बिजनौर: उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले से सामने आया एक दिल दहला देने वाला मामला आखिरकार अदालत के फैसले के साथ अपने मुकाम पर पहुंच गया। जिस मां की गोद बच्चे के लिए सबसे सुरक्षित मानी जाती है, उसी मां ने अपने चार साल के मासूम बेटे की इतनी बेरहमी से हत्या कर दी कि पूरे इलाके की रूह कांप उठी थी। अब इस सनसनीखेज मामले में अदालत ने आरोपी मां आदेश देवी को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है।
कोर्ट ने 60 हजार का जुर्माना भी लगाया
विशेष अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (पॉक्सो) लोकेश नागर की अदालत ने आदेश देवी को हत्या और साक्ष्य मिटाने के अपराध में दोषी माना। कोर्ट ने उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाने के साथ 60 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। अदालत ने निर्देश दिया कि जुर्माने की राशि में से 40 हजार रुपये मृतक बच्चे के पिता कपिल कुमार को मुआवजे के रूप में दिए जाएंगे।
खेत पर गया था पिता, पीछे से मां ने खेला खौफनाक खेल
यह दर्दनाक घटना 12 जून 2024 को हीमपुर दीपा थाना क्षेत्र के जलालपुर हसना गांव में हुई थी। अभियोजन पक्ष के अनुसार, बच्चे का पिता कपिल कुमार रोज की तरह खेत में काम करने गया हुआ था। इसी दौरान घर में मौजूद आदेश देवी ने अपने चार साल के बेटे हर्ष पर फावड़े से ताबड़तोड़ वार कर दिए। मासूम अपनी मां के सामने खुद को बचा भी नहीं सका। गंभीर हमले में वह लहूलुहान होकर जमीन पर गिर पड़ा।
सबूत मिटाने के लिए जलती लकड़ियों में फेंकने की कोशिश
घटना की सबसे भयावह बात यह रही कि बेटे पर हमला करने के बाद आरोपी महिला ने अपराध छिपाने की भी कोशिश की। अभियोजन के मुताबिक उसने घायल बच्चे को जलती हुई लकड़ियों में फेंक दिया, ताकि शव जल जाए और वारदात के सबूत मिट जाएं। उधर, जब पिता कपिल कुमार घर लौटा तो उसने अपनी पत्नी को बेटे पर हमला करते हुए देखा। उसने तुरंत बच्चे को बचाने की कोशिश की।
पति को भी मारने दौड़ी महिला
एफआईआर के मुताबिक, जब कपिल कुमार ने पत्नी को रोकने की कोशिश की और उससे सवाल किया, तो आदेश देवी हाथ में फावड़ा लेकर उसी पर हमला करने के लिए दौड़ पड़ी। किसी तरह परिवार के अन्य लोगों की मदद से कपिल ने जलती लकड़ियों के बीच से बेटे को बाहर निकाला और अस्पताल लेकर भागा। हालांकि, बच्चे की हालत बेहद गंभीर थी और रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया।
मानसिक बीमारी की दलील अदालत ने ठुकराई
मामले की जांच के बाद पुलिस ने आदेश देवी के खिलाफ हत्या और साक्ष्य मिटाने की धाराओं में चार्जशीट दाखिल की। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने अदालत में यह दलील दी कि आरोपी महिला मानसिक रूप से बीमार थी, इसलिए उसे घटना के समय अपने कृत्य का सही आभास नहीं था। लेकिन अदालत ने गवाहों के बयान, मेडिकल और फॉरेंसिक साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने माना कि उपलब्ध सबूत यह साबित करते हैं कि आरोपी ने जानबूझकर हत्या की और उसके बाद सबूत मिटाने का भी प्रयास किया।
कोर्ट का सख्त संदेश
विशेष अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (पॉक्सो) लोकेश नागर ने आदेश देवी को हत्या और साक्ष्य मिटाने का दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। साथ ही 60 हजार रुपये का जुर्माना लगाया, जिसमें से 40 हजार रुपये मृतक बच्चे के पिता कपिल कुमार को आर्थिक सहायता के रूप में देने का आदेश दिया गया। इस फैसले के साथ अदालत ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि मासूम बच्चों के खिलाफ होने वाले जघन्य अपराधों में दोषियों के प्रति किसी भी तरह की नरमी नहीं बरती जाएगी।



