पश्चिम बंगाल की सियासत में बड़ा धमाका हुआ है। ममता बनर्जी की पार्टी TMC में अब सिर्फ विधायक ही नहीं, सांसद भी बगावत के मूड में नजर आ रहे हैं (Trinamool Congress Crisis)। दावा है कि TMC के 20 सांसद पार्टी लाइन से अलग होकर बाकी सुर अपनाए हुए हैं (TMC Internal Conflict), लेकिन इस पूरे सियासी संग्राम का सबसे बड़ा नाम है पूर्व क्रिकेटर और TMC सांसद यूसुफ पठान (MP cricketer Yusuf Pathan)। ऐसे में सवाल ये कि क्या यूसुफ पठान ने ममता बनर्जी का साथ छोड़ दिया है? क्या वो बागी खेमे के साथ हैं? और आखिर महुआ मोइत्रा ने उन पर इतना बड़ा हमला क्यों बोला?
यूसुफ पठान को लेकर काकोली घोष का बड़ा दावा
दरअसल, TMC की वरिष्ठ सांसद काकोली घोष दस्तीदार (Kakoli Ghosh Dastidar) ने दावा किया है कि पार्टी के कई सांसद मौजूदा नेतृत्व से नाराज हैं और उन्होंने लोकसभा स्पीकर को पत्र लिखकर सदन में अलग बैठने की इच्छा जाहिर की है। काकोली घोष का दावा है कि उनके साथ TMC के 28 में से 20 सांसद हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी कहा कि बहरामपुर से सांसद यूसुफ पठान भी इस बागी खेमे का हिस्सा हैं और NDA को समर्थन देने के पक्ष में हैं। काकोली घोष के इस दावे ने बंगाल की सियासत में भूचाल ला दिया। हालांकि यूसुफ पठान की ओर से अभी तक इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन उनके नाम को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।
महुआ मोइत्रा ने यूसुफ पठान पर बोला तीखा हमला
TMC की तेजतर्रार सांसद महुआ मोइत्रा ने भी यूसुफ पठान को लेकर तीखा हमला बोला है। महुआ ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि,
“क्या यूसुफ पठान दिल्ली इसलिए जा रहे हैं क्योंकि उन्हें अमित शाह का फोन आया है? उन्होंने कहा कि अगर किसी सांसद को बीजेपी में जाना है तो पहले उसे अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए और फिर बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़कर जनता का नया जनादेश लेना चाहिए”।
महुआ मोइत्रा (Mahua Moitra) ने यह भी कहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव में TMC के सभी सांसद पार्टी के चुनाव चिन्ह और ममता बनर्जी के नेतृत्व में जीते थे। ऐसे में जनता का जनादेश किसी दूसरे राजनीतिक गठबंधन के लिए नहीं माना जा सकता। महुआ मोइत्रा ने यूसुफ पठान पर निशाना साधा और कहा कि हमारे जिले ने आपको भारी बहुमत से जिताया है। थोड़ी शर्म करो और थोड़ा साहस दिखाओ।
अधीर रंजन चौधरी का छलका पुराना दर्द
इस विवाद के बीच कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी भी मैदान में उतर आए हैं। अधीर ने ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) पर हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि उन्हें हराने के लिए TMC ने ध्रुवीकरण की राजनीति का सहारा लिया था। उन्होंने दावा किया कि ममता बनर्जी ने बहरामपुर सीट पर उन्हें हराने के लिए विशेष रणनीति के तहत यूसुफ पठान को उम्मीदवार बनाया था।
यूसुफ पठान से ही हारे थे अधीर रंजन चौधरी
दरअसल बहरामपुर लोकसभा सीट अधीर रंजन चौधरी का मजबूत गढ़ मानी जाती थी, इस सीट पर अधीर रंजन चौधरी ही जीतते रहे हैं। इस सीट पर मुस्लिम आबादी करीब 50-51 फीसदी है। इस सीट पर 2024 में TMC का खाता तब खुला जब 2024 के चुनाव में ममता बनर्जी ने गुजरात से पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान को उम्मीदवार बनाया था। यूसुफ ने चुनाव में अधीर रंजन चौधरी को हराकर TMC को इस सीट पर पहली जीत दिलाई थी। उन्होंने अधीर रंजन चौधरी को उनके ही गढ़ में हरा दिया (West Bengal Politics)।
यूसुफ पठान की खामोशी के पीछे क्या है?
अब जबकि TMC में बगावत की चर्चा तेज है और यूसुफ पठान का नाम भी इस विवाद में उछल रहा है, राजनीतिक गलियारों में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर यूसुफ पठान किसके साथ खड़े हैं? क्या वह ममता बनर्जी के साथ बने रहेंगे या फिर बागी खेमे का हिस्सा बनेंगे? फिलहाल इन सवालों के जवाब यूसुफ पठान की ओर से किसी आधिकारिक बयान के बाद ही साफ हो पाएंगे। लेकिन इतना तय है कि TMC के भीतर जारी यह सियासी संग्राम आने वाले दिनों में बंगाल की राजनीति को और गर्माने वाला है (Bengal Political Crisis)।



