जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में जैश-ए-मोहम्मद के तीन और आतंकी ढेर हुए हैं। भारतीय सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ की टीम ने तीनों आतंकवादियों को मार गिराया। ये कार्रवाई ऑपरेशन त्राशी-1 के तहत की गई। इस ऑपरेशन में मारे गए तीन आतंकियों में एक मोस्ट वांटेड कमांडर सैफुल्लाह भी शामिल था। 326 दिनों तक चले इस हाई एल्डीट्यूड ऑपरेशन में अबतक 7 खतरनाक आतंकवादी मारे जा चुके हैं।

इस कार्रवाई में भारतीय सेना के जवान तो सुरक्षित हैं। लेकिन, सेना का बहादुर स्निफर डॉग, टायसन घायल हो गया। दरअसल टायसन के जरिए ही इस एंटी-टेरर ऑपरेशन की शुरुआत की गई थी। टायसन इंडियन आर्मी के 2 पैरा (स्पेशल फोर्सेज) में तैनात है और ये एलीट जर्मन शेफर्ड है। ऑपरेशन के दौरान ट्रेंड आर्मी डॉग टायसन ने बहुत बहादुरी दिखाई। टायसन ने ही सेना को जैश-ए-मोहम्मद के ठिकाने तक पहुंचाया। टायसन आतंकियों की लोकेशन का पता लगाने के लिए छतरू के ऊबड़-खाबड़ इलाके में बने ठिकाने में रेंगकर घुसा। इस दौरान टायसन की आहट सुनकर आतंरकी भी सजह हो गए और उन्होंने टायसन को गोली मार दी। घायल होने के बावजूद टायसन डटा रहा। टायसन ने ही आतंकियों के सटीक ठिकाने का पता लगाया था, जिसके बाद सुरक्षाबलों ने आतंकियों का एनकाउंटर कर दिया।

इस ऑपरेशन के बाद गोली लगने से घायल हुए टायसन को इलाज के लिए एयरलिफ्ट कर उधमपुर के अस्पताल ले जाया गया। बताया जा रहा है कि टायसन को मेडिकल ट्रीटमेंट दिया गया है और अब वो खतरे से बाहर है। टायसन तेजी से रिकवर कर रहा है। लोग टायसन के जल्द ठीक होने की कामना कर रहे हैं। टाइसन कई बड़े ऑपरेशनों में अहम भूमिका निभा चुका है। सर्च ऑपरेशन के दौरान संदिग्ध ठिकानों की पहचान करना, विस्फोटक सामग्री का पता लगाना और आतंकियों की मौजूदगी की सटीक सूचना देना ये सब उसकी खास ट्रेनिंग का हिस्सा है। जैश के आतंकी आदिल को मारने में टाइसन ने ही जवानों की मदद की थी। सुरक्षाबलों के साथ सबसे आगे रह कर उसने आतंकी आदिल के हाइडआउट तक पहुंचने और उसको मारने में मदद की थी



