Israel and America attack on Iran: अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान पर हमला कर दिया है। ईरान के तेहरान, इस्फहान, कराज और करमानशाह शहर धमाकों की गूंज से थर्रा उठे हैं। ये शहर धुएं के गुबार से भर गए हैं। दावा किया गया कि ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई और कुछ अन्य नेताओं के घरों को भी टारगेट किया गया है। ईरान के पोर्ट सिटी बुशहर में भी धमाके की आवाज सुनाई दी है। जबकि, ईरान ने बहरीन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर हमला कर दिया है।
पिछले साल जून में 12 दिनों तक चले संघर्ष के बाद ईरान के खिलाफ ये अमेरिका और इजरायल का बड़ा कदम माना जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने कहा है कि, ईरान की सेना सरेंडर कर दे और सारी शर्तों मान ले, वरना अंजाम बहुत बुरा होगा। डॉनल्ड ट्रंप ने कहा कि, “हमने बार-बार डील करने की कोशिश की। हम उनकी मिसाइलों को नष्ट कर देंगे और उनकी मिसाइल उद्योग को मिट्टी में मिला देंगे। इसे पूरी तरह से ख़त्म कर दिया जाएगा।” मतलब साफ है, इस बार अमेरिका और इजरायल ईरान को इतनी आसानी से नहीं बख्शने वाले। ईरान के लिए खतरा कितना बड़ा है इसका अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि, इजरायल ने अपना एयरस्पेस बंद कर दिया। इजरायल के कई शहरों में सायरन बज रहे हैं। और लोगों को बंकर्स में जाने के लिए बोल दिया गया है। मतलब ये कि, इजरायल बड़ी जंग की तैयारी करके मैदान में उतरा है। उधर अमेरिका ने भी अपने जंगी जहाज़ और लड़ाकू विमानों को मिडिल ईस्ट में तैयार कर रखा है।
इजरायल-अमेरिका के गठजोड़ से लड़ पाएगा ईरान?
ईरान ने भी साफ कर दिया है कि, वो डरने वाला नहीं है। डिफेंस एक्सपर्ट्स का कहना है कि, वो मिसाइल और ड्रोन हमले जरूर करेगा। ईरान से 6 गुना बड़ा देश है अमेरिका। ईरान से कहीं ज्यादा ताकतवर देश है अमेरिका। ईरान के पास 143 बिलियन बैरल तेल का भंडार है, तो अमेरिका के पास 264 बिलियन बैरल। ईरान को ना चाहते हुए भी अमेरिका से 90 मिलियन डॉलर से ज्यादा का आयात करना पड़ता है। यही नहीं ईरान परमाणु समझौते पर साइन करने के लिए भी तैयार है। लेकिन, इजरायल और अमेरिका उसे रियायत देना नहीं चाहते।

युद्ध का भारत और दुनिया पर क्या होगा असर?
इस युद्ध से कच्चे तेल की कीमतों में तगड़ा इजाफा हो सकता है। साथ ही इसके सप्लाई चेन में भी बाधा आ सकती है, क्योंकि दुनिया का 40% से ज्यादा कच्चा कच्चा तेल होर्मुज स्ट्रेट से आता है। येदुनिया का सबसे बिजी ऑयल रूट है और ये ईरान के अधीन आता है। भारत-चीन समेत दुनिया के ज्यादार देश इसी रूट से कच्चा तेल इंपोर्ट करते हैं। ऐसे में युद्ध के कारण अगर ईरान इस रूट को बंद कर देता है तो दुनियाभर में क्रूड ऑयल कि सप्लाई बाधित हो सकती है। दुनियाभर की इकॉनमी पर बुरा असर पड़ सकता है। महंगाई में इजाफा हो सकता है। गौर करने वाली बात ये है कि, होर्मुज स्ट्रेट पर भारत की निर्भरता कुछ ज्यादा ही है। भारत इस रास्ते से 50 फीसदी से ज्यादा तेल मंगाता है। मतलब ये कि, अगर ये युद्ध लंबा चला तो भारत को भी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।



