनकार नहीं करते। गहलोत ने दावा किया कि 2022 में जो राजनीतिक घटनाक्रम हुआ था, उसे लेकर उन्हें गलत तरीके से बदनाम किया गया। उन्होंने कहा कि लोगों के मन में यह धारणा बना दी गई कि वह मुख्यमंत्री पद छोड़ना नहीं चाहते थे और इसलिए कांग्रेस अध्यक्ष बनने से बच गए, जबकि सच्चाई कुछ और थी। गहलोत ने कहा, “कांग्रेस अध्यक्ष का पद कितना बड़ा है, यह मैं अच्छी तरह जानता हूं। महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल जैसे दिग्गज इस पद पर रहे हैं। अगर सोनिया गांधी और पार्टी मुझे अध्यक्ष बनाना चाहती, तो क्या मैं मना कर देता?” उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय ऐसा माहौल बनाया गया, जिससे उनकी छवि को नुकसान पहुंचा। गहलोत के मुताबिक, अचानक पर्यवेक्षकों के आने और उसके बाद हुए घटनाक्रम ने उन्हें विवादों में घेर दिया। उन्होंने कहा कि आज भी कई लोग यह मानते हैं कि उन्होंने मुख्यमंत्री बने रहने के लिए बगावत करवाई थी, जबकि उनका इससे कोई लेना-देना नहीं था।
क्या कांग्रेस में सब कुछ ठीक नहीं?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि गहलोत का बयान केवल अतीत का स्पष्टीकरण नहीं है, बल्कि कांग्रेस के भीतर चल रही सत्ता और नेतृत्व की राजनीति का संकेत भी हो सकता है। गहलोत ने यह कहकर कि “अगर सोनिया गांधी मुझे अध्यक्ष बनाना चाहतीं तो क्या मैं मना कर देता”, उस धारणा को चुनौती देने की कोशिश की है जिसमें उन्हें अध्यक्ष पद छोड़कर मुख्यमंत्री पद से चिपके रहने वाला नेता बताया गया था। यह बयान कांग्रेस के भीतर उस पुराने विवाद को फिर जीवित करता है, जिसमें सचिन पायलट और अशोक गहलोत खेमों के बीच टकराव खुलकर सामने आया था।
2027 की तैयारी का संकेत?
कांग्रेस में आखिरी बार अध्यक्ष पद का चुनाव अक्टूबर 2022 में हुआ था, जिसमें मल्लिकार्जुन खड़गे ने जीत हासिल की थी। पार्टी संविधान के अनुसार अध्यक्ष का कार्यकाल पांच वर्ष का होता है, यानी अगला चुनाव 2027 में होना है। हालांकि अभी चुनाव में समय है, लेकिन राजनीतिक जानकार मानते हैं कि बड़े दलों में नेतृत्व की लड़ाई चुनाव से काफी पहले शुरू हो जाती है। गहलोत का यह बयान भी भविष्य की संभावित सियासी पोजिशनिंग के तौर पर देखा जा रहा है।
राहुल गांधी की भूमिका पर भी नजर
कांग्रेस में आज भी सबसे प्रभावशाली चेहरा राहुल गांधी को माना जाता है। ऐसे में 2027 में अध्यक्ष पद के लिए क्या राहुल गांधी वापसी करेंगे, खड़गे दोबारा मैदान में होंगे या कोई नया चेहरा सामने आएगा, इस पर लगातार अटकलें लगती रही हैं। गहलोत का बयान इन अटकलों को और हवा देने वाला माना जा रहा है।
राजस्थान की राजनीति भी वजह?
विशेषज्ञों का मानना है कि गहलोत अपने राजनीतिक करियर और विरासत को लेकर भी एक स्पष्ट संदेश देना चाहते हैं। 2022 के घटनाक्रम के बाद उनके विरोधियों ने लगातार यह नैरेटिव बनाया कि उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष बनने का मौका इसलिए गंवाया क्योंकि वह मुख्यमंत्री पद छोड़ना नहीं चाहते थे। अब गहलोत उसी धारणा को तोड़ने की कोशिश करते दिख रहे हैं।
कांग्रेस के लिए क्या संदेश?
गहलोत के बयान से एक बार फिर यह सवाल उठने लगा है कि क्या कांग्रेस अभी भी अपने पुराने गुटीय संघर्षों से पूरी तरह बाहर नहीं निकल पाई है? पार्टी जहां 2029 के लोकसभा चुनाव और राज्यों की राजनीति पर फोकस करना चाहती है, वहीं वरिष्ठ नेताओं के ऐसे बयान अंदरूनी मतभेदों की याद दिलाते हैं। यही वजह है कि गहलोत के ताजा बयान को सिर्फ एक व्यक्तिगत सफाई नहीं, बल्कि कांग्रेस के भीतर नेतृत्व और भविष्य की राजनीति को लेकर दिए गए एक राजनीतिक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
Former Chief Minister Ashok Gehlot has said about the Congress President’s post, “If Sonia Gandhi and the Congress leadership wanted him to be the party president, would he have refused?” He alleged that he was unfairly maligned for the political developments that took place in 2022. He said that the impression was created in the public’s mind that he did not want to leave the Chief Minister’s post. Gehlot said, “I am well aware of the importance of the position of Congress President.



