नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र की शुरुआत से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों और विपक्ष को अहम संदेश दिया। मीडिया को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने उम्मीद जताई कि इस बार का मानसून सत्र प्रोडक्टिव और ऐतिहासिक साबित होगा (Parliament Monsoon Session 2026)। उन्होंने विपक्ष से सदन में सकारात्मक भूमिका निभाने की अपील करते हुए कहा कि लोकतंत्र में बहस तर्क और तथ्यों के आधार पर होनी चाहिए, शोर-शराबे के आधार पर नहीं।
पीएम मोदी का यह बयान ऐसे समय आया है, जब संसद के मानसून सत्र में कई महत्वपूर्ण विधेयक पेश होने वाले हैं और विपक्ष भी विभिन्न मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी में है। ऐसे में प्रधानमंत्री का यह संदेश राजनीतिक रूप से भी काफी अहम माना जा रहा है।
‘जहां तर्क और तथ्य होते हैं, वहां शोर-शराबे की जरूरत नहीं’
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साफ शब्दों में कहा कि संसद लोकतंत्र का सबसे बड़ा मंच है और यहां हर मुद्दे पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने कहा,
“मेरा मानना है कि जहां तर्क और तथ्य होते हैं, वहां शोर-शराबे की कोई जरूरत नहीं होती। अगर आपके तर्क और तथ्य मजबूत हैं तो आवाज ऊंची करने की आवश्यकता नहीं पड़ती। मुझे उम्मीद है कि संसद में चर्चा तथ्यों और तर्कों के आधार पर होगी। हर आवाज को सुने जाने का अवसर मिलना चाहिए, यही संसद की भूमिका है।”
पीएम मोदी का यह बयान विपक्ष के लिए एक स्पष्ट संदेश माना जा रहा है कि संसद में हंगामे की बजाय रचनात्मक बहस को प्राथमिकता दी जाए।
मानसून और मानसून सत्र पर कही खास बात
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत हल्के-फुल्के अंदाज में करते हुए कहा कि जैसे देश के लिए अच्छा मानसून जरूरी है, वैसे ही संसद का मानसून सत्र भी उतना ही महत्वपूर्ण है।उन्होंने कहा,
“मानसून हो या मानसून सत्र, अगर दोनों प्रो-एक्टिव हों तो दोनों प्रोडक्टिव होते हैं। दोनों प्रोडक्टिव होंगे तो देश का कल्याण होगा। इसलिए हमारी प्रार्थना है कि मानसून भी अच्छा रहे और मानसून सत्र भी प्रोडक्टिव रहे।”
पिछले एक महीने की उपलब्धियों का किया जिक्र
प्रधानमंत्री ने कहा कि बीते एक महीने में भारत ने राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और अंतरिक्ष के क्षेत्र में कई ऐसी उपलब्धियां हासिल की हैं, जिन पर हर भारतीय को गर्व होना चाहिए। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष मानसून सत्र से पहले एक भारतीय नागरिक अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर थे और अब भारत के युवाओं द्वारा संचालित एक स्टार्टअप ने निजी अंतरिक्ष क्षेत्र में ऐसी सफलता हासिल की है, जिसे दुनिया के बहुत कम देश प्राप्त कर पाए हैं।
पीएम मोदी ने कहा,
“यह केवल संयोग नहीं, बल्कि एक मजबूत संदेश है कि भारत के युवाओं की क्षमता और उनकी आकांक्षाएं अंतरिक्ष जितनी असीम हैं।”
देश के विकास कार्यों का भी किया उल्लेख
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में हाल के विकास कार्यों का जिक्र करते हुए कहा कि देश तेजी से आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और नई तकनीकों की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि हाल ही में राजस्थान में बड़ी ऑयल रिफाइनरी राष्ट्र को समर्पित की गई, देश का तीसरा सेमीकंडक्टर प्लांट शुरू हुआ और ग्रीन हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन भी देश को समर्पित की गई। उन्होंने दावा किया कि भारत की हाइड्रोजन ट्रेन दुनिया की सबसे शक्तिशाली इंजन वाली और सबसे लंबी हाइड्रोजन ट्रेन है।
मानसून सत्र में आ सकते हैं कई अहम बिल
आयकर संशोधन विधेयक, 2026
सर्वोच्च न्यायालय संशोधन विधेयक, 2026 (जजों की संख्या 33 से बढ़ाकर 37)
राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम संशोधन विधेयक
जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण संशोधन विधेयक
MSME विकास संशोधन विधेयक
विदेशी अंशदान (FCRA) संशोधन विधेयक
विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, 2025
25 दिन चलेगा संसद का मानसून सत्र
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के अनुसार संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई 2026 से 13 अगस्त 2026 तक चलेगा। कुल 25 दिनों के इस सत्र में 19 बैठकें निर्धारित हैं। सरकार का कहना है कि इस दौरान राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर व्यापक चर्चा होगी और कई महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने की कोशिश की जाएगी।
राजनीतिक संदेश भी साफ
प्रधानमंत्री मोदी के पूरे संबोधन का सबसे महत्वपूर्ण संदेश संसद की कार्यवाही को लेकर रहा। उन्होंने विकास और उपलब्धियों का जिक्र जरूर किया, लेकिन सबसे अधिक जोर इस बात पर दिया कि लोकतंत्र की मजबूती तर्क, तथ्य और स्वस्थ बहस से होती है, न कि हंगामे और शोर-शराबे से। ऐसे में मानसून सत्र शुरू होने से पहले उनका यह बयान विपक्ष और सत्ता पक्ष, दोनों के लिए एक स्पष्ट राजनीतिक संदेश माना जा रहा है।



