देहरादून की DIT यूनिवर्सिटी एक बार फिर चर्चा में है, लेकिन इस बार वजह कोई शैक्षणिक उपलब्धि नहीं बल्कि राजकीय शोक के दौरान आयोजित किया गया म्यूजिक शो है। पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी के निधन पर पूरे उत्तराखंड में राजकीय शोक घोषित था। सरकारी कार्यक्रम स्थगित किए गए, राष्ट्रीय ध्वज झुका हुआ था और पूरा प्रदेश एक वरिष्ठ नेता को श्रद्धांजलि दे रहा था। लेकिन इसी बीच देहरादून स्थित DIT यूनिवर्सिटी में पंजाबी गायिका जैस्मीन सैंडलास का कार्यक्रम आयोजित किया गया।
श्रद्धांजलि या सेलिब्रिटी शो? DIT ने क्या चुना, सबने देख लिया
राजकीय शोक में भी ‘शो मस्ट गो ऑन’!
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब पूरे राज्य में शोक का माहौल था, तब एक प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान ने क्या संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी का परिचय दिया? क्या कार्यक्रम को स्थगित करना इतना मुश्किल था कि राजकीय शोक की गरिमा को भी नजरअंदाज कर दिया गया?
राजकीय शोक और विश्वविद्यालय की जिम्मेदारी
कानून और प्रशासनिक प्रोटोकॉल के तहत राजकीय शोक केवल एक औपचारिक घोषणा नहीं होती, बल्कि यह समाज और संस्थाओं से संवेदनशील व्यवहार की अपेक्षा भी करती है। ऐसे समय में सार्वजनिक उत्सव, सांस्कृतिक समारोह और मनोरंजन कार्यक्रमों को लेकर विशेष सावधानी बरती जाती है। जानकारों का कहना है कि विश्वविद्यालय केवल डिग्री बांटने का केंद्र नहीं होता, बल्कि वह युवाओं को सामाजिक मूल्यों और जिम्मेदारियों का भी पाठ पढ़ाता है। ऐसे में यदि विश्वविद्यालय स्वयं शोक और सम्मान जैसी मूलभूत संवेदनाओं को महत्व नहीं देगा तो छात्रों को क्या संदेश जाएगा?
पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा
मामला बढ़ने के बाद पुलिस ने DIT यूनिवर्सिटी प्रबंधन के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। प्रशासन अब जांच कर रहा है। मगर यहां बात सिर्फ नियमों की नहीं, संवेदनाओं की भी है। जब पूरा प्रदेश अपने पूर्व मुख्यमंत्री के लिए शोक में डूबा हो, स्कूल बंद हो, राष्ट्रीय ध्वज शोक में झुका हो, तब स्टेज की रोशनी और तेज संगीत सिर्फ कार्यक्रम नहीं, संवेदनाओं पर भी सवाल खड़े करते हैं।
क्या विश्वविद्यालयों की प्राथमिकता बदल गई है?
देहरादून के निजी विश्वविद्यालयों को लेकर अक्सर यह आरोप लगते रहे हैं कि शिक्षा और शोध से ज्यादा जोर बड़े-बड़े कॉन्सर्ट, सेलिब्रिटी नाइट्स और मनोरंजन कार्यक्रमों पर दिया जा रहा है। हर साल लाखों रुपये खर्च कर ग्लैमरस इवेंट आयोजित किए जाते हैं, जबकि शैक्षणिक उत्कृष्टता, शोध और नवाचार पर चर्चा अपेक्षाकृत कम दिखाई देती है। इस घटना के बाद यह बहस फिर तेज हो गई है कि क्या विश्वविद्यालयों का उद्देश्य केवल छात्रों को मनोरंजन उपलब्ध कराना रह गया है, या फिर उन्हें सामाजिक चेतना और राष्ट्रीय मूल्यों के प्रति भी जिम्मेदार होना चाहिए?
सोशल मीडिया पर भी नाराजगी
घटना सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी कई लोगों ने सवाल उठाए। लोगों का कहना है कि जब राज्य का सर्वोच्च सम्मान एक दिवंगत पूर्व मुख्यमंत्री को दिया जा रहा था, तब एक बड़े सार्वजनिक कार्यक्रम का आयोजन संवेदनहीनता दर्शाता है। कई लोगों ने पूछा कि क्या कार्यक्रम को एक-दो दिन आगे बढ़ाना संभव नहीं था?



