अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के रूप में पूर्व एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा की नियुक्ति पर कांग्रेस और विपक्षी दलों ने तीखा निशाना साधा है। आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए विपक्षी दल अब नए CEO की नियुक्ति पर सवाल उठाने लगे हैं। वरिष्ठ कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने इस नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए कहा कि, जीतेंद्र मिश्रा ने भारतीय वायुसेना में रहते हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ (पश्चिमी हवाई कमान) का नेतृत्व किया था। उन्होंने आशंका जताई कि क्या इस नियुक्ति के पीछे कोई “छिपा हुआ सच” है। कांग्रेस नेताओं और विपक्षी दलों ने तंज कसते हुए कहा कि केंद्र सरकार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और विश्व हिंदू परिषद (VHP) के लोगों पर भी भरोसा नहीं रहा, इसलिए उन्हें मंदिर प्रबंधन के लिए एक बाहरी सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी को लाना पड़ा।
अजय राय और इमरान मसूद ने क्या कहा?
उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और अन्य नेताओं ने मंदिर ट्रस्ट में कथित अनियमितताओं को लेकर हमला बोला और इसे ‘ऑपरेशन चढ़ावा चोरी’ से जोड़ते हुए पारदर्शिता पर सवाल उठाए।शंकराचार्य की देखरेख की मांग: वरिष्ठ कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने कहा कि एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा एक सम्मानित अधिकारी हैं, लेकिन सनातन धर्म के अनुसार राम मंदिर ट्रस्ट का काम जगतगुरु शंकराचार्य की देखरेख और सुझावों से चलना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह काम सरकारी सेवानिवृत्त अधिकारियों के बूते के बाहर है। वहीं अपने विवादित बयानों के लिए मशहूर कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने इस नियुक्ति पर कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा कि “मंदिर का काम साधु-संतों का और उससे जुड़े लोगों का है”। उन्होंने तंज कसा कि एक एयर मार्शल, जिनका काम हवाई जहाज उड़ाना है, वे आरएसएस (RSS) के जाल में फंस गए हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि RSS को अब राम मंदिर प्रोजेक्ट में पैसा नजर आ रहा है, इसलिए वे इसे लालच की नजरों से देख रहे हैं। जबकि, उदित राज ने तंज भरे लहजे में बधाई देते हुए सोशल मीडिया पर लिखा— “श्री नृपेंद्र मिश्रा जी गए तो दूसरे मिश्रा जी ने कमान संभाली”। उन्होंने इस बात पर भी निशाना साधा कि ट्रस्ट में समाज के सभी वर्गों को उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिल रहा है।
BJP ने कांग्रेस को जमकर लताड़ा!
राम मंदिर ट्रस्ट के पहले सीईओ (CEO) के तौर पर सेवानिवृत्त एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा की नियुक्ति पर विपक्ष (कांग्रेस और सपा) के हमलों का भारतीय जनता पार्टी (BJP) और विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने बेहद आक्रामक तरीके से जवाब दिया है। भाजपा और उसके समर्थित नेताओं ने विपक्ष पर पलटवार करते हुए कहा कि विपक्ष हर अच्छे और योग्य व्यक्ति की नियुक्ति पर राजनीति करने की आदत रखता है। देश की सीमा और संप्रभुता की रक्षा का चार दशकों का अनुभव रखने वाले एक शीर्ष सैन्य अधिकारी का मंदिर प्रबंधन में आना गर्व की बात है, न कि विवाद की। भाजपा सांसद और उत्तर प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा ने स्पष्ट किया कि, “श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बनी एक पूरी तरह स्वतंत्र और कानूनी संस्था है। ट्रस्ट का अपना संविधान और कार्यप्रणाली है। उन्होंने पूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन कर देश के सर्वोत्तम आवेदकों में से योग्यता के आधार पर यह फैसला लिया है। इस पर किसी बाहरी व्यक्ति को अनावश्यक टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है।” भाजपा नेताओं ने कांग्रेस और सपा पर तंज कसते हुए कहा कि यह वही दल हैं जिन्होंने कभी प्रभु श्री राम के अस्तित्व पर सवाल उठाए थे, रामसेतु को काल्पनिक बताया था और अयोध्या में कारसेवकों पर गोलियां चलवाई थीं। इसलिए इन्हें आज मंदिर प्रबंधन पर सवाल उठाने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।
पूर्व एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा ने विवाद पर क्या कहा?
अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के रूप में पूर्व एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा ने नियुक्ति के बाद सबका धन्यवाद किया। वह नियुक्ति के बाद गुरुवार को अयोध्या भी पहुंचे। वहां उन्होंने रामलला के दर्शन किए और ट्रस्ट के दूसरे अधिकारियों के साथ मुलाकात भी करेंगे। जीतेंद्र मिश्रा का भारतीय वायुसेना (IAF) में लगभग चार दशकों (39 वर्ष से अधिक) का एक बेहद शानदार और अनुकरणीय करियर रहा है। उन्हें 6 दिसंबर 1986 को भारतीय वायुसेना के फाइटर स्ट्रीम में कमीशन मिला था। वह नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) खड़कवासला के छात्र रहे हैं। वह एक कुशल फाइटर कॉम्बैट लीडर और एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट रहे हैं, जिनके पास 18 से अधिक प्रकार के लड़ाकू विमानों, ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और हेलीकॉप्टरों में 3,000 घंटे से अधिक की उड़ान का अनुभव है। स्क्वाड्रन लीडर के तौर पर वह उस टीम का हिस्सा थे, जिसने कारगिल युद्ध की शुरुआत में मिराज-2000 (Mirage 2000) विमानों पर लेजर गाइडेड बमों को ऑपरेशनल बनाया था। 1 जनवरी 2025 को उन्होंने भारतीय वायुसेना के सबसे महत्वपूर्ण ऑपरेशनल कमांड में से एक ‘पश्चिमी हवाई कमान’ (Western Air Command) के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ (AoC-in-C) के रूप में कार्यभार संभाला था। वेस्टर्न एयर कमांड के प्रमुख रहते हुए उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान कमान को लीड किया। उनकी इस असाधारण और विशिष्ट सेवा के लिए उन्हें सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल (SYSM), अति विशिष्ट सेवा पदक (AVSM) और विशिष्ट सेवा पदक (VSM) से भी नवाजा जा चुका है।



