देहरादून/चमोली। बद्रीनाथ धाम में चढ़ावे की हेराफेरी का मामला (Badrinath donation scam) अब सिर्फ दान राशि तक सीमित नहीं रह गया है। जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, वैसे-वैसे ऐसे दस्तावेज सामने आए हैं, जिन्होंने चौंका दिया है। दस्तावेजों में कई अतिथियों के नाम पर फर्जी बिल बनाकर भुगतान दिखाए जाने का दावा किया गया है (BKTC fake bills)। जांच रिपोर्ट में पूर्व अधिकारियों के फैसलों, एडवांस भुगतान, गेस्ट हाउस के बिल और निजी खर्चों को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं (Badrinath temple fraud)। जबकि जिन लोगों को ठहराने के नाम पर ये बिल बनाए गए हैं, उनका कहना है कि उन्होंने तो अपना पूरा खर्च खुद ही उठाया है। मामले में एक कर्मचारी के खिलाफ पहले ही FIR दर्ज हो चुकी है और जांच जारी है।
फर्जी बिलों के जरिए भुगतान का आरोप
जांच में सामने आए दस्तावेजों के अनुसार, कई गेस्ट हाउस और आवासों के नाम पर लाखों रुपये के भुगतान दर्ज किए गए (Badrinath guest house bills)। इनमें न्यू आगरा हाउस, जीएमवीएन, पंजाब सिंध आवास, पीक सिटी भवन, बीकानेर हाउस, गायत्री भवन और राजस्थान भवन जैसे ठहरने के स्थानों के बिल शामिल बताए गए हैं। जांच समिति अब इन भुगतानों से जुड़े सभी दस्तावेजों का मिलान कर रही है कि वास्तव में ये भुगतान किस आधार पर किए गए और इसका फायदा किसे मिला।
जिनके नाम पर खर्च दिखाया, उन्होंने किया इनकार
जांच के दौरान सामने आई सूची में कुछ जनप्रतिनिधियों और अन्य लोगों के नाम पर भी खाने और ठहराने के नाम पर खर्च का दावा किया गया। जबकि संबंधित लोगों ने ये साफ कहा है कि उन्होंने मंदिर समिति से कोई पैसा नहीं लिया और यात्रा का पूरा खर्च स्वयं या संबंधित कंपनी ने उठाया था। इसी कारण जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि मेहमानों (VIP) ने भुगतान नहीं लिया तो बिल किस आधार पर बनाए गए।
पूर्व अधिकारियों के फैसलों पर भी उठे सवाल
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि तत्कालीन अधिकारियों द्वारा कुछ मामलों में नियमों के विपरीत अग्रिम भुगतान स्वीकृत किए गए। आरोप है कि लंबित बिलों के भुगतान के बजाय एडवांस राशि जारी की गई। हालांकि संबंधित पक्ष का कहना है कि उस समय बोर्ड का गठन नहीं हुआ था और यात्रा संबंधी आवश्यकताओं के चलते निर्णय लिया गया था। बाद में बोर्ड बैठक में आय-व्यय को मंजूरी दिए जाने की बात भी सामने आई है।
कंपनी ने उठाया था मेहमानों का खर्च
जांच के दौरान एक तथ्य ये भी सामने आया कि कुछ अतिथियों का पूरा खर्च संबंधित कंपनी द्वारा वहन किया गया था। इसके बावजूद उनके नाम पर खर्च दर्ज होने के कारण जांच समिति अब भुगतान के वास्तविक स्रोत और रिकॉर्ड का मिलान कर रही है। यदि दस्तावेजों में अंतर पाया जाता है तो जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जा सकती है (fake payment in Badrinath)।
पहले ही दर्ज हो चुकी है FIR
इस पूरे विवाद की शुरुआत चढ़ावे की कथित हेराफेरी के आरोपों से हुई थी (Badrinath donation theft)। आंतरिक जांच में प्रारंभिक अनियमितताएं मिलने के बाद बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के अध्यक्ष कार्यालय में तैनात निजी सहायक प्रमोद नौटियाल को निलंबित किया जा चुका है। उसके खिलाफ FIR दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू कर दी गई। सरकार ने भी मामले की स्वतंत्र जांच के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित की है, जबकि सीसीटीवी फुटेज और वित्तीय रिकॉर्ड की गहन पड़ताल की जा रही है।
जांच का अगला चरण
अब जांच एजेंसियां फर्जी बिल, एडवांस भुगतान, अतिथियों के नाम पर दर्ज खर्च और संबंधित वित्तीय दस्तावेजों का क्रॉस-वेरिफिकेशन कर रही हैं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो मामला केवल चढ़ावे की कथित चोरी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वित्तीय अनियमितताओं और रिकॉर्ड में हेरफेर की दिशा में भी बड़ी कार्रवाई हो सकती है। फिलहाल जांच जारी है और अंतिम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।



