Wednesday, September 16, 2026
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रूसी तेल पर भारत को घेरा तो जयशंकर ने खोल दी पश्चिम की पोल, बोले- ‘हम पर सवाल, लेकिन हथियार कौन बेचता है?’

फिनलैंड में आयोजित एक अहम अंतरराष्ट्रीय मंच (Finland conference) पर भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने रूस से तेल खरीदने को लेकर पश्चिमी देशों की आलोचना का करारा जवाब दिया। उन्होंने साफ-साफ शब्दों में कहा कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों और ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखकर फैसले लेता है, न कि किसी बाहरी दबाव के आधार पर। विदेश मंत्री जयशंकर ने यूरोपीय देशों के दोहरे रवैये पर भी सवाल खड़े किए।

विदेश मंत्री जयशंकर का दो टूक और सीधा जवाब

फिनलैंड में आयोजित Kultaranta Talks कार्यक्रम में (S Jaishankar Finlnd visit) “उभरती हुई शक्तियां और नया भू-राजनीतिक मुकाबला” विषय पर चर्चा के दौरान एक पत्रकार ने रूस-यूक्रेन युद्ध (Russia Ukraine war) को लेकर भारत के रुख पर सवाल उठाया। पत्रकार ने कहा कि भारत रूस के प्रति ज्यादा सहानुभूति दिखा रहा है, क्योंकि वो रूसी तेल खरीदने में ज्यादा दिलचस्पी रखता है। इस पर विदेश मंत्री ने बिना किसी हिचकिचाहट के जवाब देते हुए कहा कि,

“भारत तेल खरीदते समय केवल दो चीजें देखता है कीमत और उपलब्धता। उन्होंने कहा कि जब रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू हुआ, तब वैश्विक ऊर्जा बाजार में बड़ा बदलाव आया। यूरोपीय देश बड़ी मात्रा में मध्य पूर्व से तेल खरीदने लगे, जो भारत का पारंपरिक आपूर्तिकर्ता क्षेत्र रहा है। ऐसे में भारत के सामने ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए वैकल्पिक स्रोत तलाशना जरूरी हो गया था ()India Russia oil imports”।

“भारत का फैसला राजनीतिक झुकाव का नतीजा नहीं”

जयशंकर ने कहा कि (Jaishankar on Russian oil) उस समय बाजार में रूसी तेल बड़ी मात्रा में उपलब्ध था और उसकी कीमत भी प्रतिस्पर्धी थी। भारत जैसी विशाल आबादी वाले देश के लिए ऊर्जा सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि परिस्थितियों ने भारत को उस दिशा में आगे बढ़ने के लिए मजबूर किया, क्योंकि देश अपनी जनता को महंगे ईंधन के बोझ तले नहीं दबा सकता था। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत का फैसला किसी राजनीतिक झुकाव का परिणाम नहीं था, बल्कि आर्थिक और रणनीतिक जरूरतों पर आधारित था(Russian crude oil purchase)।

जयशंकर ने यूरोप के दोहरे रवैये पर उठाए सवाल

विदेश मंत्री ने चर्चा के दौरान यूरोपीय देशों पर तीखा पलटवार भी किया। उन्होंने कहा कि भारत पर रूस से तेल खरीदने को लेकर सवाल उठाने वाले देशों को पहले अपने आचरण पर भी नजर डालनी चाहिए (European double standards)। जयशंकर ने कहा कि,

किसी भी यूरोपीय देश पर भारतीय हथियारों से हमला नहीं हुआ है, लेकिन भारत के खिलाफ इस्तेमाल होने वाले कई हथियार यूरोपीय देशों द्वारा बेचे जाते रहे हैं” (Jaishankar Europe remarks)।

उन्होंने संकेत दिया कि दक्षिण एशिया में सुरक्षा चुनौतियों के बावजूद पश्चिमी देशों ने वर्षों तक ऐसे रक्षा सौदे किए हैं, जिनसे भारत की चिंताएं बढ़ी हैं। उनका कहना था कि जब भारत की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों की बात आती है, तब पश्चिमी देश अक्सर अलग नजरिया अपनाते हैं, लेकिन रूस से तेल खरीदने जैसे मामलों में नैतिकता का पाठ पढ़ाने लगते हैं।

विदेश मंत्री ने अमेरिका का भी किया जिक्र

जयशंकर ने अपने संबोधन में यह भी याद दिलाया कि साल 2022 में खुद अमेरिका ने वैश्विक तेल बाजार को स्थिर रखने के लिए भारत की भूमिका को महत्वपूर्ण माना था (India energy security)। उन्होंने कहा कि रूस पर प्रतिबंधों के बाद ऊर्जा बाजार में भारी उथल-पुथल का खतरा पैदा हो गया था। ऐसे समय में भारत द्वारा रूसी तेल खरीदने से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को संतुलन मिला और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों को नियंत्रण में रखने में मदद मिली। उन्होंने कहा कि उस दौर में अमेरिका ने भी भारत की भूमिका को सकारात्मक नजरिए से देखा था (ndia strategic autonomy)।

भारत का स्पष्ट संदेश…राष्ट्रहित सर्वोपरि

फिनलैंड में दिए गए इस बयान से एक बार फिर यह स्पष्ट हो गया कि भारत अपनी विदेश नीति और आर्थिक फैसलों में रणनीतिक स्वायत्तता की नीति पर कायम है। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद दुनिया दो खेमों में बंटी नजर आई, लेकिन भारत ने लगातार संतुलित रुख अपनाते हुए अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता दी। विदेश मंत्री जयशंकर के बयान को केवल रूसी तेल खरीद का बचाव नहीं, बल्कि पश्चिमी देशों को दिया गया एक स्पष्ट संदेश भी माना जा रहा है कि भारत अब वैश्विक मंचों पर अपने फैसलों को लेकर रक्षात्मक नहीं, बल्कि आत्मविश्वास के साथ जवाब देने की स्थिति में है।

क्यों अहम है जयशंकर का बयान?

  • रूसी तेल खरीद पर भारत के रुख का खुला बचाव
  • यूरोप के कथित दोहरे मानदंडों पर सीधा सवाल
    ऊर्जा सुरक्षा को राष्ट्रीय हित से जोड़ा
    पश्चिमी देशों की हथियार नीति पर निशाना
    भारत की स्वतंत्र और संतुलित विदेश नीति का जिक्र

कुल मिलाकर, फिनलैंड में दिया गया जयशंकर का बयान केवल ऊर्जा नीति पर प्रतिक्रिया नहीं था, बल्कि बदलती वैश्विक राजनीति में भारत के बढ़ते आत्मविश्वास और स्वतंत्र कूटनीतिक सोच का मजबूत प्रदर्शन भी माना जा रहा है।

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