करीब 26 साल तक JDU (Janata Dal United) का अहम चेहरा रहे वरिष्ठ नेता केसी त्यागी ने अब नई राजनीतिक पारी शुरू कर दी है(KC Tyagi JDU resignation) । दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में पार्टी अध्यक्ष चौधरी जयंत सिंह (Jayant Chaudhary) ने उन्हें RLD की सदस्यता दिलाई (KC Tyagi joins RLD)। इस घटनाक्रम को पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में बड़ा बदलाव माना जा रहा है (RLD politics West UP) ।
पश्चिमी यूपी में नई पारी खेलने के संकेत
नीतीश कुमार के राजनीतिक भविष्य को देखते हुए उनका RLD में शामिल होना ना केवल उन्हें सक्रिय राजनीति में बनाए रखने की कोशिश है, बल्कि यह पश्चिमी उत्तर प्रदेश में उनकी एक और पारी खेलने का संकेत भी देता है। केसी त्यागी के RLD में शामिल होने से पार्टी को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में लाभ मिलने की उम्मीद है। वर्तमान में RLD भाजपा के गठबंधन में शामिल है और जयंत चौधरी मोदी सरकार में मंत्री भी हैं। 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव (UP Assembly Election 2027) RLD और भाजपा के मिलकर चुनाव लड़ने की पूरी संभावना है, ऐसे में केसी त्यागी की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है (JDU leader latest news) ।

कई सीटों पर बढ़ेगी सियासी सरगर्मी
मोदीनगर, मुरादनगर और सिवालखास जैसी सीटों पर केसी त्यागी का RLD (Rashtriya Lok Dal) में आना प्रभाव डाल सकता है (West UP politics)। कई वर्तमान विधायकों और भावी प्रत्याशियों का समीकरण बिगाड़ सकता है। यह माना जा रहा है कि केसी त्यागी इन सीटों पर अपने करीबी लोगों को टिकट दिलाने के लिए जोर लगा सकते हैं, जिससे राजनीतिक सरगर्मी और बढ़ जाएगी।
जाट समुदाय के बीच क्या बनेंगे समीकरण?
चौधरी चरण सिंह के बाद उनके पुत्र चौधरी अजित सिंह और अब पौत्र जयंत चौधरी जाट समुदाय के बीच वो मजबूत पकड़ बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, जो चौधरी चरण सिंह के समय थी। भारतीय किसान यूनियन के टिकैत बंधुओं ने भी इस विरासत में सेंध लगाई है। लिहाज़ा, केसी त्यागी का RLD में शामिल होना पार्टी के लिए फायदे का सौदा हो सकता है।

कुछ समय से JDU से दिखने लगी थी दूरी
इसी साल 9 जनवरी को केसी त्यागी ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भारत रत्न देने की मांग की थी। इस बयान के बाद जेडीयू की तरफ से तीखी प्रतिक्रिया आई थी। पार्टी ने यहां तक कह दिया था कि यह स्पष्ट नहीं है कि केसी त्यागी अब पार्टी में हैं भी या नहीं। इसी के बाद से उनके और पार्टी के बीच दूरी बढ़ती नजर आई।



