समाजवादी विचारधारा के प्रतीक नेता राम मनोहर लोहिया की जयंती (Lohia Jayanti Patna) पर सीएम नीतीश (Nitish Kumar News) ने उन्हें श्रद्धांजलि दी, सीएम ने उनकी प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किए। पटना स्थित लोहिया उद्यान में राजकीय समारोह में मुख्यमंत्री ने लोहिया के विचारों और उनके सामाजिक योगदान को याद करते हुए उन्हें समाज के लिए प्रेरणास्रोत बताया।

इस मौके पर डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा, जल संसाधन एवं संसदीय कार्य मंत्री विजय कुमार चौधरी, ग्रामीण कार्य मंत्री अशोक चौधरी और कृषि मंत्री रामकृपाल यादव समेत कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। इसके अलावा विधायक श्याम रजक, विधान पार्षद संजय कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव कुमार रवि और डॉ. चन्द्रशेखर सिंह सहित कई गणमान्य लोग कार्यक्रम में शामिल हुए। सूचना एवं जन-सम्पर्क विभाग के कलाकारों ने देशभक्ति गीत और बिहार गीत प्रस्तुत किए, वहीं आरती-पूजन के साथ समारोह का आयोजन हुआ।

डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी रहे नदारद
इस दौरान डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी कार्यक्रम में नजर नहीं आए, जिसे लेकर सियासी गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है (Bihar Political News)। हाल के दिनों से यह अटकलें लगाई जा रही हैं कि सम्राट चौधरी भविष्य में मुख्यमंत्री पद के दावेदार हो सकते हैं (Samrat Choudhary CM Face)। ऐसे में उनकी गैरमौजूदगी को लेकर कई तरह के राजनीतिक कयास लगाए जा रहे हैं।

निशांत कुमार पर सियासी बयानबाज़ी
उधर, बिहार की राजनीति में मुख्यमंत्री के बेटे निशांत कुमार भी चर्चा के केंद्र में हैं (Nishant Kumar Political Entry)। उनकी संभावित राजनीतिक भूमिका को लेकर बयानबाज़ी तेज हो गई है (Bihar CM Race)। इसी बीच पूर्व सांसद साधु यादव ने नीतीश कुमार को नसीहत देते हुए कहा कि आज का दौर लोहिया और कर्पूरी ठाकुर जैसा नहीं रहा। साधु यादव ने कहा कि अगर नीतीश कुमार अपने बेटे को राजनीति में स्थापित करना चाहते हैं तो समय रहते फैसला कर लें, क्योंकि भविष्य में परिस्थितियां क्या होंगी, यह कहना मुश्किल है।

‘सम्राट मॉडल’ बनाम ‘नीतीश मॉडल’ की बहस
JDU के भीतर से निशांत कुमार को भविष्य का मुख्यमंत्री बनाने की मांग भी उठने लगी है। इसी के साथ बिहार की सियासत में ‘सम्राट मॉडल’ बनाम ‘नीतीश मॉडल’ पर बहस तेज हो गई है (Nitish Model vs Samrat Model)। JDU नेताओं का मानना है कि विकास की राजनीति को आगे बढ़ाने के लिए नीतीश मॉडल ही कारगर है (JDU Politics), जबकि एनडीए के अन्य घटक दल भी फिलहाल इसी मॉडल को आधार मानकर आगे बढ़ने की बात कह रहे हैं (NDA Bihar Politics)। मगर अभी तक आलाकमान ने अपने पत्ते नहीं खोले हैं, सस्पेंस बरकरार रखा है (Bihar Leadership Change)। कुल मिलाकर, लोहिया जयंती का यह कार्यक्रम जहां समाजवादी विचारधारा को याद करने का मंच बना, वहीं बिहार की बदलती राजनीतिक संभावनाओं और नेतृत्व को लेकर नई चर्चाओं को भी हवा दे गया।




