Jagannath Temple: भारत के पवित्र स्थलों में से एक है ओडिशा के पुरी में स्थिति जगन्नाथ मंदिर। जो चार धामों में से एक है। जगन्नाथ मंदिर में भगवान जगन्नाथ अपने बड़े भाई बलभद्र और अपनी बहन सुभद्र के साथ विराजमान है। पौराणिक मान्यातों के अनुसार भगवान जगन्नाथ विष्णु जी के 8वें अवतार के रुप में भगवान श्री कृष्ण को समर्पित माने गए हैं। पुरी में स्थिति जगन्नाथ मंदिर रहस्यों और किस्सों का अद्भुत संगम है। indianviewer.com अपने इस लेख के जरिए आपको मंदिर से जुड़े रहस्य और किस्सों के बारे में बताएगा।

भगवान जगन्नाथ मंदिर से जुड़े रहस्य
एक या दो नहीं भगवान जगन्नाथ मंदिर से जुड़े कई रहस्य हैं, यह मंदिर अपनी भव्य रथ यात्रा, मंदिर में बनने वाला महाप्रसाद, और मंदिर में प्रवेश करने वाली तीसरी सीढ़ी जैसे तमाम रहस्यों से भरा है। लेकिन जगन्नाथ मंदिर से जुड़ी दो ऐसी परंपराएं हैं, जिनका पालन ना करने पर 18 सालों के लिए भगवान जगन्नाथ का मंदिर बंद करना पड़ सकता है।

मंदिर के उपर लगे ध्वज को ना बदलने पर: मंदिर के मुख्य शिखर पर एक ध्वज लहराता है। जो 45 मंजिला ऊंची इमारत पर लगा है। जिसे हर दिन बदला जाता है और वो हवा के विपरित दिशा में लहराता रहता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार अगर किसी भी दिन इस ध्वज को बदलने की परंपरा का पालन नहीं किया गया तो मंदिर 18 वर्षों के लिए बंद हो जाएगा।

रसोई में महाप्रसाद को पकाने वाली अग्नि का बुझना: जगन्नाथ मंदिर की रसोई में महाप्रसाद पकाया जाता है। प्रसाद को पकाने वाले चूल्हे की अग्नि कभी भी बुझती नहीं है। वो लगातार जलती रहती है। अगर वो अग्नि बुझ जाए तो मंदिर को 18 सालों के लिए बंद करके मंत्रों और शुद्धिकरण करके भी खोला जाएगा।

पौराणिक कथाओं के अनुसार जगन्नाथ मंदिर में विराजमान भगवान की मूर्ति में आज भी भगवान श्री कृष्ण का दिल धड़कता है। लोग दूर-दूर से यहां दर्शन करने आते है। और ऐसी मान्यता है कि अगर जीवन में एक बार भी भगवान जगन्नाथ के दर्शन कर ले तो उसके सारे कष्ट मिट जाते है।



