अयोध्या के राम मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी का मामला (Ram Mandir Donation Scam) अब और गंभीर होता जा रहा है। पुलिस की जांच अब केवल गिरफ्तार आरोपियों तक सीमित नहीं रही, बल्कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारियों तक भी पहुंच गई है। पुलिस ने ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय का बयान दर्ज किया है, यानि कि चंपत राय से पूरी पूछताछ हुई है। वहीं, उत्तर प्रदेश सरकार ने साफ कर दिया है कि मामले में किसी भी स्तर पर ढिलाई नहीं बरती जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
जरूरत पड़ी तो अनिल मिश्रा से भी पूछताछ
सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसियों ने पूर्व महासचिव चंपत राय से कई अहम बिंदुओं पर पूछताछ की है (Champat Rai Statement)। यदि जांच के दौरान आवश्यकता महसूस हुई तो ट्रस्ट के अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों, जिनमें ट्रस्टी अनिल मिश्रा भी शामिल हैं, उनके बयान भी दर्ज किए जाएंगे। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है।
आरोपियों के घर पहुंची पुलिस, परिवार ने भी बनाई दूरी
रविवार को पुलिस टीम मामले के आरोपी अविनाश शुक्ला के घर भी पहुंची। इस दौरान आरोपी के भाई अभिषेक शुक्ला ने मीडिया से कहा कि यदि कोई भी व्यक्ति मंदिर के दान में गड़बड़ी का दोषी पाया जाता है तो परिवार उसका समर्थन नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि भगवान राम के नाम पर आए धन के साथ किसी भी तरह की बेईमानी स्वीकार नहीं की जा सकती (Ram Mandir Donation Case)।
चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफों की पुष्टि
इस पूरे विवाद के बीच श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट (Ram Janmabhoomi Trust) ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि हाल के घटनाक्रम से ट्रस्ट बेहद आहत और दुखी है। ट्रस्ट ने पुष्टि की कि पूर्व महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे प्राप्त हो चुके हैं, जिन पर आगामी बैठक में विचार किया जाएगा। ट्रस्ट ने यह भी भरोसा दिलाया कि श्रद्धालुओं द्वारा सीधे भगवान राम को अर्पित की गई सभी कीमती वस्तुएं, जैसे चांदी की ईंटें, आभूषण और अन्य चढ़ावे पूरी तरह सुरक्षित हैं और उनका रिकॉर्ड भी मौजूद है। ट्रस्ट ने कहा कि सत्य अंततः सामने आएगा और भगवान श्रीराम की महिमा पर कोई आंच नहीं आएगी (Temple Donation Scam)।
आज कोर्ट में आठों आरोपियों की पेशी, सुरक्षा के कड़े इंतजाम
सभी आरोपियों की 29 जून 2026 को यानि कि आज न्यायिक हिरासत (रिमांड) खत्म हो रही है, जिसके बाद उन्हें विशेष अदालत में पेश किया जा रहा है। कोर्ट परिसर और आसपास भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। आरोपियों को पहले रिमांड मजिस्ट्रेट ने सोमवार तक न्यायिक हिरासत में भेजा था और अब उन्हें दोबारा न्यायिक हिरासत में भेजे जाने की संभावना है। सूत्रों के मुताबिक, सुनवाई जेल से वर्चुअल माध्यम से भी कराई जा सकती है ताकि सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित न हो।
वकील करेंगे बचाव या विरोध? बार एसोसिएशन की बैठक
मामले ने कानूनी हलकों में भी हलचल मचा दी है। अयोध्या के स्थानीय वकीलों ने आरोपियों का मुकदमा लड़ने से पूरी तरह बहिष्कार करने का निर्णय लिया है। अयोध्या बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कालिका प्रसाद मिश्रा ने बताया कि फैजाबाद अधिवक्ता संघ की बैठक बुलाई गई है, जिसमें इस मामले को लेकर फाइनल फैसला लिया जाएगा। यानि कि इस मोर्चे पर भी आरोपियों को भारी मुसीबत का सामना करना पड़ सकता है। क्योंकि वकील पहले ही नाराजगी जाहिर करते हुए ये कह चुके हैं कि राम मंदिर के आरोपियों को केस नहीं लड़ेंगे। ऐसे में उम्मीद बेहद कम ही है, कि अयोध्या बार एसोसिएशन की बैठक में आरोपियों के पक्ष में फैसला आएगा।
डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक का बड़ा बयान
उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कहा कि सरकार निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करेगी और दोषी चाहे कोई भी हो, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि पुलिस प्रशासन को पूरी स्वतंत्रता दी गई है और सरकार जांच पर लगातार नजर बनाए हुए है।
25 जून को दर्ज हुई थी FIR
इस मामले में 25 जून को एफआईआर दर्ज की गई थी (Ram Mandir Investigation)। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। एफआईआर में अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, अविनाश शुक्ला, टिन्नू यादव, मनीष यादव समेत कई लोगों को नामजद किया गया है। पूर्व सपा विधायक पवन पांडेय ने आरोप लगाया था कि राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए करीब 7 से 7.5 करोड़ रुपये के दान का गबन हुआ है। इन आरोपों के बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर उत्तर प्रदेश सरकार ने तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया था, जो पूरे मामले की जांच कर रही है।
अब जांच के केंद्र में ट्रस्ट की भूमिका
अब तक की जांच केवल कथित चोरी या गबन तक सीमित नहीं रह गई है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि क्या इस पूरे मामले में ट्रस्ट के किसी पदाधिकारी की भूमिका थी या प्रशासनिक स्तर पर कोई लापरवाही हुई। इसी वजह से ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारियों से पूछताछ को इस जांच का सबसे अहम मोड़ माना जा रहा है।



