दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) के नॉर्थ कैंपस में अचानक हंगामा शुरु हो गया। यहां UGC के समर्थन में उतरी छात्रों की भीड़ ने कथित रूप से एक महिला यूट्यूबर रुचि तिवारी पर जानलेवा हमला कर दिया। आरोप है कि, छात्रों की भीड़ को जैसे ही रुचि की जाति का पता चला, उसने उसपर अटैक कर दिया। आरोपों के मुताबिक भीड़ ने रुचि के कपड़े फाड़ने की कोशिश की, उसके बाल खींचे और मारपीट की। हालांकि, मौके पर पुलिस की मौजूदगी थी, जो वक्त रहते रुचि को भीड़ के चंगुल से निकालकर सुरक्षित स्थान पर ले गई। पुलिस ने इस मामले में कुछ लोगों को हिरासत में भी लिया।
सोशल मीडिया पर इस वारदात के कई वीडियो सामने आए हैं। जिनमें दिख रहा है कि, आर्ट्स फैकल्टी के बाहर रुचि तिवारी को दर्जन भर से ज्यादा महिला और पुरुष छात्रों ने घेर रखा है। वीडियोज़ में लोग ये कहते नजर आ रहे हैं कि, ‘ये ब्राह्मण है’, ‘इसे पकड़ो’, ‘इसे मारो’, ‘तब इसे सबक मिलेगा’ जैसे नारे लगाते सुनाई दे रहे हैं। आरोप है कि, भीड़ में कुछ लोगों ने ये भी कहा कि, ‘यहां कोई कुछ बोलना मत, वरना काट कर फेंक देंगे’।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद यूट्यूबर रुचि तिवारी ने आपबीती बताई। उन्होंने एक वीडियो जारी किया। जिसमें उन्होंने बताया कि, ‘मैं वहां एक रिपोर्टर से बात कर रही थी, तभी 100 से 150 लोगों ने मुझे घेर लिया। उन्होंने मेरा गला दबाया, बाल खींचे और मेरे कपड़े फाड़ दिए’। रुचि तिवारी ने आरोप लगाया कि, भीड़ चिल्ला रही थी कि इसे निर्वस्त्र करो। रुचि ने बताया कि, जब उनके साथियों ने उन्हें बचाने की कोशिश की तो उनके साथ भी मारपीट की गई। यही नहीं, उनके साथियों पर महिलाओं के साथ अभद्रता करने का झूठा आरोप लगाया गया।
ABVP ने इस मामले में वामपंथी संगठनों को घेरा। ABVP ने आरोप लगाया कि, SFI और AISA हिंसा का इस्तेमाल कर रहे हैं। फिलहाल, पुलिस इस मामले की पड़ताल कर रही है और वीडियो के आधार पर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की बात कर रही है। लेकिन, सवाल ये है कि, अगर आरोप सही हैं तो भीड़ को महिला यूट्यूबर के साथ जाति के आधार पर मारपीट करने का अधिकार किसने दिया? क्या प्रदर्शन के नाम पर जाति आधारित हिंसा न्यायसंगत है?



