अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से महासचिव पद छोड़ने के बाद चंपत राय ने पहली बार राम भक्तों के नाम एक भावनात्मक पत्र जारी किया है। इस पत्र में उन्होंने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को अनुचित बताते हुए कहा कि उन्होंने फिलहाल मौन रहने का निर्णय लिया है, लेकिन जैसे ही विशेष जांच दल (SIT) की अंतिम रिपोर्ट सार्वजनिक होगी, वह एक-एक आरोप का क्रमवार जवाब देंगे और पूरा सच देश के सामने रखेंगे।
चंपत राय की रामभक्तों के नाम चिट्ठी
राम मंदिर परिसर के दानपात्र से चढ़ावा चोरी के मामले ने बीते कुछ दिनों से देश की राजनीति और धार्मिक हलकों में हलचल मचाई हुई है। विपक्ष लगातार इस मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार और ट्रस्ट पर सवाल उठा रहा है, जबकि दूसरी ओर ट्रस्ट ने जांच पूरी होने तक संयम बरतने की बात कही है। इसी बीच चंपत राय का यह पत्र पूरे घटनाक्रम में नया राजनीतिक और सामाजिक संदेश माना जा रहा है।
पत्र में क्या बोले चंपत राय?
अपने पत्र में चंपत राय ने लिखा कि 6 जून 2026 को श्रीराम जन्मभूमि मंदिर परिसर के दानपात्र की गणना के दौरान हुई कथित चोरी की घटना के बाद कई तरह की चर्चाएं और आरोप लगाए गए। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत रूप से उन्हें भी निशाना बनाया गया, जबकि उन्होंने इस पूरे मामले पर सार्वजनिक प्रतिक्रिया देने के बजाय मौन धारण करना उचित समझा। उन्होंने लिखा कि मंदिर ट्रस्ट के कामकाज को समझने के लिए गठित SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट अब सार्वजनिक हो चुकी है, जबकि यह रिपोर्ट मूल रूप से गोपनीय थी। इसके बावजूद वह अंतिम जांच रिपोर्ट आने तक कोई विस्तृत टिप्पणी नहीं करेंगे। उनका कहना है कि अंतिम रिपोर्ट के बाद वह सभी मुद्दों पर तथ्यों के आधार पर विस्तार से जवाब देंगे और वास्तविक स्थिति सभी के सामने होगी।
अपने सार्वजनिक जीवन का भी किया उल्लेख
चंपत राय ने पत्र में अपने लंबे संगठनात्मक जीवन का जिक्र करते हुए लिखा कि उन्हें अक्टूबर 1991 में संगठन द्वारा अयोध्या भेजा गया था और पिछले करीब 45 सालों का उनका प्रचारक जीवन पूरी तरह सार्वजनिक रहा है। उन्होंने कहा कि जहां-जहां उन्होंने कार्य किया, उनका जीवन किसी खुली पुस्तक की तरह रहा है। अंत में उन्होंने सभी राम भक्तों और शुभचिंतकों को आदरपूर्वक नमन किया।
चंपत राय ने इस्तीफा क्यों दिया?
दानपात्र से चढ़ावे की कथित चोरी सामने आने के बाद चंपत राय ने कहा था कि जब तक इस घटना के जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उन्हें कानून के दायरे में नहीं लाया जाता, तब तक उनके लिए महासचिव पद पर बने रहना उचित नहीं होगा। उन्होंने इस घटना को बेहद पीड़ादायक और शर्मनाक बताते हुए कहा था कि इससे केवल ट्रस्ट ही नहीं, बल्कि करोड़ों राम भक्तों की भावनाएं भी आहत हुई हैं। इसके बाद उन्होंने अपने पद से इस्तीफा सौंप दिया। हाल ही में हुई श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक में उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया। ट्रस्ट ने उनके साथ ट्रस्टी अनिल मिश्रा का इस्तीफा भी मंजूर कर लिया।
राजनीतिक हलकों में तेज हुई चर्चा
चंपत राय के इस्तीफे और अब सामने आए उनके पत्र ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। विपक्ष लगातार इस पूरे मामले में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहा है, जबकि ट्रस्ट का कहना है कि जांच पूरी होने से पहले किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। अब सभी की नजर SOT की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी है, क्योंकि उसी के आधार पर इस पूरे विवाद की दिशा और राजनीतिक असर तय होने की संभावना है। उधर, चंपत राय ने अपने पत्र के जरिए स्पष्ट संकेत दिया है कि फिलहाल वह सार्वजनिक आरोप-प्रत्यारोप से दूरी बनाए रखेंगे, लेकिन अंतिम जांच रिपोर्ट आने के बाद पूरे घटनाक्रम पर विस्तार से अपनी बात रखेंगे। ऐसे में यह मामला आने वाले दिनों में धार्मिक ही नहीं, बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बना हुआ है।



