Mamata Banerjee’s controversial statement during the protest against SIR: कोलकाता में SIR के खिलाफ ममता बनर्जी का प्रोटेस्ट जारी है। इस बीच उनके एक बयान ने विवाद का रूप ले लिया है। ममता बनर्जी ने प्रोटेस्ट के दौरान मंच से कहा कि, “हम लोग हैं ना इसलिए आप सब लोग अच्छे से हैं। अगर वो दिन आया जब हम लोग सत्ता में नहीं रहे तो एक सेकेंड लगेगा, एक सुमदाय को एक सेकेंड लगेंगे और वो 12 बजा देगा। अगर आप अपना 13 नहीं बजवाना चाहते तो बीजेपी के झूठे प्रचार में मत फंसिएगा।
ममता बनर्जी के बयान पर भड़की बीजेपी
सवाल ये उठता है कि किसी समुदाय को किस समुदाय विशेष से डरकर रहने की जरूरत है, और क्यों? गौरतलब है कि, इससे पहले इसी मंच से TMC की सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा था कि, ” जो आज तृणमूल के साथ नहीं है, वो बंगाली ही नहीं है, उसे बंगाल में रहने का भी अधिकार नहीं है।” TMC की तरफ से आए इन दो बयानों के बाद सियासी तूफान खड़ा हो गया है। BJP ने आरोप लगाया है कि, ममता बनर्जी और उनकी पार्टी घुसपैठियों को बचाना चाहती है इसलिए SIR का विरोध कर रही है। बीजेपी ने आरोप लगाया ममता बनर्जी वही जुबान बोल रही है, जो ओवैसी बोलते हैं।
पश्चिम बंगाल में क्या है चुनावी समीकरण?
पश्चिम बंगाल में मुस्लिम समुदाय की आबादी 37 प्रतिशत के करीब है। वहां इस समुदाय के 3 करोड़ से अधिक लोग हैं। मुर्शिदाबाद, मालदा और उत्तरी दिनाजपुर में तो मुस्लिम बहुसंख्यक हैं। सबसे ज्यादा गौर करने वाली बात ये कि राज्य की 294 विधानसभा सीटों में से 131 विधानसभा सीटों पर मुस्लिम आबादी का अच्छा खासा प्रभाव है। मतलब यह कि इन सीटों पर मुस्लिम आबादी किसी भी उम्मीदवार को जितवाने और हरवाने की कुव्वत रखती है। बंगाल में ममता बनर्जी सरकार पर तुष्टिकरण के आरोप लगते रहे हैं, लिहाज़ा कयास लगाए जा रहे हैं कि इसी के मद्देनजर टीएमसी नैरेटिव सेट करने की कोशिश कर रही हैं। राजनीतिक पंडितों का तो यह भी मानना है कि, चुनाव से पूर्व इस तरह के बयान आना शुभ संकेत नहीं है।

बंगाल में चुनाव के दौरान के डराने वाले आंकड़े
बंगाल की चुनावी राजनीति का इतिहास रहा है, हिंसा, आगजनी, बमबारी और हत्याकांड। NCRB के आंकड़ों के मुताबिक पश्चिम बंगाल में औसतन प्रति वर्ष 20 राजनीतिक हत्याएं होती हैं। 2023 पंचायत चुनाव में हिंसा के कारण 15 से अधिक मौतें हुई थीं। 2021 के विधानसभा चुनाव के बाद की हिंसा में 47 से अधिक राजनीतिक हत्याएं दर्ज की गईं। 2018 में पश्चिम बंगाल में 12 राजनीतिक हत्याओं को अंजाम दिया गया। 2021 में 8 चरण तो, 2016 में 6 चरणों में विधानसभा के चुनाव कराए गए थे, इस सोच के साथ की हिंसा नहीं होगी। लेकिन, हर बार बंगाल में चुनाव के दौरान हिंसा की खबरें आईं। इस बार केंद्र सरकार और इलेक्शन कमिशन क्या कदम उठाती है इसपर सबकी नजरें होंगी।



