Wednesday, September 16, 2026
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राघव चड्ढा का ‘डिमोशन’! AAP ने क्यों लिया ये फैसला? क्या पार्टी में केजरीवाल Vs चड्ढा चल रहा है? जानिए Inside Story

संसद में जनहित के मुद्दे उठाकर सुर्खियां बटोरने वाले राघव चड्ढा (Raghav Chadha) अब अपनी ही पार्टी के निशाने पर हैं। आम आदमी पार्टी ने ऐसा फैसला लिया है, जिसने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। आम आदमी पार्टी ने उनका डिमोशन कर दिया है (Raghav Chadha demotion) ।

राघव चड्ढा ने संसद में डिलिवरी बॉय की टाइमिंग, मोबाइल रिचार्ज, टेलीकॉम कंपनियों की डेली डेटा लिमिट, बैंकों के मिनिमम बैलेंस चार्ज और पैटरनिटी लीव जैसे मुद्दे उठाकर सबको चौंका दिया। अचानक से राघव चड्ढ़ा ने अपनी पार्टी की ओर से जुड़े सवालों को संसद में रखना बंद कर दिया। वो जनहित से जुड़े मुद्दे उठाने लगे। जिसकी वजह से उन्हें शोहरत भी खूब मिलने लगी। सोशल मीडिया पर वो पहले से कहीं अधिक पॉप्यूलर हो गए।

यहीं से शुरू हुई विवाद की कहानी (AAP controversy 2026)। कयास लगने लगे कि राघव चड्ढा पार्टी लाइन से अलग चल रहे हैं (AAP internal conflict) । कुछ लोगों ने तो यहां तक कहा कि उन्हें बीजेपी का अप्रत्यक्ष समर्थन मिल रहा है। बीजेपी ही उन्हें इतना बोलने का मौका दे रही है। कयास लगाए जाने लगे कि वो बहुत जल्द बीजेपी में शामिल हो जाएंगे (Raghav Chadha BJP joining rumors)। इन तमाम कयासों, अटकलों और चर्चाओं के बीच आम आदमी पार्टी ने एक चौंकाने वाला फैसला लिया। आम आदमी पार्टी से राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा का डिमोशन कर दिया। AAP ने राघव चड्ढा को राज्यसभा के उपनेता पद से हटा दिया (AAP Rajya Sabha deputy leader removed)। राज्यसभा सांसद अशोक मित्तल नए डिप्टी लीडर बनाए गए। पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को लेटर लिखकर इसकी जानकारी दी। यही नहीं, आम आदमी पार्टी उनसे किस कदर नाराज है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि, राज्यसभा सचिवालय को लेटर लिखकर पार्टी ने राघव चड्ढा को बोलने का मौका नहीं देने को कहा।

यानी मामला अब नाराजगी से काफी आगे बढ़ चुका है। अब सवाल ये है कि आखिर ऐसा क्या हुआ? सूत्रों के मुताबिक तीन बड़ी वजहें सामने आ रही हैं (Delhi political news)

पहली वजह — जब Arvind Kejriwal और Manish Sisodia को शराब मामले में कोर्ट से राहत मिली, तब राघव चड्ढा खामोश रहे।
दूसरी वजह — शादी के बाद Parineeti Chopra के साथ उन्होंने पार्टी से दूरी बना ली और संगठनात्मक गतिविधियों में कम नजर आए।
तीसरी वजह — मुश्किल दौर में पार्टी से दूरी, यहां तक कि वो विदेशी दौरे पर थे।

राघव चड्ढा के इस व्यवहार के उनकी पार्टी छोड़ने की अटकलें भी लगातार लगती रहीं। जब Sanjay Singh से इस बारे में सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि जवाब राघव चड्ढा ही देंगे। इस बयान ने भी कई सवाल खड़े कर दिए।

राघव चड्ढा के राजनीतिक सफर की बात करें तो उन्हें काफी तेजी से सफलता मिली है। उसका राजनीतिक सफरकाफी तेज रहा है

  • 26 साल की उम्र में पार्टी के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष बने
  • 2019 में चुनाव लड़ा
  • 2020 में विधायक बने
  • और 2022 में राज्यसभा पहुंचे
  • कभी Arvind Kejriwal के सबसे करीबी माने जाते थे
  • लेकिन अब दूरियां साफ नजर आ रही हैं।
राघव चड्ढा, आप सांसद

तो क्या राघव चड्ढा की बढ़ती लोकप्रियता ही उनकी मुश्किल बन गई? या फिर पार्टी अनुशासन सबसे बड़ा कारण है? कभी राघव चड्ढा अरविंद केजरीवाल के blue eyed boy हुआ करते थे, लेकिन आज वो उनकी आंखों में खटकने लगे हैं। अब सबसे बड़ा सवाल ये कि क्या राघव चड्ढा पार्टी में रहेंगे? या कोई नया सियासी रास्ता चुनेंगे?

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