पश्चिम बंगाल में नई सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री Suvendu Adhikari लगातार बड़े फैसले ले रहे हैं (Bengal government Big Decisions)। सरकार के शुरुआती दिनों में ही ऐसे कई आदेश जारी किए गए हैं, जिनका सीधा असर शिक्षा, सीमा सुरक्षा और नागरिकता से जुड़े मुद्दों पर पड़ रहा है। सबसे ज्यादा चर्चा तीन फैसलों को लेकर हो रही है। मदरसों में ‘वंदे मातरम’ अनिवार्य करना, CAA लागू करना और सीमा से जुड़े इलाकों में BSF को जमीन सौंपना।
मदरसों में ‘वंदे मातरम’ अनिवार्य
पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य के सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त और मान्यता प्राप्त मदरसों में सुबह की प्रार्थना सभा के दौरान ‘वंदे मातरम’ गाना अनिवार्य कर दिया है (Vande Mataram in Madrasas) । आदेश के मुताबिक यह नियम तुरंत प्रभाव से लागू होगा और सभी संस्थानों को इसकी पालन रिपोर्ट भी देनी होगी। रिपोर्ट्स के अनुसार, इससे पहले कई मदरसों में राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के साथ अन्य सांस्कृतिक और धार्मिक गीत गाए जाते थे। अब सरकार ने राष्ट्रभक्ति को बढ़ावा देने के नाम पर ‘वंदे मातरम’ को अनिवार्य किया है। विपक्ष इस फैसले को राजनीतिक एजेंडा बता रहा है, जबकि भाजपा इसे राष्ट्रहित का कदम बता रही है।
बंगाल में CAA कर दिया गया लागू
पश्चिम बंगाल में नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) लागू कर दिया गया है (CCA implemented in Bengal) । मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने अवैध घुसपैठियों को राज्य में न रखने की चेतावनी दी है। 31 दिसंबर 2024 तक आए योग्य शरणार्थियों को प्रक्रिया में कोई परेशानी नहीं होगी, जबकि अवैध प्रवासियों को गिरफ्तार कर BSF के हवाले किया जाएगा। सरकार के मुताबिक, पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए उन गैर-मुस्लिम शरणार्थियों को लाभ मिलेगा जो तय समयसीमा से पहले भारत आए थे। दूसरी ओर, जिन लोगों के दस्तावेज संदिग्ध पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई और डिपोर्टेशन की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
BSF को जमीन सौंपने का फैसला
सीमा सुरक्षा को लेकर भी बंगाल सरकार ने बड़ा फैसला लिया है (BSF Border Security)। सरकार ने भारत-बांग्लादेश सीमा पर फेंसिंग का काम तेज करने के लिए सैकड़ों एकड़ जमीन सीमा सुरक्षा बल यानी Border Security Force को सौंपने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि लंबे समय से जमीन विवाद और प्रशासनिक अड़चनों के कारण कई इलाकों में बॉर्डर फेंसिंग अधूरी थी। सरकार का दावा है कि इससे घुसपैठ और सीमा पार अपराधों पर रोक लगेगी। वहीं विपक्ष का आरोप है कि सरकार सीमा सुरक्षा के मुद्दे को राजनीतिक ध्रुवीकरण के लिए इस्तेमाल कर रही है।
शुरुआती फैसलों से बदली बंगाल की राजनीति
सुवेंदु अधिकारी सरकार ने सत्ता संभालने के कुछ ही दिनों में कई बड़े फैसले लिए हैं। इनमें आयुष्मान भारत योजना लागू करना, महिलाओं के लिए फ्री बस यात्रा, धर्म आधारित योजनाओं में बदलाव और OBC सूची की समीक्षा जैसे कदम भी शामिल हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नई सरकार शुरुआत से ही अपनी वैचारिक और प्रशासनिक प्राथमिकताएं स्पष्ट करना चाहती है।
विपक्ष ने उठाए सवाल
विपक्षी दलों का कहना है कि सरकार विकास और रोजगार जैसे मुद्दों से ध्यान हटाकर धार्मिक और पहचान आधारित राजनीति को बढ़ावा दे रही है (Bengal Controversy)। वहीं भाजपा समर्थकों का कहना है कि ये फैसले राष्ट्रवाद, सुरक्षा और प्रशासनिक सुधार की दिशा में जरूरी कदम हैं। आने वाले दिनों में इन फैसलों को लेकर बंगाल की राजनीति और गरमा सकती है।


