होली के रंग में हर कोई रंगना चाहता है, मगर डर ये भी रहता है कि रंगों में मिले केमिकल कहीं त्वचा को बेरंग न कर दें। होली का उल्लास फीका न पड़े, लोग बेफ्रिक होकर रंग खेलें, इसके लिए सबसे सुरक्षित हैं हर्बल कलर। देहरादून के सहसपुर ब्लॉक में महिलाओं ने करीब 2.5 कुंतल हर्बल कलर तैयार किया है।

ये महिलाएं स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हैं। इन्होंने हल्दी, चंदन, गुलाब और टेसू के फूल के अलावा चुकंदर और पालक के पत्ते जैसी प्राकृतिक चीजों से हर्बल कलर तैयार किया है। ये रंग त्वचा के लिए भी सुरक्षित होते हैं और पर्यावरण के भी अनुकूल होते हैं।

महिलाओं ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रति आभार जताया। महिलाओं ने कहा कि इस सहायता से वो आत्मनिर्भर बनी हैं और पर्यावरण को बचाने में भी अपनी भूमिका निभा रही हैं।

केमिकल वाले रंगों से होने वाले दुष्प्रभावों को देखते हुए प्राकृतिक और हर्बल रंगों की बाजार में काफी डिमांड है। स्थानीय बाजारों में इन हर्बल रंगों की काफी बिक्री हो रही है।



