Tuesday, May 26, 2026
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धर्म बदला तो खत्म हो जाएगा अनुसूचित जाति का दर्जा, धर्म परिवर्तन पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

नई दिल्ली: देश में धर्म परिवर्तन और आरक्षण से जुड़े मुद्दे पर एक महत्वपूर्ण फैसला देते हुए Supreme Court of India ने मंगलवार को Andhra Pradesh High Court के आदेश को बरकरार रखा। अदालत ने साफ कहा कि यदि कोई व्यक्ति हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म को अपनाता है और उसका सक्रिय रूप से पालन करता है, तो उसे अनुसूचित जाति समुदाय का सदस्य नहीं माना जा सकता (Supreme Court verdict on religious conversion)।

संविधान के 1950 आदेश का हवाला

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में Constitution (Scheduled Caste) Order, 1950 का उल्लेख (Constitution Scheduled Caste Order 1950) करते हुए कहा कि इसके खंड-3 में यह स्पष्ट रूप से निर्धारित है कि जिन धर्मों का इसमें उल्लेख नहीं है, उनमें धर्म परिवर्तन करने पर व्यक्ति का अनुसूचित जाति का दर्जा समाप्त हो जाता है (SC status after conversion India)। ऐसे में वह व्यक्ति आरक्षण, कानूनी संरक्षण या अन्य वैधानिक लाभों का दावा नहीं कर सकता। अदालत ने यह भी कहा कि यह प्रतिबंध पूर्णतः लागू है और इसमें किसी प्रकार का अपवाद नहीं माना जा सकता। कोई व्यक्ति एक साथ किसी अन्य धर्म को स्वीकार कर उसका पालन करते हुए अनुसूचित जाति का लाभ नहीं ले सकता (Religious conversion caste reservation)।

सोशल मीडिया पोस्ट

पादरी के केस से जुड़ा है मामला

दरअसल यह मामला एक ऐसे व्यक्ति से जुड़ा था, जिसने ईसाई धर्म अपना लिया था और पादरी के रूप में कार्य कर रहा था। इसके बावजूद उसने अपने ऊपर कथित हमले के मामले में आरोपियों के खिलाफ SC/ST एक्ट (SC/ST Act case Supreme Court) के तहत केस दर्ज कराया था (Pastor SC/ST protection case)। आरोपियों ने इस मुकदमे को अदालत में चुनौती देते हुए कहा कि संबंधित व्यक्ति धर्म परिवर्तन कर चुका है और सक्रिय रूप से ईसाई धर्म का पालन कर रहा है, इसलिए वह अनुसूचित जाति के कानूनी संरक्षण का दावा नहीं कर सकता (Reservation law after religion change)।

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट

हाईकोर्ट के फैसले को मिली ‘सुप्रीम’ मुहर

इस पर सुनवाई के बाद आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने भी माना था कि धर्म परिवर्तन के बाद अनुसूचित जाति का दर्जा लागू नहीं रहेगा (Andhra Pradesh High Court judgment)। अब सुप्रीम कोर्ट ने भी इसी आदेश को सही ठहराते हुए स्पष्ट कर दिया है कि संविधान के 1950 के आदेश के प्रावधान पूरी तरह प्रभावी हैं। यह फैसला धर्म परिवर्तन और आरक्षण नीति से जुड़े मामलों में भविष्य के लिए महत्वपूर्ण कानूनी मिसाल माना जा रहा है (Scheduled Caste eligibility law India)।

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