अयोध्या। राम मंदिर में कथित दान अनियमितता (Ram Mandir Donation Scam) और VIP दर्शन पास के दुरुपयोग की जांच के बीच श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। ट्रस्ट ने पूर्व महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी अनिल मिश्रा और विशेष आमंत्रित सदस्य गोपाल राव की वे डिजिटल आईडी निष्क्रिय (डीएक्टिवेट) कर दी हैं, जिनके जरिए विशेष या VIP दर्शन पास जारी किए जाते थे (Ram Mandir VIP Pass)। ट्रस्ट का कहना है कि यह फैसला VIP पास व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी बनाने और भविष्य में किसी भी तरह की अनियमितता रोकने के उद्देश्य से लिया गया है।
VIP दर्शन व्यवस्था में बड़ा बदलाव
सूत्रों के अनुसार, कार्यवाहक महासचिव कृष्ण मोहन के नेतृत्व में नए मंदिर प्रशासन ने VIP दर्शन पास जारी करने की प्रक्रिया की समीक्षा की। जांच के दौरान यह सामने आया कि कुछ डिजिटल आईडी का कथित रूप से तय नियमों से अधिक इस्तेमाल किया गया (Ram Temple VIP Darshan Pass)। इसके बाद संबंधित आईडी को तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया गया। अब इन डिजिटल क्रेडेंशियल या व्यक्तिगत सिफारिशों के आधार पर किसी भी श्रद्धालु के लिए ‘सुगम’ या ‘विशिष्ट दर्शन’ पास जारी नहीं किया जा सकेगा। ट्रस्ट का दावा है कि इससे पास जारी करने की पूरी प्रक्रिया अधिक नियंत्रित और पारदर्शी होगी (Ram Temple Financial Irregularities)।
SIT जांच में क्या सामने आया?
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) मंदिर में दान गिनती और वित्तीय अनियमितताओं की जांच कर रही है। जांच के दौरान यह भी पड़ताल की जा रही है कि VIP दर्शन पास जारी करने की व्यवस्था का कहीं व्यावसायिक या अवैध उपयोग तो नहीं हुआ। जांच एजेंसियों के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों में शामिल टिन्नू यादव पर आरोप है कि उसने VIP पास जारी करने की व्यवस्था में मौजूद खामियों का फायदा उठाकर बड़ी संख्या में अनधिकृत पास जारी किए। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि इस पूरे नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल थे। हालांकि, इन आरोपों की जांच अभी जारी है और अंतिम निष्कर्ष आना बाकी है।
दान चोरी मामले से जुड़ा पूरा विवाद
विवाद की शुरुआत जून के पहले सप्ताह में हुई, जब राम मंदिर में दान की गिनती के दौरान कथित वित्तीय अनियमितताओं की जानकारी सामने आई। ट्रस्ट की सिफारिश पर उत्तर प्रदेश सरकार ने SIT गठित की। प्रारंभिक जांच में गबन के संकेत मिलने के बाद FIR दर्ज की गई और दान गिनती प्रक्रिया से जुड़े आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया। इसके बाद मंदिर प्रशासन में भी बड़े बदलाव किए गए। पूर्व महासचिव चंपत राय ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया, जिसे 6 जुलाई को स्वीकार कर लिया गया। उनकी जगह पूर्व भारतीय वन सेवा (IFS) अधिकारी कृष्ण मोहन को कार्यवाहक महासचिव बनाया गया। ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने भी इस्तीफा दिया, जबकि विशेष आमंत्रित सदस्य गोपाल राव को उनकी जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया गया।
क्या चंपत राय और अनिल मिश्रा आरोपी हैं?
अब तक दर्ज FIR में चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव को आरोपी नहीं बनाया गया है। हालांकि, विपक्षी दलों और कुछ सामाजिक संगठनों ने मंदिर प्रशासन में उनकी जिम्मेदारियों को देखते हुए जवाबदेही तय करने की मांग की है। दूसरी ओर, जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि VIP पास प्रणाली का संचालन किन स्तरों तक प्रभावित हुआ और क्या किसी वरिष्ठ स्तर पर प्रशासनिक चूक हुई थी।
ट्रस्ट का संदेश क्या है?
डिजिटल आईडी निष्क्रिय करने का फैसला यह संकेत देता है कि ट्रस्ट अब VIP दर्शन व्यवस्था को पूरी तरह डिजिटल निगरानी और जवाबदेही के दायरे में लाना चाहता है। आने वाले दिनों में VIP पास जारी करने की नई व्यवस्था और अधिक सख्त किए जाने की संभावना भी जताई जा रही है।



