मुंबई/ठाणे: महाराष्ट्र शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) पेपर लीक (Maharashtra TET Paper Leak) मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे ऐसे खुलासे हो रहे हैं जो सिर्फ एक पेपर लीक तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सरकारी परीक्षाओं की पूरी सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहे हैं। ठाणे पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) की जांच में सामने आया है कि आगरा स्थित जिस प्रिंटिंग प्रेस (Agra Printing Press) में महाराष्ट्र TET (Maharashtra Teacher Eligibility Test) के प्रश्नपत्र छपे थे, वहां सालों से सुरक्षा व्यवस्था बेहद कमजोर थी। हैरानी की बात यह है कि यही प्रिंटिंग प्रेस पिछले 20 से 30 साल से कई सरकारी और गोपनीय परीक्षाओं के प्रश्नपत्र छापती रही है (Printing Press Security Lapse) ।
सिर्फ एक पेपर लीक नहीं, पूरी व्यवस्था पर सवाल
SIT के अनुसार, दिल्ली मुख्यालय वाली महिम पत्रण लिमिटेड की आगरा यूनिट को महाराष्ट्र शिक्षा विभाग की कई परीक्षाओं के प्रश्नपत्र छापने का काम मिलता रहा है। इसके अलावा देश के विभिन्न राज्यों की कई संवेदनशील परीक्षाओं के पेपर भी इसी प्रेस में छपते रहे हैं। जांच में सबसे बड़ा खुलासा यह हुआ कि इतनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाने वाली इस प्रिंटिंग प्रेस में सुरक्षा के बुनियादी मानकों का भी पालन नहीं किया जा रहा था। कई संवेदनशील क्षेत्रों में CCTV कैमरे तक नहीं लगे थे। कर्मचारियों की एंट्री और एग्जिट की प्रभावी जांच नहीं होती थी और गोपनीय दस्तावेजों की निगरानी भी बेहद कमजोर थी। SIT का मानना है कि इन्हीं खामियों का फायदा उठाकर प्रश्नपत्र बाहर निकाले गए।
प्रेस के अंदर से बाहर तक कैसे पहुंचा पेपर?
जांच एजेंसियों के मुताबिक, कंपनी के कर्मचारी बाबूलाल कुशवाहा और नरेश महावर उर्फ निक्की ने कथित तौर पर प्रश्नपत्र प्रेस से बाहर निकाले। इसके बाद इन्हें कंपनी के पूर्व कर्मचारी सोनू कुमार दिवाकर तक पहुंचाया गया। आरोप है कि सोनू ने प्रश्नपत्रों की फोटोकॉपी करवाई और मुख्य आरोपी बिजेंद्र कुमार गुप्ता के निर्देश पर इन्हें दूसरे लोगों तक पहुंचाया, जिन्होंने महाराष्ट्र में अभ्यर्थियों को बेचने की तैयारी की। यानी पेपर लीक की पूरी प्रक्रिया प्रेस के अंदर से शुरू होकर दलालों और खरीदारों तक पहुंचने वाले एक संगठित नेटवर्क के जरिए संचालित की गई।
पूर्व कर्मचारी की भूमिका ने बढ़ाई जांच की दिशा
इस मामले में एक और अहम तथ्य सामने आया है। गिरफ्तार आरोपी सोनू कुमार दिवाकर वर्ष 2018 में कंपनी छोड़ चुका था, लेकिन इसके बावजूद वह मुख्य आरोपी बिजेंद्र गुप्ता के लगातार संपर्क में था। भिवंडी अदालत में सरेंडर करने के बाद SIT ने उसे गिरफ्तार किया और अदालत ने 2 अगस्त तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है। SIT का मानना है कि नौकरी छोड़ने के बाद भी कंपनी से जुड़े लोगों के साथ उसके संपर्क ने इस पूरे नेटवर्क को सक्रिय बनाए रखा।
सरकारी कर्मचारी और 60 अभ्यर्थियों का कनेक्शन
जांच के दौरान पुणे के एक फरार संदिग्ध का नाम भी सामने आया है, जो महाराष्ट्र सरकार के एक विभाग में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी बताया जा रहा है। SIT के अनुसार, उसने लीक प्रश्नपत्र हासिल करने में रुचि दिखाई थी। पुलिस को जांच में यह भी पता चला है कि उसके संपर्क में लगभग 60 अभ्यर्थी थे, जो कथित तौर पर लीक हुए प्रश्नपत्र खरीदने के इच्छुक थे। इससे यह संकेत मिलता है कि पेपर लीक केवल कुछ लोगों तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके लिए संभावित खरीदारों का एक बड़ा नेटवर्क भी तैयार किया गया था (Maharashtra TET Scam)।
बिहार तक पहुंची मामले की जांच
मुख्य आरोपी बिजेंद्र कुमार गुप्ता से लगातार पूछताछ जारी है (SIT Investigation)। इसी सिलसिले में भिवंडी पुलिस की एक टीम उसे लेकर बिहार के समस्तीपुर पहुंची है, जहां उसके अन्य सहयोगियों और पूरे नेटवर्क की तलाश की जा रही है। वहीं महाराष्ट्र में भी अलग-अलग टीमें उन लोगों की पहचान करने में जुटी हैं, जिन्होंने कथित तौर पर परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र खरीदने की कोशिश की थी।
सालों तक बिना सुरक्षा कैसे मिलता रहा ठेका?
इस पूरे मामले का सबसे गंभीर पहलू यह है कि जिस प्रिंटिंग प्रेस को पिछले दो से तीन दशकों से सरकारी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र छापने का जिम्मा दिया जाता रहा, वहां सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम ही नहीं थे।
अब कई अहम सवाल उठ रहे हैं
-क्या महाराष्ट्र शिक्षा विभाग ने कभी इस प्रिंटिंग प्रेस का सुरक्षा ऑडिट कराया?
-वर्षों तक संवेदनशील परीक्षा सामग्री छापने के बावजूद सुरक्षा मानकों की जांच क्यों नहीं हुई?
-क्या सिर्फ कर्मचारियों की गलती है या सिस्टम स्तर पर भी लापरवाही हुई?
-भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या नई व्यवस्था बनाई जाएगी?
15 आरोपी गिरफ्तार, जांच अभी जारी
अब तक इस मामले में 15 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें मुख्य आरोपी, उसके सहयोगी, प्रिंटिंग प्रेस के कर्मचारी और कथित रूप से प्रश्नपत्र बाहर निकालने में शामिल लोग शामिल हैं। SIT का कहना है कि जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में इस नेटवर्क से जुड़े और लोगों पर भी कार्रवाई हो सकती है। कुल मिलाकर महाराष्ट्र TET पेपर लीक अब केवल एक आपराधिक साजिश का मामला नहीं रह गया है। जांच ने सरकारी परीक्षाओं की सुरक्षा व्यवस्था, प्रिंटिंग प्रेस के चयन की प्रक्रिया और वर्षों से चले आ रहे निगरानी तंत्र की कमजोरियों को भी उजागर कर दिया है। यदि जांच में सामने आई लापरवाहियां सही साबित होती हैं, तो यह मामला सिर्फ पेपर लीक नहीं बल्कि सरकारी परीक्षा प्रणाली की जवाबदेही पर भी बड़ा सवाल बन सकता है।



