नई दिल्ली: पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में तनाव लगातार बना हुआ है। इसी बीच हाल के दिनों में कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में एक अनौपचारिक मुलाकात हुई है (India Pakistan Secret Meeting)। इन खबरों के बाद यह चर्चा तेज हो गई कि क्या भारत और पाकिस्तान के बीच बैकडोर डिप्लोमेसी की शुरुआत हो चुकी है। अब इन अटकलों पर भारत सरकार की ओर से विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने स्पष्ट प्रतिक्रिया दी है।
कोलंबो सम्मेलन से शुरू हुई चर्चा
हाल ही में श्रीलंका के कोलंबो में इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज (IISS) का क्षेत्रीय सुरक्षा सम्मेलन (Regional Security Conference) आयोजित किया गया था। इस सम्मेलन में दक्षिण एशिया के कई देशों के पूर्व राजनयिक, सैन्य अधिकारी, सुरक्षा विशेषज्ञ और रणनीतिक मामलों के जानकार शामिल हुए थे। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि सम्मेलन के दौरान भारत और पाकिस्तान के प्रतिनिधियों के बीच अनौपचारिक स्तर पर बातचीत हुई। इसके बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में यह सवाल उठने लगा कि क्या दोनों देशों के बीच पर्दे के पीछे किसी प्रकार की बातचीत चल रही है।
विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने क्या कहा?
इन दावों पर प्रतिक्रिया देते हुए विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने साफ शब्दों में कहा कि (Vikram Misri Statement) ऐसे निजी कार्यक्रमों को सरकार किसी आधिकारिक प्रक्रिया का हिस्सा नहीं मानती। उन्होंने कहा कि,
“ऐसे सम्मेलन निजी संस्थाओं द्वारा आयोजित किए जाते हैं और इनमें होने वाली चर्चाओं का भारत सरकार की आधिकारिक नीति या रुख से कोई संबंध नहीं होता।भारत से जो लोग इन आयोजनों में हिस्सा लेते हैं, उनमें से अधिकांश सेवानिवृत्त राजनयिक, पूर्व सैन्य अधिकारी या सिविल सोसाइटी के सदस्य होते हैं। ये लोग अपने व्यक्तिगत विचार और अनुभव साझा करते हैं। वे किसी भी रूप में भारत सरकार का प्रतिनिधित्व नहीं करते और न ही उनकी राय को सरकार का आधिकारिक दृष्टिकोण माना जा सकता है।”
बैकडोर बातचीत की अटकलों पर लगा विराम
विदेश सचिव के बयान के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि कोलंबो सम्मेलन के दौरान हुई किसी भी अनौपचारिक बातचीत को भारत सरकार आधिकारिक वार्ता नहीं मानती। इससे उन अटकलों पर भी विराम लग गया है जिनमें भारत और पाकिस्तान के बीच बैकडोर डायलॉग शुरू होने की बात कही जा रही थी।
अफगानिस्तान पर पाकिस्तान के हमले की भारत ने की निंदा
इसी दौरान भारत ने पाकिस्तान द्वारा अफगानिस्तान पर किए गए हवाई हमलों की भी कड़ी आलोचना की है। विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि पाकिस्तान का यह हमला बिना किसी उकसावे के किया गया और इससे क्षेत्रीय शांति एवं स्थिरता को गंभीर खतरा पैदा हुआ है। भारत ने यह भी कहा कि किसी संप्रभु देश पर इस तरह की सैन्य कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय मानकों के खिलाफ है और इससे पूरे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ सकती है।
28 जून को हुए थे हवाई हमले
जानकारी के अनुसार, 28 जून को पाकिस्तान वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने अफगानिस्तान के तीन अलग-अलग इलाकों में हवाई हमले किए। रिपोर्ट्स के मुताबिक इन हमलों में कम से कम 36 लोगों की मौत हुई, जबकि 150 से अधिक लोग घायल हो गए। भारत का कहना है कि पाकिस्तान अपने घरेलू संकटों और आंतरिक चुनौतियों से लोगों का ध्यान हटाने के लिए पड़ोसी देशों को निशाना बना रहा है। विदेश मंत्रालय ने क्षेत्र में शांति बनाए रखने और सभी देशों की संप्रभुता का सम्मान करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
फिलहाल क्या है स्थिति?
विदेश सचिव विक्रम मिस्री के बयान से यह साफ हो गया है कि भारत की ओर से पाकिस्तान के साथ किसी भी आधिकारिक बैकडोर बातचीत की पुष्टि नहीं की गई है। वहीं, अफगानिस्तान पर पाकिस्तान की सैन्य कार्रवाई को लेकर भारत का रुख पहले की तरह सख्त बना हुआ है। ऐसे में क्षेत्रीय सुरक्षा और भारत-पाक संबंधों को लेकर आने वाले दिनों में स्थिति पर सभी की नजर बनी रहेगी।



